बस्ती। बहुत कम सुना होगा कि मालिक और नौकर दोनों चोर हों। चूंकि चोरी सरकार के धन की दोनों कर रहें हैं, इस लिए किसी को कोई चिंता नहीं। इस सच का एहसास पीओ सिटी के मालिक और उसके नौकर को देखकर हो जाएगा। मालिक अगर रिजेंट के नाम पर करोड़ों की चोरी करता है, तो नौकर लैब में रिजेंट की चोरी करता, मालिक को उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लि. के एमडी तो नौकर को अस्पतालों के अधीक्षक करवा रहें है। पीओ सिटी का मालिक अगर प्रदेश के 247 अस्पतालों में रिजेंट के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपये की चोरी कर रहा है, तो नौकर जिले स्तर पर कर रहे है। नौकरों की चोरी बस्ती के जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, टीबी अस्पताल और 100 बेड एमजीएच हर्रैया अस्पताल में देखी जा सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है, कि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लि. ने पीओ सिटी से सिर्फ रिजेंट आपूर्ति का अनुबंध किया, मैन पावर का नहीं। अब जरा अंदाजा लगाइए कि मशीन सरकार की, अस्पताल सरकार का, डाक्टर सरकार के, पैथालाजिस्ट सरकार के, यहां तक एलटी भी सरकार के, तो फिर पीओ सिटी के कर्मचारियों का क्या काम? क्यों यह लोग लैब में लगे मशीनों को आपरेट कर रहे है? और क्यों सीएमएस और एसआईसी आपरेट करने की इजाजत दे रहे है? सवाल उठ रहा है, कि जब अस्पताल में पैथालाजिस्ट, डाक्टर और एलटी नियुक्ति हैं, जिन्हें सरकार लाखों रुपया हर माह वेतन दे रही है, तो फिर क्यों नहीं इन लोगों ने लैब का काम लिया जा रहा है, आखिर यह लोग कर क्या रहें? और इन्हें क्यों बिना किसी काम के वेतन दिया जा रहा है? सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि जब 100 बेड एमसीएच हर्रैया अस्पताल में डा. दीपक शुक्ल और जिला महिला अस्पताल में डा. पुजारी लाल गुप्त पैथालाजिस्ट के रुप में कार्यरत हैं, तो फिर इन दोनों से क्यों नहीं लैब का काम लिया जाता? और क्यों नहीं दोनों के द्वारा जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किया जा रहा है? यह दोनों ओपीडी तो करते हैं, लेकिन का कामकाज नहीं सभालतें, जिसका फायदा पीओ सिटी के कर्मचारी उठाते हैं, जिन कर्मी को लैब में जाना मना है, वह लैब के मषीन को आपरेट कर रहा है, और उसे वेतन भी दिया जा रहा है। इन लोगों को जानबूझकर रखा गया गया, ताकि पीओ सिटी वाले इनके जरिए रिजेंट की चोरी कराइ जा सके। रिजेंट की चोरी करने के लिए यह लोग जानबूझकर रिजेंट की डिमांड करते हैं, अगर एक बोतल रिजेंट की आवष्यकता है, तो पांच बोतल मंगाते, चार बोतल रिजेंट की चोरी करते है। कहने का मतलब उपयोग एक बोतल रिजेंट की हैं, और मांग पांच बोतल की जाती है। चूंकि अस्पताल के जिम्मेदारों से इससे कोई मतलब नहीं रहता, उन्हें तो कमीशन से मतलब रहता है, इस लिए प्रदेश स्तर पर मालिक और जिले स्तर पर नौकर चोरी कर रहा है। किसी सीएमएस में इतनी हिम्मत नहीं कि यह पूछ सके कि अस्पताल में पीओ सिटी के आदमियों का क्या काम? कमीशन ने सबका मुंह बंद कर दिया, क्यों कि जितना अधिक रिजेंट की आपूर्ति होगी, उतना अधिक कमीशन मिलेगा? अगर दोनों अस्पतालों के पैथालाजिस्ट और 100 बेड एमसीएच हर्रैया अस्पताल के दोनों एलटी ईमानदार हो जाए तो पीओ सिटी के रिजेंट की चोरी बंद हो सकती है।
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