बस्ती। सीएमओ और उनके लुटेरे गैंग के लोग जिस शिकायतकर्त्ता उमेश गोस्वामी को पागल करार कर आगरा भेजने की तैयारी कर रहे हैं, वह न तो पागल हैं, और न बिकने वाला प्राणी ही है। सीएमओ साहब आप और आपकी भ्रष्ट टीम जैसे न जाने कितनों ने उमेष गोस्वामी को खरीदने का प्रयास किया, लेकिन नहीं बिका, खरीदने वाला कोई भी कीमत देने को तैयार, फिर भी नहीं बिका। जिले में बहुत कम ऐसे शिकायतकर्त्ता होगें, जो उमेश गोस्वामी जैसा होगें। अगर, यह व्यक्ति बिकाऊ होता तो यह आपके पीछे रुधौली तहसील दिवस नहीं पहुंच जाता है। यह व्यक्ति दावा करता है, कि कोई भी उसे खरीद नहीं सकता, हालांकि इसकी माली हालत इतनी अच्छी नहीं हैं, कि यह किसी के खिलाफ कम्प्यूटर से टाइप करवाकर शिकायत कर सके। 40 किलो वजन वाले इस पतले दुबले व्यक्ति को देखकर किसी को भी नहीं लगता कि यह कितना लड़कू प्रवृत्ति का होगा। इस व्यक्ति से अगर कोई चाहे तो फर्जी शिकायत नहीं करवा सकता, अगर ऐसा होता तो डीएम और एडीएम इसकी शिकायतों को इतनी गंभीरता से नहीं लेते। यह अलग बात हैं, कि इस भ्रष्ट व्यवस्था में प्रशासन चाहकर भी सीएमओ और उनके गैंग के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है। सीएमओ भले ही इसकी शिकायत को देख हताषा में फर्जी कहें, लेकिन डीएम, सीडीओ और एडीएम जानते हैं, कि दसकी शिकायत में कितनी सच्चाई और कितना दम होता र्है। जो लोग यह समझते हैं, कि इसका आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, वे लोग गलत समझते है। इस व्यक्ति के मीडिया जितना जानती है, उतना कोई नहीं, और कहा भी जाता है, कि अगर उमेश गोस्वामी जैसा न बिकने वाला शिकायतकर्त्ता दो-चार जिले में और हांे जाएं, तो कईयों को पागल कर दें। सच तो यह है, कि इस व्यक्ति ने लिखा-पढ़ी करके सीएमओ और उनकी टीम की नीदें हराम कर रखी है। खराबी और कमी उमेश गोस्वामी और उसकी शिकायत में नहीं हैं, बल्कि सीएमओ और उनकी लूटमार टीम में है। यह अधिकारियों को खुले आम चुनौती देता है, कि अगर मेरा शपथ-पत्र गलत या शिकायत गलत पाई जाए तो मुझे जेल भेज दिया जाए, मुझे को दिक्कत नहीं होगी, लेकिन मैं जेल में भी रहकर शिकायत करुंगा। सीएमओ और उनकी टीम के सामने सबसे बड़ी दिक्कत उमेश गोस्वामी की शिकायत पर जांच और कार्रवाई के नाम पर दोहन करना रहा। अगर, इसकी शिकायत पर ईमानदारी से ननद-भौजाई के भ्रष्टाचार की जांच सीएमओ कर देते हैं, या फिर करवा देते तो यह शिकायत पर शिकायत नहीं करता और यह न लिखकर देता कि सीएमओ और उनकी टीम ने उसके शपथ-पत्र को ही बेच डाला। डा. बृजेश शुक्ल की नियुक्ति के बारे में पूरा जिला जानता है, कि सीएमओ ने गलत किया, फिर भी सीएमओ गलती को सुधारने को तैयार नहीं, अलबत्ता एनएचएम के लूट में हिस्सेदार बने हुए है। भले ही सीएमओ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, लेकिन चिठठी-पत्री बंद नहीं है। अब तो सीएमओ और डा. बृजेश शुक्ल की शिकायत सीएम के दरबार में भी पहुंचने लगी है। एडी हेल्थ को जांच भी आई, जांच शुरु भी हो गई, शिकायतकर्त्ता से साक्ष्य मंागे गए, साक्ष्य भी उपलब्ध करा दिया गया। सवाल उठ रहा है, कि एडी हेल्थ क्या निष्पक्ष जांच कर पाएगें? या यह भी मोटा लिफाफा लेकर जांच को डस्टबिन में डाल देगें, क्यों कि अगर निष्पक्ष जांच हो गई तो आरसीएच एवं सीएमएसडी के प्रभारी डा. बृजेश शुक्ल को हटना होगा। एडी हेल्थ हों, चाहें सीएमओ हों या फिर चाहें डा. एके चौधरी और डा. एसबी सिंह हों, सभी एक ही नांव पर सवार हैं, बस नांव पलटने की देर है, एक साथ सभी डूब जाएगें।