बस्ती। जो लोग विवादित चर्च की जमीन पर दूकानें बनवाकर करोड़ों रुपया ‘कमाने’ का नहीं बल्कि ‘बनाने’ का सपना देख रहें हैं, उन लोगों का सपना शायद ही कभी पूरा हो। ‘कमाने’ और ‘बनाने’ के अंतर को एक बार फिर स्पष्ट कर रहा हूं, बकौल ‘हर्षद मेहता’, पैसा ईमानदार लोग ‘कमाते’ हैं, और बेईमान लोग पैसा ‘बनाते’ है। जो लोग दुकान के जरिए पैसा ‘बनाने’ में लगे हैं, उन लोगों का तो बहुत कुछ नहीं जाएगा, लेकिन उन गरीब कारोबारियों का बहुत कुछ चला जाएगा, जिन्होंने रोजगार करने के लिए कर्ज लेकर या गहने बेचकर लाखों दिया होगा। यह दावा किसी और ने नहीं बल्कि यूपी और उत्तराखंड के चर्च के अरबों रुपये की संपत्तियों का देखभाल करने वाले चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ के प्रिसिंपल आफिसर बाबी विलियम का। कहते हैं, जिस अनिल लाल नामक कथित प्रापर्टी इंचार्ज, चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ को अपना बताकर दुकान का निर्माण करवा रहे हैं, उस चर्च के नाम से बस्ती सहित पूरे देश में कोई प्रापर्टी नहीं है। दावा करते हैं, कि जिसने भी चर्च आफ इंडिया ‘सीआईबीसी’ की प्रापर्टी पर नजर डाली उसे मुंह की खानी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर कोई जबरिया दुकानों का निर्माण करवा भी लेता है, तो उसे ठीक उसी तरह कोर्ट के आदेश से ध्वस्त करवा दिया जाएगा, जिस तरह से 2016 में करवाया गया था। उन्होंने उन निवेशकों को आगाह और चेतावनी दिया जो दुकान के लालच में लाखों रुपया एडवांस दे रहे हैं, या देने वाले हैं, कहा कि कि अगर वे किसी के झांसे में आते हैं, और दुकान के नाम पर पैसा देते हैं, तो उनका पैसा डूबना तय है। पैसा देने से अच्छा जो जिस तरह और जहां चर्च की संपत्ति पर रोजगार कर रहा है, वह करें, लेकिन किसी को न तो किराया दे और न दुकान के नाम पर पैसा। बताया कि यह बात हमने वहां के लोगों को बता भी चुके हैं। आज उन्होंने फिर स्पष्ट किया कि वह लोग जिस भी स्थिति में रहकर कारोबार कर जीवन यापन कर रहे हैं, करें, चर्च उन्हें परेशान नहीं करेगा और न किराया ही मांगेगा। कहा कि उनकी योजना अवैध रुप से निर्माण किए गए दुकानों को ध्वस्त कराकर चारों तरफ से बाउंडीवाल कराने की है, और उसके बाद चारों ओर चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ की प्रापर्टी के नाम का बोर्ड लगावाना रहेगा। कहा कि स्थानीय प्रशासन ने तो 50 पत्र लिखने के बाद उनकी नहीं सुनी, लेकिन एक पत्र लिखने के बाद षासन ने सुन लिया, और कार्रवाई कर रहा है।

जब उनसे चर्च के भीतर संचालित हो रहे, ‘सीनियर सेकेंडी स्कूल’ के संचालन और उसके मैनेजर अर्पूवा लाल के बारे में पूछा गया, तो कहने लगे, चर्च का पुराना स्कूल चल रहा था, जिसे बंद करना पड़ा, लेकिन पता चला कि चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के कथित प्रापर्टी इंचार्ज अनिल लाल के द्वारा स्कूल पर कब्जा कर उसे असवैंधानिक तरीके से संचालित किया जा रहा है, इस स्कूल से चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ से कोई भी लेना देना नहीं है। कहते हैं, कि इस स्कूल का पंजीकरण कहां से और किसने किया, इसकी भी जांच की जाएगी, क्यों कि स्कूल का पंजीयन नहीं है। कहते हैं, बड़ा भाई अनिल लाल चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के कथित प्रापर्टी इंचार्ज और छोटा भाई अर्पूवा लाल ‘सीनियर सेकेंडी स्कूल’ के मैनेजर, प्रिसिंपल तरुना सिंह भी उनकी टीम की। चौकाने वाली बात बताते हैं, कि बस्ती स्थित चर्च की जो संपत्ति हैं, वह चर्च आफ इंडिया ‘सीआईबीसी’ की सबसे कम कीमत वाली है। उन्होंने एक और चौकाने वाला खुलासा किया, कहा कि जो डीएम आवास हैं, वह भी चर्च आफ इंडिया ‘सीआईबीसी’ की संपत्ति हैं, उसे बांसी के राजा को एक रुपया लीज पर दिया गया था, चर्च के पास इसकी ‘डीड’ भी हैं। उन्होंने पूरी व्यवस्था को चैलेंज करते हुए कहा कि जिस दिन चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के कथित प्रापर्टी इंचार्ज अनिल लाल, यह साबित कर देगें कि प्रापर्टी उनकी हैं, तो वह बस्ती के चर्च की सारी प्रापर्टी को उसी दिन छोड़ देगें। चूंकि प्रशासन ने कभी इनसे चर्च के मालिकाना हक के दस्तावेज मांगें ही नहीं, क्यों नहीं मांगे यह सवाल बना हुआ हैं, नहीं तो चर्च की संपत्ति के लिए इतनी लड़ाई न लड़नी पड़ती। कहते हैं, अनिल लाल चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ की संपत्ति पर चर्च आफ नाथ इंडिया ‘सीएनआई’ का बोर्ड लगवाकर उसे अपना बता रहें, पैसा ‘बनाने’ के लिए चर्च की संपत्ति पर अवैध रुप से दुकानों का निर्माण करवा रहे हैं, और भोले भाले बस्ती के लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसा एंठ रहें है। इस तरह का जब भी कोई मामला सामने आता है, तो सबसे अधिक नुकसान गरीबों का होता है, और सबसे अधिक फायदे में प्रशासनिक तंत्र रहता है। उपर से जब दबाव पड़ता है, तो ऐसा पल्टी मार लेते हैं, जैसे मानो कभी दोस्ती का रिश्ता रहा ही न हो। पीडब्लूडी की तरह एडजस्ट करने की परम्परा भी इनमें नहीं रहती, अगर रहती तो दोस्ती बरकरार रहती।