बस्ती। कहा जाता है, कि जिस दिन सपा की सरकार बनी उस दिन सबसे पहले और बड़ा हमला अखिलेश यादव को टोटी चोर बताने वाले और पीओ सिटी सर्विसेज के मालिक एवं रिटायर चर्चित आईएएस अधिकारी और यूपीएमएससी लि. के एमडी पर गिरेगी। सवाल उठ रहा है, अखिलेश यादव को टोटी चोर कहने वाले अधिकारी पर यूपीएमएससी लि. के एमडी इतना मेहरबान क्यों? हर साल रिजेंट के नाम पर पांच सौ करोड़ का घोटाला यूपीएमएससी लि. के एमडी के साथ मिलकर कर रहे हैं, उसका खामियाजा एमडी और पीओ सिटी सर्विसेज के कर्त्ताधर्त्ता को भुगतना पड़ेगा, दोनों को जेल तक जाना पड़ सकता है। अभी तो इन्हें डिप्टी सीएम बचा रहे हैं, लेकिन इन दोनों को अखिलेश यादव से कौन बचाएगा? बार-बार सवाल उठ रहा है, कि क्यों नहीं यूपीएमएससी लि. यानि प्रदेश भर के अस्पतालों की दवा सहित अन्य सामानों की खरीद और टेंडर निकालने वाले उत्तर-प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कारपोरेषन लि. ने गैर आवष्यक दवा यानि रिजेंट का जेम पोर्टल पर टेंडर न निकालकर पीओ सिटी के नाम आरसी यानि रेट अनुबंध जारी किया। अगर यही टेंडर अपने पोर्टल पर जारी की गई होती तो एक ही फर्म यानि पीओ सिटी को 163 रिजेंट का ठेका नहीं मिल पाता। इसी लिए कारपोरेशन के एमडी, रिजेंट का पर्चेच और भुगतान नहीं कर रहें हैं। सवाल उठ रहा है, कि यह मेहरबानी पीओ सिटी पर ही क्यों? इस लिए क्यों कि इसके मालिक एक चर्चित रिटायर आईएएस रहें। यही कारण है, कि 500 करोड़ के इस घोटाले की आरसी को निरस्त करने और हाईपावर कमेटी या फिर सीबीआई से जांच कराने की मांग उठ रही है।

बता दें कि उत्तर-प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन लि. का गठन सीएमएसडी स्टोर के व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए आज से लगभग चार-पांच साल पहले किया गया। इसी सीएमएसडी स्टोर से बस्ती प्रभारी राजा हो गए। क्यों कि सीएमएसडी स्टोर के जरिए प्रदेश के 75 सीएमओ लूटपाट कर रहे थे, लेकिन अब तो सिर्फ उत्तर-प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन लि. के एमडी अकेला सिर्फ रिजेंट की खरीद में पांच सौ करोड़ का घोटाला पीओ सिटी के साथ मिलकर कर रहे है। पहले 75 सीएमओ और दवाओं की कंपनियां मिलकर घोटाला करती थी, और अब एमडी एवं पीओ सिटी के मालिक यानि सिर्फ दो लोग मिलकर सरकार को हर साल पांच सौ करोड़ का चूना लगा रहे है। यूपीएमएससी लि. के गठन के पीछे व्याप्त भ्रष्टाचार को तो समाप्त करना ही था, साथ ही इसके जरिए उच्च गुणवत्ता के सामानों की खरीद करने का भी मकसद था। इसी लिए सरकार यूपीएमएससी लि. को कमीशन के रुप में टोटल खरीद पर दो फीसद कमीशन देती है। ताकि कार्यालय का रखरखाव हो सके और कर्मचारियों का वेतन मिल सके। कमीशन के रुप में देखा जाए तो 70 से 80 करोड़ हर साल मिलता है। अब सवाल उठ रहा है, कि जब कार्यालय का खर्चा और वेतन का खर्चा ही लगभग 20 से 25 करोड़ ही हैं, तो फिर 40-50 करोड़ कहां जाता हैं, इस लिए कमीशन को दो फीसद से घटाकर एक फीसद करने की भी मांग उठ रही हैं, ताकि सरकारी खजाने पर बोझ न पड़े। यूपीएमएससी लि. के गठन के बाद न तो उच्चगुणवत्ता वाला सामानों की ही खरीद हो रही है, और न भ्रष्टाचार ही समाप्त हो रहा है। बाजार दर से चार पांच गुना अधिक दर से खरीद अलग से की जा रही है। यूपीएमएससी लि. के गठन में जनप्रतिनिधियों का बहुत बड़ा हाथ है। अब अनैतिक लाभ लेने के मामले में इनकी भूमिका सामने आ रही है। बताया जाता है, कि पीओ सिटी को बचाने और इसके खिलाफ आवाज न उठाने के लिए पूर्वाचल के एक दमदार विधायक को हर तीसरे चौथे माह दो करोड़ मिलता है। तभी तो पीओ सिटी सरकारी अस्पतालों में क्यों संचालित हो रही है? और क्यों इनसे पांच सौ करोड़ का रिजेंट खरीदा जा रहा है? को लेकर आज तक एक भी जनप्रतिनिधि ने न तो विधानसभा और न लोकसभा में ही आवाज उठाया।