बस्ती। अगर एसआईसी के नाक के नीचे अस्पताल में घटिया सड़क का निर्माण हो रहा है, तो दसे किसकी गलती मानेगें, ठेकेदार की या फिर एसआईसी की। जब इस मामले में एसआईसी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह भी चाहते हैं, कि कम से कम जिला अस्पताल की सड़क का निर्माण गुणवत्तापरक हो। अस्पताल में हर आने जाने वाले डाक्टर, मरीज और परिजन कह रहे हैं, कि घटिया सड़क का निर्माण हो रहा हैं, यहां तक कि एसआईसी साहब डेली निरीक्षण करने भी इसी सड़क से होकर जाते है। एसआईसी ने बताया कि यह सड़क डीएम के बजट यानि क्रिटिकल गैप से हो रहा है, कौन निर्माण करवा रहा है, इसकी जानकारी नहीं दे पाए। इस सड़क पर इतना पैसा बर्बाद करने की कोई आवष्यकता नहीं थी, सड़क अच्छी हालत में थी, कहीं-कहीं हल्का-हल्का पैच हो गया था, जिसे मरम्मत करके भी काम चलाया जा सकता था, लेकिन जब पैसे की बर्बादी करनी होती है, तो ऐसा ही होता है। ऐसा लगता है, कि ठेकेदार को इस सड़क पर अधिक कमीशन देना पड़ा होगा, तभी तो ठेकेदार ने पुरानी सड़क पर जो डामर था, उसे उखाड़ कर फिर से सड़क पर डाल दिया, यानि पूरानी सड़क से मैटेरिएल निकालकर उसे नई सड़क बनाई जा रही है। कई दिनों से सड़क का निर्माण हो रहा है, जिसके चलते अनेक मरीज और तीमरदार गिरकर अब तक घायल हो चुके है। देखा जाए तो सड़क की उंचाई 20 इंच मोटी होनी चाहिए, गेजिगं में सिर्फ घटिया ईंट को बिछा दिया जा रहा है, सीमेंट तो लगाया ही नहीं जा रहा, अगर सीमेंट नहीं लगेगा तो ईंट पकड़ेगा कैसें? ईंट का छह रददा लगाना चाहिए, लेकिन दो में ही काम चला दिया जा रहा है। जिस तरह से सड़क का निर्माण हो रहा है, वह एक बरसात तो क्या बनते ही उखड़ जाने का दावा किया जा रहा है। इससे पहले जब यह सड़क बनी थी, तो कुछ ही दिन में सड़क टूटने लगा था। सड़क पर तो मानो ठेकेदार गिटटी डालना ही भूल गया। अस्पताल के अनेक लोगों का कहना है, कि जब डीएम के बजट का यह हाल हैं, तो सांसद और विधायक निधि का क्या होल होगा? आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता हैं। बहरहाल, इसी अस्पताल में सांसद निधि से भी सड़क का निर्माण होना है, देखना होगा कि सांसद निधि के सड़क का क्या हाल होगा? वैसे भी अस्पताल में सिवाय डाक्टरों के समय से आने के और कुछ भी सही नहीं हो रहा है। एसआईसी साहब तो डाक्टर्स को राइट टाइम कर दिए, लेकिन अन्य सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे डाक्टर्स और अन्य स्टाफ भी व्यवस्था से दुखी है, और कहते हैं, सिर्फ डाक्टर्स के राइट टाइम होने से कुछ नहीं होगा, जब तक अन्य समस्याओं और सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। जिला अस्पताल में पहली बार देखा जा रहा है, कि डाक्टर्स दौड़ते हुए एसआईसी के चेंबर में हाजीरी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं, वरना, डाक्टर्स का न तो आने का कोई समय रहा और न जाने का। इसे एसआईसी साहब की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, अब मरीज भी यह जानकर आ रहा है, कि डाक्टर्स साहब नौ बजे तक बैठ जाएगें, इसी लिए मरीजों की संख्या में भी अच्छा खासा इजाफा हुआ। इसके लिए एसआईसी साहब की जितनी भी सराहना की जाए कम है। लोगों का डाक्टर्स का समय से आना और मरीजों को देखना अचरज जैसा लग रहा है। एसआईसी साहब का डेली राउंड लगाने का भी प्रभाव कामकाज पर पड़ रहा है।