बस्ती। अगर दिव्याशु खरे पर करोड़ों का चूना लगाने का आरोप लग सकता है, तो दिव्याशु खरे भी रत्नाकर श्रीवास्तव पर लगभग दो करोड़ कर चूना लगाने का आरोप लगा सकते है। कहने का मतलब चूना लगाने का आरोप सिर्फ दिव्याशु खरे पर ही नहीं लग रहा है, बल्कि अन्य पर भी लग रहा है। आरोप लगाने और चूना लगाने वाले कोई अंजान नहीं हैं, कभी दोनों में गहरी दोस्ती थी, एक दूसरे के घर आना जाना और दावतें करना होता था, अचानक न जाने क्या हुआ कि दिव्याशु खरे की नजर में रत्नाकर श्रीवास्तव एवं उनकी पत्नी वर्षा श्रीवास्तव चोर हो गई। जितने भी लेन-देन के मामले अब तक सामने आए, उनमें कहीं न कहीं घरेलू संबध रहें, नमन श्रीवास्तव की पत्नी शिवांगी श्रीवास्तव तो अनूप खरे की सगी भांजी है। रही बात दिव्याशु खरे और रत्नाकर श्रीवास्तव की तो दोनों में दांत काटों वाली दोस्ती कभी थी। दोनों कभी एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते थे। अब तक जितने भी रिष्ते खराब हुए, वे सभी लेन-देन में ही हुए। इसी लिए कहा भी जाता हैं, कि दोस्ती और रिष्ता तब तक बरकरार रहता है, जब तक लेन-देन नहीं होता। कहावत भी हैं, कि अगर रिष्ते को पहचानना हैं, तो लेन-देन करके देख लो। लेन-देन करना कोई बुरी बात नहीं हैं, बुरी बात है, नीयत खराब होना। अब जरा अंदाजा लगाइए कि कितने लोग ऐसे होगें, जिनके पास करोड़ों होगा, अधिकांश लोगों ने तो लाख दो लाख तक ही देखा होगा, करोड़ तो खबरों में पड़ने को मिलता है। लेकिन षहर में खरे जैसे न जाने कितने लोग होगें, जो करोड़ों रुपया सूद पर देते और लेते हैं। मामला तब प्रकाष में आता है, जब लेन-देन में बेईमानी या फिर सूसाइड या फिर हत्या जैसे मामले सामने आते है। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि क्या इंसान कम पैसे में नहीं गुजारा नहीं कर सकता या फिर ईमानदारी से नहीं रह सकता। माना जाता है, कि जितना सुखी एक गरीब आदमी रहता और आराम से सोता है, उतना बेईमान नहीं। यह कहना भी गलत होगा, कि बेईमान ही राज करते हैं, और बेईमानों का ही बोलबाला। जरा उन लोगों के परिवार को भी देखिए, जो ईमानदारी से जीवन यापन कर रहे है। देखा जाए तो समाज को ऐसे लोगों के ईमानदारी पर नाज करना चाहिए, जिन्हें अपनी मेहनत और किस्मत पर भरोसा है। ऐसे लोगों पर नहीं जिनका पूरा का पूरा परिवार आईफोन लेकर घूमता वह भी उधार का लेकर।

अब जरा दिव्याशु खरे का दर्द भी सुन लीजिए। एसपी को दिए गए प्रार्थना बंद में इन्होंने रामेष्वरपुरी निकट बजाज एजेंसी कंपनीबाग के दवा के कारोबारी रत्नाकर श्रीवास्तव पुत्र प्रेम चंद्र श्रीवास्तव पर आरासेप लगाया है, कि इन्होंने कारोबार के लिए एक करोड़ 90 लाख लिया, और जो भी रकम दिए गए, सभी एकाउंट में दिए। कहा कि 2021 से आनलाइन लेन-देन होता रहा। व्यवसायिक में मेरा विष्वास रत्नाकर श्रीवास्तव और उनकी पत्नी वर्षा श्रीवास्तव से हो गया। रत्नाकर ने उसे दो मंजिला मकान खरीदने के लिए प्रेरित किया। जमीन और मकान की कीमत तीन करोड़ से अधिक बताई गई। रत्नाकर ने यह भी कहा कि अगर तुम खरीदोगे तो 2.50 करोड़ में दे देगें। अगस्त 2025 में बैनामा करने को कहा। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए वार्ता के समय अपने मित्र अनुभव श्रीवास्तव पुत्र राकेश श्रीवास्तव एवं सूरज श्रीवास्तव पुत्र सतीश चंद्र श्रीवास्तव को गवाह बनाया। दस्तावेज के रुप में नगर पालिका का एसेसमेंट दिया,? इसी आधार पर अपने बैेंक एचडीएफसी के खाता 501000350290511 एवं चाचा अनूप खरे के आईसीआईसीआई बैंक के खाता 066205500427 से 15 जुलाई 25 को एक करोड़ 90 लाख रत्नाकर और उनकी पत्नी वर्षा के बैंक में टांसफर कर दिया। पैसा देने के बाद मकान और जमीन का बैनामा करने को कहा। जिस पर पति और पत्नी हीलाहवाली करने लगें। लिखा कि जब उसने पालिका जाकर एसेसमेंट की सत्यतता पता किया तो पता चला कि उक्त मकान तो रत्नाकर की माता कृष्ण मोहनी के नाम पर है। इसके बाद जब बैनामा करने का दबाव बनाया तो कहा कि माताजी बैनामा करने को तैयार नहीं है। तब कहा कि ठीक हैं, पैसा वापस कर दो, बहाना करते रहे। मजबूर होकर दोनों दोस्तों के साथ रत्नाकर के पास नौ नवंबर 25 को सांयकाल छह बजे गए, पैसा मांगने पर नाराज हो गए, और गाली देते हुए कहा कि जाओ पैसा नहीं मिलेगा, जो करना हो कर लो। लिखा कि पैसा मांगने पर उल्टा कानूनी कार्रवाई करने और जान से मारने की धमकी देते है। लिखा कि वह इसकी जानकारी कोतवाली में थी, लेकिन एफआईआर नहीं लिखा गया। लिखा  िकवह दस माह से पैसा और एफआईआर लिखाने के लिए परेशान हूं, लेकिन न तो एफआईआर दर्ज हो रहा है, और न पैसा ही वापस मिल रहा।