बस्ती। वर्ष 2006 से तैनात रहने वाले डॉ अशोक कुमार चौधरी उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी नोडल पीसीपीएनडीटी के लूटखसोट से लोग इतना तगं आ चुके हैं, कि अब तो यह कहने लगें हैं, कि चौधरी साहब बहुत लूट लिया, अब तो जिला छोड़ दीजिए, अभी जिला छोड़ दीजिए, कुछ दिन बाद भले ही चले आइएगा, लेकिन जाइए। बात भाकियू भानु गुट के मंडल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह ने अपर मुख्य सचिव से पत्र लिखकर कही। कहा गया कि इनका

बस्ती से स्थानांतरण और इनके संपत्ति की जांच कराने की मांग की है। कहा गया कि भ्रमण के दौरान तमाम जनमानस द्वारा डॉ एके चौधरी उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती के बारे में मानव संपदा सहित अवगत कराया गया है कि डॉ अशोक कुमार चौधरी वर्ष 2006 से ही बस्ती जनपद में तैनात है। जिनका घर बस्ती जनपद की सीमा तिलौली सिद्धार्थनगर जनपद में है डॉ अशोक कुमार चौधरी बस्ती के रुधौली में अपना घर बनवा कर निवास करते हैं। रुधौली तहसील मुख्यालय से लगभग 12-15 किमी पर ही इनका पैतृक घर है, जो सिद्धार्थनगर जनपद में है तिलौली सिद्धार्थनगर में व रुधौली में डाक्टर अशोक कुमार चौधरी का बिना पंजीकरण अस्पताल भी चलता है। डॉ अशोक कुमार चौधरी अपने कदाचार व भ्रष्टाचार को लेकर हर दिन स्थानीय समाचार पत्रों के सुर्खियों में रहते हैं। डॉ अशोक कुमार चौधरी के पास वर्तमान में पीसीपीएनडीटी व झोलाछाप डॉक्टर के नोडल अधिकारी हैं जब से डाक्टर एके चौधरी साहब नोडल हुए हैं तब से पूरे जिले में झोलाछाप डॉक्टरों व अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों की बाढ़ आ गई है जनमानस ने यह भी अवगत कराया कि पूरे जिले में जितने अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित होते हैं उन सभी सेंटरों से प्रतिमाह 5000 हजार व जिले में लगभग 10 हजार से ऊपर झोलाछाप डॉक्टर है प्रति झोलाछाप डॉक्टर 10000हजार की अवैध वसूली डाक्टर साहब नोडल अधिकारी को जाता है गोपनीय जांच कराने से डाक्टर अशोक कुमार चौधरी के कदाचार भ्रष्टाचार की कलाई परत दर परत खुल जाएगी इस अवैध वसूली में आधा हिस्सा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जाता है सीएमओ कार्यालय बस्ती व इसके अधिकारी बाबू भ्रष्टाचार में नित नया कृतिमान बना रहे हैं तत्कालीन सीएमओ डॉ आर एस दूबे के वृहद भ्रष्टाचार का मामला हर जन मानस की जुबान पर है सीएमओ कार्यालय बस्ती भ्रष्टाचार का उद्गम स्थल बन गया है भ्रष्टाचार की गंगोत्री सीएमओ कार्यालय से ही निकलता है सरकार शासन भ्रष्टाचार पर आंख बंद कर भ्रष्टाचारियों के मनोबल को बल दे रहे हैं जीरो टॉलरेंस नीति ही भ्रष्टाचार नीति बन गया है डॉ अशोक कुमार चौधरी पर जो वर्ष 2006 से तैनात है उनपर स्थानांतरण नीति शासनादेश लागू न होना भी संदेहास्पद है और इससे शासन की मंशा भी पता चलता है ‌ऐसी दशा में डाक्टर अशोक कुमार चौधरी उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी व झोलाछाप डॉक्टर का स्थानांतरण किया जाना व इनके कदाचार भ्रष्टाचार का उच्च स्तरीय गोपनीय जांच कराया जाना आवश्यक न्यायोचित है तभी जीरो टॉलरेंस नीति सार्थक है।