बनकटी/बस्ती। पूरे बनकटी क्षेत्र में सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर कब्जा करने का मानो कंपटीशन हो रहा है। हर कोई इस मामले में एक दूसरे से आगे निकलना चाह रहा है। सरकारी अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ते के लिए जमीन सुरक्षित हो, गांव के लोगों के आवागमन के लिए सड़क मौजूद हो और उसी जमीन पर कुछ लोग धीरे-धीरे कब्जा जमाकर अपना निर्माण खड़ा करने लगें, तो यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और ग्रामीणों के अधिकारों को खुली चुनौती है। विडंबना यह है कि जिस रास्ते का उपयोग पूरे गांव के लोगों को करना है, उसी पर कथित कब्जेदारों ने शौचालय के टैंक बनाकर अपनी दावेदारी शुरू कर दी है। अब बची हुई जमीन पर भी पक्का निर्माण कराने की तैयारी की जा रही है। विरोध करने पर विवाद और मारपीट की नौबत आ जाती है। पीआरवी 112 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी जब कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो मामला राजस्व परिषद तक पहुंच गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सार्वजनिक रास्ते की जमीन पर कब्जे की शिकायत के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? क्या प्रशासन किसी बड़े विवाद या रास्ता पूरी तरह बंद होने का इंतजार कर रहा है?
मामला नगर पंचायत बनकटी के ग्राम शंकरपुर का है। बनकटी से महथा और बानपुर जाने वाली सड़क की खाली पड़ी भूमि वर्ष 1995 की चकबंदी में सार्वजनिक रास्ते के लिए सुरक्षित की गई थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ग्राम शंकरपुर की दलित बस्ती में गाटा संख्या 69 के पश्चिमी किनारे तथा गाटा संख्या 24 के पूर्वी किनारे से यह भूमि लगी हुई है। हालांकि सड़क के लिए सुरक्षित भूमि का गाटा संख्या स्पष्ट नहीं है। यह रास्ता रामकेश और रामसकल के घरों के सामने से होते हुए पूरब दिशा में पिच सड़क से जुड़ता है।
आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने सार्वजनिक सड़क की सुरक्षित भूमि पर अवैध रूप से शौचालय के टैंक व राजकमल के द्वारा सीढ़ी बनवा लिए गए हैं। अब शेष खाली जमीन पर भी पक्का निर्माण कराने की तैयारी की जा रही है। विरोध करने पर संबंधित लोग एकजुट होकर फौजदारी पर आमादा हो जाते हैं। इससे ग्रामीणों में विवाद बढ़ने और सार्वजनिक रास्ता पूरी तरह बाधित होने की आशंका बनी हुई है।
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में पीआरवी 112 पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। इसका इवेंट आईडी 16092609586 तथा बीएसआई नंबर 6238 है। इसके बावजूद अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। कार्रवाई के अभाव में कथित अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं और निर्माण की आशंका लगातार बनी हुई है। इस मामले में पवन कुमार अग्रहरि, सत्येंद्र कुमार अग्रहरि और प्रहलाद चौधरी ने राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश शासन के अध्यक्ष एवं सचिव को प्रार्थना पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने वर्ष 1995 के चकबंदी अभिलेखों के आधार पर सार्वजनिक सड़क की भूमि की पहचान कराने, राजस्व टीम से मौके पर पैमाइश कराने तथा अवैध निर्माण को तत्काल रुकवाने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चला रही है, लेकिन शंकरपुर में सार्वजनिक रास्ते की जमीन पर कब्जे की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने मांग की है कि अवैध रूप से बनाए गए शौचालय टैंकों सहित अन्य अतिक्रमण को नियमानुसार हटवाकर सार्वजनिक रास्ते को कब्जामुक्त कराया जाए, ताकि ग्रामीणों का आवागमन बाधित न हो।
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