बस्ती। सुनकर आप लोगों को अजीब लग रहा होगा, कि संयुक्त शिक्षा निदेशक यानि जेडीई कार्यालय को साहब नहीं बल्कि आलोक दूबे चला रहे है। कोई भी सही या गलत निर्णय लेने से पहले साहब दूबेजी से अवष्य राय लेते है। दूबेजी साहब के इतने चहेते और कमाउपूत हैं, कि इनके लिए यह सारे नियम कानून को भी तोड़ने को तैयार रहते है। साहब को इस बात की चिंता नहीं रहती है, कि अगर उन्होंने दूबेजी के कहने पर गलत किया तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। कार्यालय के लोग कहते हैं, न जाने क्यों साहब दूबेजी पर आंख बंदकर भरोसा करते है। तभी तो साहब ने इन्हें सबसे अधिक मलाईदार पटल यानि लनपद भानपुर के तहसील हर्रैया, भानपुर के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विधालयों के अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण सबंधी कार्य के आलावा अशासकीय सहायता प्राप्त/वित्त पोशित संस्ृित माध्यमिक विधालयों, महाविधालयों की परीक्षा से संबधित कार्य, राजकीय कर्मचारियों के एसीपी संबधी प्रकरण का निस्तारण, आकस्मिक अवकाश पंजिका एवं आवागमन पंजिका का रखरखाव एवं संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य शमिल है। ध्यान देने वाली बात यह है, कि तत्कालीन जेडीई डा. ओम प्रकाश मिश्र ने इनके अनियमित कार्यकलापों को देखते हुए इनका पटल बदलकर विनय कुमार उपाध्याय प्रशासनिक अधिकारी को दे दिया, लेकिन जैसे ही जेडीई आनंदधर पांडेय आए इन्होंने भ्रष्ट लिपिक आलोक कुमार दूबे को मलाईदार पटल वापस दे दिया। जब से दूबेजी को पुनःमलाईदार पटल मिला तब से साहब और दूबेजी दोनों मिलकर लूट रहे है। कार्यालय के लोगों का कहना है, कि साहब का दूबेजी का प्रेम किसी दिन साहब को लू डूबेगा, तब साहब को पता चलेगा कि जिससे वह इतना प्रेम करते थे, उसके चलते वह फंस गए। वर्तमान में दूबेजी ने आउटसोर्सिगं के मामले में जेडीई को फंसा दिया। कमिष्नर की जांच टीम ने जिस तरह इस मामले में जेडीई और दूबेजी को दोषी माना उससे पता चलता है, कि साहब और दूबेजी मिलकर इससे पहले न जाने कितना गुल खिला चुके है। अब सवाल उठ रहा है, कि कमिष्नर साहब ने उस जेडीई को दूबेजी के खिलाफ कार्रवाई करने को लिख दिया, जिसके सह पर दूबेजी ने इतना बड़ा खेल खेलने का प्रयास किया। जिस तरह आउटसोर्सिगं वाली फर्म महिश इन्फोटेक व्रा. लि. लखनऊ को नियम विरुद्व ठेका देना का साहब और दूबेजी ने मिलकर प्रयास किया, उससे दोनों के भ्रष्टाचार का पता चला चलता है। इससे पहले भी दूबेजी पर अनेक गंभीर आरोप लग चुके है। यह अपना मूल काम नहीं करते बाकी सब करते है। देखना यह है, कि क्या साहब अपने कमाउपूत के खिलाफ कार्रवाई कर पाएगें? वैसे देखा जाए तो कार्रवाई जेडीई के खिलाफ भी होना चाहिए, क्यों कि जो अनियमित ठेका देने का प्रयास किया गया, उसमें साहब की भी रजामंदी हैं, और साहब के रजामंदी के बिना दूबेजी की इतनी हिम्मत नहीं कि वह इतना बड़ा खेल खेल सके।
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