सिस्टम की अनदेखी या मिलीभगत से सरकारी जमीन पर दबंगों ने किए अवैध कब्जे
सरकारी विकास कार्यों में बाधा,दबंगों ने उड़ाया मजाक
ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर: मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपने पहले काल खंड 2017 में सिस्टम से आदेशों का पालन धरातल पर बखूबी कराया। सबका साथ,सबका विकास को लेकर गलत कार्यों पर अंकुश लगा। दबंग भूमाफियों में खौफ पैदा हुआ जनमानस में विश्वास की लहर तेजी के साथ फैली,कुछ समय के बाद ही सिस्टम ने अनदेखी की या दबंग और भूमाफियों से मिली भगत कर ली। नतीजा दबंगों ने सरकारी जमीन पर कब्जे शुरू कर दिए। सिस्टम की अनदेखी से भारतीय सेना की सरकारी जमीन पर दबंगों ने प्लाटिंग कर भवन बनाने शुरू कर दिए। भारतीय सेना की सरकारी जमीन न बेची जा सकती थी और न ही खरीद की जा सकती थी मगर ऐसा हो न सका। भारतीय सेना की सरकारी जमीन होने की वजह से रुकावट के साथ धीरे धीरे स्वरूप बदल दिया। सिस्टम की नाक के नीचे सरकारी जमीन दबंगों के कब्जे में है।
वन पर कब्जा पेड़ो का किया कटान
रामसर साइट में सरकार की योजना में विकास कार्य नहीं हो पा रहा है। महाभारत कालीन गढ़ गंगा मेला रोड का विस्तार नहीं हो पाया। मस्त राम की कुटी पर वन के पेड़ो को काटकर जमीन पर अवैध कब्जे कर छोटा कर दिया। वन के सैकड़ों पेड़ काटकर जमीन पर अवैध कब्जे कर फैसले लहरा रही है। वन विभाग के अधिकारियों को अपनी जमीन के रकबे का भी मालूम नहीं है। वन की जमीन की रक्षा सुरक्षा करने में नाकाम हैं। जिम्मेदार सिस्टम सरकारी जमीन को बचाने में नाकाम है। नागरिकों का आरोप है कि विभागों के कर्मचारियों की मिलीभगत तथा अधिकारियों की अनदेखी के चलते सरकारी जमीन पर दबंगों बल्ले बल्ले कर रहे है। मुख्यमंत्री का बुलडोजर जातिगत चला रहे है। मुख्य मंत्री के कई बार गढ़ गंगा मेला के घाट और पुल बनाए जाने की घोषणा पर सरकारी तंत्र ही बाधा बना हुआ है।
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