बस्ती। सुनकर और जानकर हैरानी होगी कि योगीजी जिस चकबंदी विभाग के मंत्री है उस विभाग के एसीओ और चकबंदी लेखपाल ने एक ऐसे युवा डाक्टर को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया, जिसकी शादी नवंबर 26 में होने वाली थी, सुसाइड नोट मे लिखा कि है, वह चकबंदी के एसीओ और लेखपाल के शोषण के चलते आत्महत्या कर रहा हूं। लिखा कि बार-बार पैसा मांगा जा रहा था, पैसा देने के बाद सही काम को सही नहीं किया, कहा कि वह अपनी जमीन के टुकड़े को बचाने के लिए एसीओ और लेखपाल के हाथ सबकुछ गवां दिया, जितना पैसा था, वह सब एसीओ और लेखपाल को दे दिया, उधार लेकर दिया, फिर भी वह जमीन को नहीं बचा पाया, इसी दुख के साथ मैं आत्महत्या कर रहा हूं, मेरी मौत के लिए एसीओ और लेखपाल को जिम्मेदार माना जाए। मृतक का नाम गणेशचंद्र श्रीवास्तव और वह छावनी थाना क्षेत्र के कुंआ गांव का रहने वाला।

पीड़ित परिवार का भाई दिनेशचंद्र श्रीवास्तव ने दुखी मन से कहा कि हम लोगों ने योगीजी को दूसरी बार इस लिए नहीं सीएम बनाया, कि उनके राज और उनके खुद के विभाग में घूसघोरी से तंग आकर काष्तकार आत्महत्या करें, कहते हैं, कि ऐसे सीएम को त्वरित इस्तीफा दे देना चाहिए। कहते हैं, कि अगर राजस्व विभाग किसी और मंत्री के पास होता तो उतनी तकलीफ नहीं होती, जितना अब हो रहा है। उतना सवाल नहीं उठता जितना अब उठ रहा है, सवाल उठना लाजिमी भी हैं, क्यों कि मामला किसी के आत्महत्या से जुड़ा है। कोई अगर गरीबी से तंग आकर या फिर पारिवारिक कलह के चलते आत्महत्या करता तो लोगों के समझ में आता है, लेकिन जब कोई युवा डाक्टर इस लिए आत्महत्या करता है, कि वह एसीओ और लेखपाल को इच्छित घूस नहीं दे पाया, तो यह पूरे समाज को झकझोर देने वाला है। एक ऐसे व्यक्ति की बलि घूसघोरों ने ले ली, जिसकी शादी होने वाली थी, घूसखोरों ने एक नहीं बल्कि दो परिवार को मातम मनाने के लिए मजबूर कर दिया। पीड़ित भाई की माने तो ऐसे घूसघोरों को सरेआम उसी तरह फांसी पर लटका देना चाहिए, जिस तरह उसका भाई लटका। कहते हैं, कि यह उस भाजपा का सच है, जो यह कहती है, कि उनके मंत्रियों से न तो इस्तीफा लिया जाता और न भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई ही की जाती है। आज भाजपा के इसी फारमूले ने यूपी में न जाने कितने को आत्महत्या करना पड़ रहा है। हाल ही में देवरिया में बीएसए और बाबू के शोषण से तंग आकर एक शिक्षक ने आत्महत्या कर लिया था। दोनों आत्महत्याओं के मामले में भ्रष्टाचार शामिल है। योगीजी की यह कैसी व्यवस्था हैं, जिसमें सरकारी व्यवस्था से दुखी होकर आम जनता को आत्महत्या करनी पड़ रही हैं, सवाल उठ रहा है, कि क्यों बार-बार एक आम आदमी को ही सूसाइड करना पड़ रहा है, क्यों नहीं घूसघोर और भ्रष्टाचारी सूसाइड करते? यह वही विभाग हैं, जहां के एसीओ, सीओ, एसओसी और डीडीसी न्यायालय में इच्छित फैसला पाने के लिए दो पक्षों में बोली लगाई जाती है, जिस पक्ष ने अधिकारी बोली लगाई, उसके पक्ष में निर्णय हो गया, भले ही चाहे वह गलत ही क्यों न हों? यह वही विभाग हैं, जहां पर जिंदा को मुर्दा और मुर्दा को जिंदा बनाकर कमाई की जाती है। अधिकारी अच्छी तरह जानते हैं, कि कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन को बचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता हैं, इसी का फायदा यह लोग उठाते है। इनके भ्रष्टाचार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं, एक बार सभी एसीओ, सीओ और एसओसी ने धरना दिया, धरना कई दिन तक चला, तत्कालीन डीएम सौरभ बाबू से जब मीडिया ने यह पूछा कि सर धरना क्यों नहीं समाप्त करवाते, पर कहने लगें कि यह जोग जितने दिन तक धरने पर रहेगें, उस दिन तक कम से कम भ्रष्टाचार तो नहीं होगा। यह है, एक डीएम की उस विभाग के अधिकारियों की सोच। इस विभाग के अधिकारियों के चलते न जाने अब तक कितने गरीब काष्तकार आत्महत्या कर चुके हैं, और न जाने कितने काष्तकार न्याय की आस लिए भगवान के पास जा चुके है। काष्तकार जवान उसे बूढ़ा हो जाता है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिलता, पोता और बेटा तक मुकदमा लड़ते-लड़ते परेशान हो जाते, लेकिन उन्हें भी न्याय नहीं मिलता, मिलता है, तो तारीख। आप किसी भी चंकबंदी न्यायालय में चले जाइए, किसी काष्तकार के चेहरे पर आप कां हंसी नहीं मिलेगी, कोई मोटा चष्मा लगाकर लाडी के सहारे आते हुए मिलेगा तो कोई अपने पोते के सहारे दिखेगा। न जाने कितने काष्तकारों की चप्पलें घिस जाती हैं, और न जाने कितने काष्तकारों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं, लेकिन फिर भी उसे तारीख पर आना ही पड़ता है। इस विभाग के सभी लोगों का जमीर पैसे के आगे मर चुका है। तभी तो मृतक के भाई ने कहा भी कि ऐसे लोगों को ठीक उसी तरह फंासी पर लटका देना चाहिए, जिस तरह उसका भाई लटका।