-इस गरिमा गृह में देष की कोई भी किन्नर आकर षेल्टर ले सकती, बषर्ते उसके पास डीएम के द्वारा जारी पहचान पत्र हो
-इस गरिमा गृह में किन्नरों के लिए स्कील डपलपमेंट का कार्यक्रम भी चलता, प्रत्येक इतवार को दोपहर बाद पाठशाला भी लगता

-भारत सरकार की इस योजना का लाभ फिलहाल बस्ती की 22 किन्नर उठा सकती है, 13 और किन्नर की आईडी जारी करने की प्रक्रिया चल रही
बस्ती। किन्नर समाज के हितों और उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने की लड़ाई लड़ने वाले इंदिरा गांधी चैरिटेबुल के कर्त्ताधर्त्ता अजय पांडेय की मेहनत उस समय रंग लाई, जब इन्होंने राज्यपाल से गरिमा गृह का उदघाटन करवाया। यह गरिमा गृह रौतापार में ‘किन्नर काजल’ के आवास पर संचालित हो रहा है। इसके लिए काजल को प्रतिमाह 40 हजार किराया मिलता है। इस गरिमा गृह में देश की कोई भी किन्नर आकर शेल्टर ले सकती है, बशर्ते उनके पास डीएम के द्वारा जारी पहचान पत्र होना चाहिए। वर्तमान में बंगाल सहित अन्य प्रांत की पांच-छह किन्नर गरिमा गृह में मिलने वाली सुविधा का आंनद ले रही है। फ्री में एसी और शानदार भोजन का मजा उठा रहीं, चिकित्सा सुविधा का लाभ भी उन्हें मिल रहा है। इस गरिमा गृह में किन्नरों के लिए स्किल डपलपमेंट का कार्यक्रम भी चलता, प्रत्येक इतवार को दोपहर बाद पाठषाला भी लगता। भारत सरकार की इस योजना का लाभ फिलहाल बस्ती की 22 किन्नर उठा सकती है, 13 और किन्नर की आईडी जारी करने की प्रक्रिया चल रही।
आजादी के बाद पहली बार जिले में किन्नरों को मुख्य धारा से जोड़ने और उन्हें निःषुल्क आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की जो पहल की गई, उसका स्वागत किन्नर समाज के साथ अन्य वर्ग के लोग भी कर रहे हैं, और कह रहें, कि किन्नरों की सुध बहुत पहले सरकार को ले लेनी चाहिए थी। इतना ही नहीं सरकार रोजगार के जरिए किन्नरों को समाज के अन्य वर्गो की तरह खुद का कारोबार करने के लिए एक प्लेट फार्म तैयार करेगी। जल्द ही किन्नरों को भी बाजारों में कारोबार और बेचते हुए देखा जा सकता है। जाहिर सी बात हैं, अधिकांश खरीदारों का झुकाव किन्नरों की ओर होगा, क्यों कि हर कोई इन्हें मुख्य धारा से जुड़ते हुए देखना चाहता है। सरकार प्रति साल इस गरिमा गृह पर 39 लाख रुपया खर्च करेगी, फिलहाल अभी तक फंडिगं नहीं हुई हैं, और किन्नर काजल नीति धन से किन्नरों की सेवा कर रही है। यह गरिमा गृह पूरी तरह भारत सरकार के द्वारा वित्त पोशित होगा, इससे राज्य सरकार से कोई लेना-देना नहीं। गरिमा गृह को बेहतर रुप में संचालित करने के लिए भारत सरकार की ओर से स्टाफ के नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है, लगभग 10-12 की नियुक्ति हो सकती है। जहां पर गरिमा गृह संचालित हो रहा है, उसके आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ऐसे स्थान पर गरिमा गृह का संचालन होना सवाल बना हुआ है। इस बात से अजय पांडेय भी सहमति हैं, कहते हैं, कि जिस दिन उन्हें तीन हजार स्क्वायर फीट का मकान किराया पर मिल गया, उस दिन गरिमा गृह को शिफट कर दिया जाएगा। कहते हैं, कि कोई जरुरी नहीं कि आवास किसी किन्नर का ही हो। चूंकि भारत सरकार की गाइड लाइन में ही किराए पर संचालित करने की व्यवस्था हैं, फिर इसे सरकारी जमीन या फिर सरकारी आवास पर स्थापित करने पर विचार हो रहा है।
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