बस्ती। अगर बीडीए का कोई जेई बीडीए के भ्रष्टाचार की पोल लिखित में खोलता है, तो इसे अति गंभीर मानकर कार्रवाई करनी चाहिए। चूंकि बीडीए में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई प्रावधान नहीं हैं, इसी के चलते बीडीए का भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। चूंकि इस भ्रष्टाचार की गंगा में लगभग सभी जिम्मेदार गोता लगा रहे हैं, इस लिए गंगा मैली होती जा रही है। रही बात बीडीए के तीनों नामचीन सदस्यों का तो इन्हें जनता भूल चुकी है। पीड़ित भवन स्वामियों को कभी लगा ही नहीं कि बीडीए का कोई सदस्य भी है। कहना गलत नहीं होगा कि सदस्यों की कमजोरी का लाभ बीडीए के लोगों ने खूब उठाया। जितना चाहा और जैसा चाहा भवन स्वामियों का दोहन किया।

तत्कालीन बीडीए के जेई और वर्तमान में खुर्जा विकास प्राधिकरण के जेई अनिल त्यागी ने जिलाधिकारी/उपाध्यक्ष को एक पत्र लिखा, और कहा कि अगर आप को भ्रष्टाचार का साक्ष्य चाहिए तो उसे भी उपलब्ध कराने को तैयार हूं। पत्र में कहा गया कि बीडीए में मुख्य लिपिक महेंद्र कुमार सोलंकी पिछले छह साल से तैनात है। यह कानपुर के रहने वाले हैं, और महीने में मुस्किल से दो-तीन बीडीए कार से आते हैं, और वेतन महीने भर की लेते है। यह दो-तीन माह तक गायब रहते है। यह सारी जानकारी सचिव और एक्सईएन को हैं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। इसी तरह अष्वनी अवस्थी नामक लेखाकार जो रिटायर हो चुके है। यह भी कानपुर के रहने वाले हैं, और यह माह में सात-आठ दिन ही बीडीए है। खासबात यह है कि सोंलकी और अवस्थी दोनों कानपुर से जब मर्जी किया साथ-साथ आते और जाते है। बीडीए में इन दोनों के लिए कोई हाजरी रजिस्टर नहीं बनाया गया। बायोमैटिक मशीन भी इन्हीं दोनों के लाभ के चलते नहीं लगवाई गई। कहा गया कि पिछले छह सालों में इन दोनों के चलमें बड़े-बड़े घोटाले हुए। अवैध निर्माण करवाए जाने में भी दोनों की भूमिका रही। दावे के साथ कहा कि पहली फरवरी 2018 से 26 जून 2026 तक वह बीडीए में जेई के रुप में तैनात रहा। कहा कि वह इस मामले में शपथ-पत्र तमक देने को तैयार है, लेकिन दोनों के खिलाफ न सिर्फ कार्रवाई होनी चाहिए बल्कि इन दोनों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, क्यों कि इन दोनों ने मिलकर सरकार को काफी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।