बस्ती। वाल्टरगंज चीनी मिल, बस्ती के मौसमी कर्मचारियों का वर्ष 2018 से वेतन बकाया है। बिना किसी आज्ञा, आदेश या पूर्व सूचना के मिल प्रबंधन ने कारखाना बंद कर दिया। जिला प्रशासन और शासन सब कुछ जानते हुए भी चीनी मिल के उद्योगपतियों-पूंजीपतियों पर कार्रवाई करने के बजाय कर्मचारियों पर ही दबाव बना रहा है।
’मुख्य तथ्य’
1. ’बकाया वेतन’ 2018 से सैकड़ों मौसमी कर्मचारियों का वेतन, बोनस और अन्य देयक बकाया है। 08 साल से कर्मचारी दर-दर भटक रहे हैं।
2. ’अवैध बंदी’ मिल को बिना श्रम विभाग की अनुमति और बिना देयकों का निस्तारण किए बंद कर दिया गया। यह फैक्ट्रीज एक्ट और पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट का सीधा उल्लंघन है।
3. ’प्रशासन की निष्क्रियता’ मिल मालिकों पर कार्रवाई के बजाय प्रशासन धरनारत कर्मचारियों को ही उठाने का दबाव बनाता है।
4. ’लगातार ज्ञापन’ कमिश्नर बस्ती मंडल, जिलाधिकारी बस्ती, शासन और मंत्रालय को लगातार सूचनाएं और ज्ञापन दिए जा रहे हैं। दिनांक 15-04-2026 को भी कमिश्नर बस्ती मंडल से मिलकर ज्ञापन दिया गया, जिसकी प्रतिलिपि सभी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई।
’धरना की स्थिति’
07 अगस्त 2025 से वाल्टरगंज चीनी मिल गेट पर अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। जब तक बकाया देयकों का भुगतान और बीआरएस कराकर चीनी मिल चलाने का आदेश नहीं आता, धरना जारी रहेगा। अभी धरना पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। परंतु प्रशासन और सरकार की लगातार अनदेखी के कारण कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे रहा है। समय रहते मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन प्रचंड रूप ले सकता है, जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन, शासन और मिल प्रबंधन की होगी।
’हमारी मांगें’
1. 2018 से बकाया समस्त वेतन, बोनस, ग्रेच्युटी का ब्याज सहित तत्काल भुगतान किया जाए।
2. वाल्टरगंज चीनी मिल का बीआरएस कराकर आगामी पेराई सत्र से मिल संचालन का आदेश जारी हो।
3. बिना देयक भुगतान मिल बंद करने वाले मालिकों-प्रबंधन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
4. दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।
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