बस्ती। पिछले पांच सालों से यह सवाल उठ रहा है, कि जब 12 जुलाई 26 को जिले के प्रथम नागरिक की बिदाई होगी, तो वह कैसी होगी? विदाई समारोह में लोग इन्हें किस लिए याद रखने की बातें कहेगें। एक पत्रकार की हैसियत से जो हमने पांच साल तक संजय चौधरी की कार्यशैली को देखा उसे किसी भी हालत में आईडिएल कार्यकाल नहीं कहा जा सकता है। इनके कार्यकाल को अब तक का सबसे खराब कार्यकाल कहा जा सकता है। एक जिला पंचायत अध्यक्ष के रुप में इन्होंने जो अपनी छवि बनाई, उसका कोई अनुश्रवण करना नहीं चाहेगा। देखा जाए तो इनके पांच साल के कार्यकाल को धोखा देना और धोखा खाना ही कहा जा सकता है। इन्होंने धोखा भी खाया और धोखा भी दिया, धोखा ऐसे व्यक्ति को दिया, जिसने इन्हें जिले के प्रथम नागरिक के होने का सम्मान दिया। यह जानते हुए भी सम्मान दिया कि इससे पहले यह मीडिया के सामने गालियां तक दे चुके है। ऐसा भी नहीं कि इन्हें धोखा नहीं मिला और इन्हें ब्लैेकमेल नहीं किया गया। ब्लैकमेल तो इतनी बार किया गया कि इन्हें अपनी काली कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ अपनी कुर्सी को बचाने में खर्च करना पड़ा। जिन लोगों ने इन्हें ब्लैकमेल और धोखा दिया, आज वही लोग सफेद कुर्ता और सफेद पैजामा पहनकर पूर्व सांसदजी के साथ किसी लालच में आगे पीछे घूम रहे है। जो लोग आगे पीछे घूम रहे हैं, उन लोगों का इतिहास और भूगोल दोनों खराब है। कहना गलत नहीं होगा कि अगर संजय चौधरी पर जिले को लूटने का आरोप लग रहा है, तो इन लोगों पर लूटने वाले का साथ देने का आरोप लग रहा है। जिले के लोग कभी भी न लूटने और न लूटने वाले का साथ देने वालों को माफ करेगी। एक तरह से ऐसे लोगों ने अपने राजनैतिक भविष्य पर पूर्ण विराम लगा दिया। ऐसे लोग जब कभी कोई भी चुनाव लड़ेगें तो इनकी ब्लैकमेल करने वाली छवि जनता के सामने आ जाएगी। जिसका खामियाजा इन्हें भुगतना पड़ेगा। एक तरह से इन लोगों ने जिले की जनता के साथ छल किया है। सम्मान के साथ इन लोगों ने इज्जत को भी खो दिया। जिले की जनता उन जिला पंचायत सदस्यों को भी कभी नहीं भूलेगी, जिन्होंने संजय चौधरी के भ्रष्टाचार के सहयोगी रहे। सच पूछिए तो यह किसी के भी नहीं रहें, उनके भी नहीं रहें, जिन्होने इनके बुरे समय में साथ दिया, उनके भी नहीं रहे, जिन्होंने इन्हें कुर्सी पर बैठाया। धोखा देना तो कोई संजय चौधरी और गिल्लम चौधरी जैसे लोगों से और उनकी टीम से सीखे। ऐसे लोग भी है, जो कभी इन दोनों के सामने नहीं झूके। एक भी महिला सदस्यों के पतियों या फिर परिवार के सदस्यों ने घर की महिलाओं का मान-सम्मान का ख्याल नहीं रखा। एक भी महिला सदस्यों की आजादी बैठकों में देखने को नहीं मिली, इसका मतलब यह हुआ कि जब घर वाले ही महिला को सम्मान नहीं देगें, तो बाहर वाले कहां से देगें, पतियों ने एक तरह से महिला षसक्तीकरण को मजाक बनाकर रख दिया। बिके पति और बदनाम हुई पत्नियां। संजय चौधरी और गिल्लम चौधरी आने वाले अध्यक्ष को विरासत में ऐसा भ्रष्ट जिला पंचायत देगें, जिसने भ्रष्टाचार में रिकार्ड बनाया। भले ही चाहे संजय चौधरी पर लूटपाट करने का आरोप लग रहा है, लेकिन अगर यह जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बनते तो लोग यह कभी नहीं जान पाते कि यह राजनीति के कितने मझें हुए खिलाड़ी है। इन पांच सालों में इन्होंने ऐसे सूरमा नेताओं को पटकनी दी, कि सूरमा भी चकरा गए। इन्होंने कभी भी हरीश द्विवेदी को अपना नेता नहीं माना, लेकिन जब जरुरत पड़ी तो मां-बाप से बढ़कर कहा। जिसे मां-बाप से बढ़कर कहा, उसी को सबसे पहले उनकी हैसियत को बताया। वैसे इन्होंने गिल्लम चौधरी जैसे लोगों को भी यह बताया कि हम भी किसी से कम नहीं है। इन्होंने पैसा कमाने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा। अब इनका कार्यकाल 11 जुलाई के 12 बजे रात को समाप्त हो रहा है, इसके साथ ही इनके वीआईपी का ओहदा भी समाप्त हो जाएगा, फिर यह किसी में मंत्री के बगल वाली कुर्सी पर नहीं बैठ पाएगें। 12 जुलाई के बाद से ही इनके प्रति लोगों का नजरिया बदल जाएगा। सरकारी आवास और महंगी गाड़ी भी इन्हें 12 जुलाई से नियमानुसार छोड़नी होगी। जो रुतबा और शानोशोकत हैं, वह 11 जुलाई की रात 12 बजे के बाद से समाप्त हो जाएगी।
- Loading weather...
- |
- Last Update 02 Jul, 12:15 AM
- |
- |
- खबरें हटके
- |
- ताज़ा खबर
- |
- क्राइम
- |
- वायरल विडिओ
- |
- वीडियो
- |
- + More
0 Comment