बस्ती। महादेवा विधानसभा क्षेत्र के ओम प्रकाश राजभर पार्टी और भाजपा के सहयोगी दल के विधायक दूधराम ने अपनी ही सरकार के एसओ नगर पर जबरन वसूली करने, थाने पर जाने वाले शिकायतकर्त्ताओं के साथ बदसलूकी करने और सरकार की छवि को धूमिल करने वाला बताकर मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर एसओ को महादेवा विधानसभा क्षेत्र से बाहर तबादला करने की अपील की है, ताकि एसओ के जनविरोधी कार्य प्रणाली से क्षेत्र की जनता को निजात मिल सके। विधायकजी ने डीआईजी और एसपी को भी कार्रवाई करने को लिखा। इस सबंध में जब एसओ के सीयूजी नंबर 9454403118 पर उनका पक्ष लेने का प्रयास किया तो बताया गया, कि साहब मीटिगं में हैं, चार घंटे बाद जब प्रयास किया गया तो कोई रिस्पांस नहीं मिला। पक्ष मिलते ही एसओ साहब का लिख दिया जाएगा। हैरानी हो रही है, कि विधायकजी को पत्र लिखे आठ दिन से अधिक हो गए, लेकिन न तो सीएम ने और न डीआईजी और एसपी ने पत्र को संज्ञान में लिया, अगर लिए होते तो एसओ साहब को विधायकजी के विधानसभा क्षेत्र से या तो किसी थाने में जाना पड़ता या फिर लाइन हाजिर कर दिए गए होते। विधायकजी को अच्छी तरह मालूम हैं, कि योगी राज में जब उनके मंत्री की नहीं सुनी जाती है, तो उनकी कौन सुनेगा। यह वही विधायक हैं, जिन्होंने एक भ्रष्ट महिला सचिव को हटाने के लिए एड़ी चोटी लगा दिया, डीएम से लेकर डीपीआरओ और मंत्री तक से कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जब विधायकजी एक सचिव का तबादला नहीं करवा सकते तो एसओ का तबादला क्या खाक करवा पाएगें? विधायकजी और उनके समर्थक परेशान हैं, कि पत्र कैसे सोशल मीडिया में वायरल हुआ, किसने किया, इसकी छानबीन हो रही है, क्यों कि विधायकजी नहीं चाहते थे, कि उनका यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो, क्यों कि इन्हें अच्छी तरह मालूम हैं, कि जब उनके लिखने से सचिव नहीं हटा तो एसओ कैसे हटेंगे? बहरहाल, विधायकजी का यह पत्र खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री को यह लिखना कि एसओ के बने रहने से सरकार की काफी बदनामी होगी। आम जनता इनके कार्यप्रणाली से बहुत ही आक्रोषित है। अगर इसके बाद भी एसओ का तबादला नहीं होता तो इससे किसकी बदनामी हुई सरकार की यह विधायकजी की। कहना गलत नहीं होगा, कि विधायकजी ने पत्र लिखकर खुद अपनी बदनामी करवाई है। मुख्यमंत्री से मिलने का फोटो वायरल करना और बात हैं, और मुख्यमंत्री से एक दरोगा का तबादला करवाना अलग बात है। इससे लगता है, कि मुख्यमंत्री यह नहीं चाहते कि कोई विधायक उनके दारोगा को चोर और बेईमान कहकर तबादला करवाने को लिखे। जो काम डीआईजी और एसपी से हो सकता है, अगर विधायकजी वही काम सीएम से करवाना चाहेेंगें तो बदनामी तो होगी ही। कौन नहीं जानता कि एसओ किसके खास होते हैं, और यह किसका कहना मानते हैं, लगता है, कि विधायकजी को यह गलत फहमी हो गई कि वह विधायक हैं, तो मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं टालेगें। अगर विधायकजी अभी तक अपने आप को और मुख्यमंत्री को नहीं समझ पाए हैं, तो इसमें दरोगा की क्या गलती?
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