बस्ती। मेडिकल कालेज में कोरोना योद्वा के भर्ती के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है, कि ऐसे-ऐसे लोगों की भर्ती पैसा लेकर कर दी गई, जिन्हांेने कोरोना काल में एक दिन भी मेडिकल कालेज में काम नहीं किया। शिकायत में कहा गया कि सेवा योजन पोर्टल पर विज्ञप्ति बाद में निकाली गई, और भर्ती पहले कर दी गई, भर्ती के बाद विज्ञप्ति निकाला गया। सवाल उठाया गया, कि आखिर विज्ञप्ति के पहले कैसे भर्ती कर ली गई? वह भी एक नहीं 15 भर्ती की गई। इस भर्ती में आउटसोर्सिगं की एजेंसी की पूरी मिली भगत बताई जा रही है। कहा भी जा रहा है, कि इस मामले में प्रधानाचार्य को जांचोपरांत शिकायत सही पाए जाने पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, सबसे पहले एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड की कार्रवाई करनी चाहिए। क्यों कि मामला मेडिकल कालेज से जुड़ा हैं। नाम सहित 15 लोगों की फर्जी भर्ती की शिकायत की गई, इनमें पंकज कुमार, मुकेश कुमार, मुस्कान गुप्त, युवराज निषाद, अजय गुप्त, अजीत कुमार, पुष्पावती एवं वंदना यादव सभी टेक्निसियन, कम्पयूटर आपरेटर अमन सिंह, परमात्मा प्रसाद चौधरी, अजय कुमार, शुभम तिवारी एवं प्रदीप कुमार सभी वार्ड ब्याय एवं कु. रागिनी वार्ड आया का नाम शामिल है। इन सभी का डिटेल मांगा गया है, यह लोग किस विभाग में कार्य किए, उपस्थित रजिस्टर की प्रति, ईपीएफ, यूएनएन नंबर जिसमें ईपीएफ जमा होता, कोरोना में किस आउटसोर्सिगं एजेंसी से भर्ती हुई, उसका नियुक्ति पत्र, वेतन विवरण खाता संख्या की जानकारी शिकायतकर्त्ता की ओर से मांगी गई। जांच का विषय भी यही होना चाहिए। कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए है। कमिश्नर के अतिरिक्त इसकी शिकायत सीएम, डिप्टी सीएम, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण एवं महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण से भी की गई। यह शिकायत एक दिन पहले यानि 16 अप्रैल 26 को की गई। यह षिकायत क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा एसटी मोर्चा गोरखपुर क्षेत्र के सुखराम गौड़ की ओर से की गई। प्रधानाचार्य का कहना है, कि चूंकि भर्ती संबधित पत्रावली सेवा प्रदाता के पास रहती है, उसको मंगा कर जांच की जाएगी, अगर शिकायत सही पाई गई, तो भर्ती को निरस्त करके सेवा प्रदाता के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।

जब भी आउटसोसिगं एजेंसी का नाम आता है, फर्जीवाड़ा की बदबू आने लगती है। डूडा सहित अन्य जितनी भी एजेंसी हैं, कहीं न कहीं इनका नाम अवष्य आता है। एक तरह से सरकार ने आउटसोर्सिगं एजेसिंयों को लूटने का मौका दे रही है। जितने भी जांच हुए, उन सभी में फर्जीवाड़ा निकला, हाल ही में अशासकीय मान्यता प्राप्त विधालयों में कार्यरत आउटसोर्सिगं कर्मी के मामले में कमिश्नर ने जब जांच कराई तो बड़ा फर्जीवाड़ा निकला, जिसमें ‘माहिस इंफोटेक प्रा.लि.’ की निविदा निरस्त कर दी गई। जांच में जेडीई और निविदा बाबू आलोक दूबे की मिली भगत पाई गई। ऐसी-ऐसी एजेंसी है, जो आउटसोर्सिगं के जरिए रातों रात करोड़पति हो गई। यही कारण है, कि आजकल जरा सा भी राजनीति में दखल देने वाला भी आउटसोर्सिगं एजेंसी खोलने की फिराक में रहता है। यह लोग ईपीएफ, मानदेय और भर्ती में बड़ा घोटाला करते हैं, चूंकि इसमें विभाग के अधिकारी और बाबू भी मिले रहते हैं, इस लिए कोई कार्रवाई नहीं होती, घोटाला करने के लिए एजेंसी को हर माह बड़ी रकम अधिकारियों और बाबूओं को देनी पड़ती है, तब जाकर भुगतान होता है। कहा भी जाता है, कि जिस दिन जेडीई आंनदकर और बाबू आलोक दूबे जैसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होने लगेगी,  उस दिन एजेंसी की कमाई बंद हो जाएगी।