बस्ती। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि पीडब्लूडी प्रांतीय खंड के बड़े साहब क्यों हर्रैया विधानसभा क्षेत्र के ठेकेदारों पर ही इतना मेहरबान रहते हैं? कहीं यह सत्ता का हनक तो नहीं? इस बार भी जो टेंडर निकला, उसमें हर्रैया के ठेकेदारों का विशेष ध्यान रखा गया। अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं, कि अकेले हर्रैया विधानसभा क्षेत्र में सड़कों के सामान्य मरम्मत के साथ नवीनीकरण के नाम पर पीडब्लूडी प्रांतीय खंड में 104 सड़कों का टेंडर निकला। जबकि कप्तानंगज और महादेवा दोनों विधानसभा मिलाकर 75 सड़कों का टेंडर निकला, इसमें महादेवा में 48 और कप्तानगंज में मात्र 27 सड़कों का टेंडर निकाला, ऐसा भी नहीं इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में टूटी-फूटी सड़कें नहीं है। यह वही हर्रैया विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां पर जीरो बिलो पर टेंडर निकलता है, जबकि अन्य में 30 से 35 फीसद बिलो में ठेकेदारों को काम मिलता। कहा जाता है, कि नेताओं, विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बढ़िया तालमेल होने का लाभ हर्रैया के लोगों को मिलता। यही कारण है, कि हर्रैया के ठेकेदार कभी अनियमितता या फिर बखरा को लेकर हो हल्ला नहीं मचाते। अब जरा अंदाजा लगाइए कि हर्रैया का ठेकेदार जीरी फीसद बिलो पर ठेका पाता है, और अन्य क्षेत्र के लोगों को 30-35 फीसद बिलो पर काम मिलता। इसमें विभाग का दस फीसद बखरा एवं अन्य दस फीसद खर्चा शामिल नहीं है। जाहिर सी बात हैं, कि जिस क्षेत्र के ठेकेदारों को अधिक लाभ मिलेगा, वह उस क्षेत्र के नेता का जयजयकार करेगा ही। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, जो लाभ हर्रैया के ठेकेदारों को मिल जा रहा है, वही लाभ अन्य विधानसभा क्षेत्र के ठेकेदारों को क्यों नहीं मिलता? क्या इसके लिए महादेवा, रुधौली, सदर और कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र के नेताओं की कमजोरी को जिम्मेदार माना जाए। हालांकि इसके लिए अन्य क्षेत्र के नेताओं के बीच विरोध का स्वर उभर भी चुका है। कहा भी जाता है, अगर कोई नेता कमजोर होता है, तो उसका नुकसान उसे और उसके लोगों को उठाना पड़ता है। यह अलग बात है, कि सत्ता प़क्ष का नेता हमेशा मजबूत होता है, अधिकारी भी उसी की ही अधिक सुनते है। इसका उदाहरण हर्रैया के रुप में देखा जा सकता है। विपक्ष के नेताओं में इतनी भी ताकत नहीं रहती कि वह उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करवा सके। यह इतना कमजोर होते हैं, कि गुणवत्ताविहीन सड़कों की जांच तक ठीक से नहीं करा पाते। यह बाहर से तो कमजोर रहते ही हैं, सदन में भी कमजोर दिखाई देते है। देखा जाए तो यह इतना कमजोर होते हैं, कि अपने अधिकारों तक का उपयोग नहीं कर पाते। इसी कमजोरी का लाभ अधिकारी और सत्ता पक्ष के नेता उठातें है। हर्रैया के ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए पीडब्लूडी प्रांतीय खंड के बड़े साहब ने 15 फरवरी 26 तक 104 कामों का टेंडर ही अपलोड नहीं किया, जबकि पीडब्लूडी खंड एक के बड़े साहब ने 12 फरवरी 26 को ही सदर और रुधौली विधानसभा क्षेत्र का टेंडर अपलोड कर दिया, ताकि अधिक से अधिक ठेकेदार टेंडर को आन लाइन अपलोड कर सके। इसी तरह प्रांतीय खंड के बड़े साहब को भी 12 फरवरी 26 को भी अपलोड करना चाहिए था। लेकिन इन्होंने अपलोड नहीं किया, ठेकेदार अपलोड होने का इंतजार करते रहें ठेकेदारों को 12 से 20 फरवरी 26 तक टेंडर को आनलाइन अपलोड करना हैं, टेंडर 20 को दोपहर बाद खुलने की तिथि बताई गई। एक ही जिले में और एक ही विभाग में दो नियम चल रहा है। अकेले हर्रैया के हिस्से में 104 टेडर आना चर्चा का विषय बना हुआ है।