पत्रकार फूलचंद्र चौधरी की शिकायत पर लोकायुक्त ने दिए जांच के आदेश

बस्ती। पहली बार कोई ब्लॉक प्रमुख और बीडीओ लोकायुक्त की जाल में फंसा। पत्रकार फूलचंद्र चौधरी की शिकायत पर लोकायुक्त ने क्षेत्र पंचायत निधि से कराए गए गया में घोटाले के जांच के आदेश दिए है। यह जांच का आदेष लगभग 262 पन्ने के बिल बाउचर के आधार पर दिया गया, यह जांच पिछले पांच माह से लंबित रहा, लोकायुक्त की ओर से कॉफी छानबीन के बाद डीएम को तीन सदस्यीय जांच जिसमें एक प्रषासनिक, एक पुलिस और एक अभियोजन अधिकारी की टीम से जांच कराने को लिखा है। जिस तरह साक्ष्य के आधार पर जांच के आदेश दिए गए, उससे सदर ब्लॉक प्रमुख राकेष कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ शिवमणि की मुस्किले बढ़ सकती है। अभी तक जितने भी जांच लोकायुक्त की ओर से कराए गए, उनमें मनरेगा और ग्राम निधि के ही रहे, लेकिन यह पहली बार हैं, जब क्षेत्र पंचायत निधि से कराए गए कार्यो की जांच के आदेश दिए गए है। चूंकि क्षेत्र पंचायत निधि के राज्य वित्त एवं 15वां वित्त आयोग से मिले धन के दुरुपयोग के लिए क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और बीडीओ को जिम्मेदार माना जाता है, इस लिए प्रमुख का नाम सामने आ रहा है, वैसे भले ही चाहें प्रमुख को मनरेगा को लूटने का आरोप लगता रहा है, लेकिन आधिकारिक रुप से इनकी जिम्मेदारी सिर्फ क्षेत्र पंचायत निधि के धन की होती है। क्यों कि भुगतान पर इनका और बीडीओ का हस्ताक्षर होता है। जांच अगर प्रमुखी के रहते होती है, तो उतना प्रभाव नहीं पड़ता, जितना प्रमुख के पद पर न रहने से। देखना होगा कि प्रषासक के रुप में निर्वतमान प्रमुख सदर क्या लोकायुक्त की जाल से निकल पाएगें। वैसे जब तक इनके आका है, तब तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई होना संभव नहीं है। वैसे तो जिलेभर के क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों ने क्षेत्र पंचायत निधि का जमकर दुरुपयोग किया, लेकिन जांच के घेरें में सिर्फ राकेष श्रीवास्तव ही आए। लोकायुक्त से की गई शिकायत में कहा गया कि प्रमुख और बीडीओ ने मिलकर काफी भ्रष्टाचार किया, इन दोनों ने मिलकर अपने पद का दुरुपयोग किया, क्षेत्र पंचायत सदर में लगाए गए वाटर कूलर, विकास खंड कार्यालय एवं सभागार के मरम्मत साज सज्जा, डेकोरेशन, सहकारी समिति भवनों के मरम्मत, प्रमुख के द्वारा संचालित कार्य पर खर्च किए गए धनराशि, निर्माण कार्य जैसे आरसीसी, सीसी सड़क, पुलिया, इंटरलाकिगं, खंडजा, हृृयूम पाइप निर्माण कार्यो की स्वीकृति एवं भुगतान, नगर पालिका के द्वारा कराए गए कार्यो को अपना बता कर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया, इसके साक्ष्य में 262 बिल बाउचर प्रस्तुत किया गया। उक बात तो तय हैं, कि अगर यह मामला मैनेज नहीं हुआ तो प्रमुख और बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई तय है, इसकी चपेट में कई बीडीओ भी आ सकते है। क्यों कि आरटीआई के तहत जो जानकारी दी गई, उसके अनुसार भ्रष्टाचार का मामला तो बनता ही है, जांच में लीपापोती इस लिए नहीं हो पाएगी, क्यों कि अगर जांच टीम ने किसी तरह क्लीन चिट दे भी दिया तो पुनः जांच के आदेश दिए जा सकते हैं, तब यह जांच लोकायुक्त की निगरानी में होगा। चूंकि पहली बार क्षेत्र पंचायत निधि के दुरुपयोग की शिकायत पर जसंच हो रही है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। शिकायतकर्त्ता अगर अपनी शिकायत पर अडिग रहता है, तो जांच और कार्रवाई होने से कोई रोक नहीं पाएगा।