बस्ती। ऐसा लगता है, कि मानो खरे परिवार को मान, सम्मान और इज्जत की कोई चिंता नहीं, अगर होती तो इस परिवार के लोगों पर ठगी के आरोप में इतने मुकदमें दर्ज नहीं होते। सवाल उठ रहा है, कि आखिर यह परिवार समाज में कौन सा संदेश देना चाहता है? इस परिवार ने नाम से अधिक बदनामी कमाया। लोग यह सोचकर हैरान हो रहे हैं, कि आखिर यह परिवार कभी बदनामी से छुटकारा पा पाएगा, कि नहीं? दामन पर लगे दाग को कभी मिटा पाएगा कि नहीं? ऐसा लगता है, कि इस परिवार का उद्वेष्य ऐनकेन प्रकरण लोगों को बेवकूफ बनाकर उन्हें ठगना ही रह गया। जितने में मुकदमें इस परिवार के खिलाफ दर्ज हुए या जो भी मुकदमें न्यायालय में लंबित हैं, वे सभी ठगी के हैं। यह भी सवाल उठ रहा है, कि क्या कोई संभा्रत परिवार इतनी बदनामी के बाद भी समाज में सिर उठाकर चल पाएगा? जबाव न में ही मिलेगा। शायद ही कोई ऐसा होगा, जो इस परिवार के प्रति हमदर्दी रखता होगा। इस परिवार के लिए बदनामी का दाग धुलना आसान नहीं होगा। इतनी बदनामी के बाद भी अगर परिवार के किसी सदस्य को अपने किए पर अफसोस न हो तो भगवान भी ऐसे परिवार की मदद नहीं करतें। अब तो लोग यह भी कहने लगे हैं, कि क्या खरे परिवार की जिंदगी मुकदमेंबाजी में ही बीत जाएगी? अगर किसी परिवार पर इतने सारे आरोप लगते हैं, तो अमूमन वह परिवार टूट जाता है। लेकिन खरे परिवार टूटा नहीं। कहा भी जाता है, कि जिस परिवार को समाज इज्जत की निगाह से नहीं देखता, उस परिवार का सबकुछ चला जाता है, मान और सम्मान के साथ उसका रुतबा और कारोबार भी प्रभावित होता है। राजनैतिक कैरियर अलग से बर्बाद हो जाता है। दुनिया का कोई भी व्यक्ति अधिक दिन तक किसी को बेवकूफ नहीं बना सकता, कहा भी जाता है, कि बड़ी मुस्किल और मेहनत से कोई कारोबार खड़ा होता है, और इज्जत भी बड़ी मुस्किल से कमाया जाता है, इसे यूंही बर्बाद नहीं होने देना चाहिए। देखा जाए तो इस परिवार ने सबसे अधिक अपने लोगों के साथ विष्वासघात किया, जिन अपनों ने इस परिवार की मदद की, उसी को दुष्मन बनाया। मामा-भांजी जैसे पवित्र रिष्ते का ख्याल नहीं रखा, दोस्ती को बदनाम किया। मित्रों के साथ दगा किया। हालत यह हो गई हैं, कि इनकी पार्टी और इनके अपने कहे जाने वालों लोग इस परिवार से किनारा कसने लगें है।
जिस तरह आवास विकास कालोनी की रहने वाली दिपांषी श्रीवास्तव ने दिव्यांषु खरे, अनूप खरे और अनुभव श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया उसे पढ़कर कोई भी व्यक्ति व्यधित हो जाएगा, और सोचने पर मजबूर हो जाएगा, कि क्या कोई पैसे के लिए इस हद तक भी जा सकता है। इन तीनों ने मिलकर बिन बाप की लड़की के साथ जो किया, उसने सारी हदें पार कर दी। यहां पर खरे परिवार ने पैसे के लिए रिष्तों का खून किया, उस विष्वास का खून किया, जो पीड़ित परिवार ने किया था। पैसे के लिए महिला के लिए अष्लील शब्दों का प्रयोग करना और जान से मारने की धमकी देना कोई संभ्रांत परिवार के लोग नहीं कर सकते। पीड़िता की बहनों से एलआईसी और एफडीआर तक का तीन लाख ले लिया। पीड़िता के नाम से पर्सनल लोन तक ले लिया, लड़कियों की शादी में मां ने जो जेवर देने के लिए रखा था, उस पर गोल्ड लोन ले लिया। पीड़िता का आरोप हैं, कि गैंग बनाकर उसे और उनकी बहनों को लूटा गया। कहा कि स्व. पिताजी के मित्र और कुशीनगर निवासी शंशाक जायसवाल पुत्र राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को भी नहीं छोड़ा और उनसे हम लोगों का वास्ता और परेशानी बताकर चाचा और भतीजे ने मिलकर 26 लाख ले लिया। पैसा मांगने पर अष्लील मैसेज भेजता, बहनों को बदनाम करने और घर से बेघर करने की धमकी देता। कहते कि 25 लाख दो वरना पूरे परिवार को जान से मरवा देगें, और फर्जी मुकदमें में फंसवाकर जेल भेजवा देगें। डर के मारे गंदा नाला के पास 23 सितंबर 26 को चाचा और भतीजे को पांच लाख नकद दे दिया। हद तो तब हो गई जब त्रिपाठी टाकीज के पास रहने वाले अनुभव श्रीवास्तव ने अपने फारचूनर से पीड़िता की स्कूटी पर चढ़ाने का प्रयास किया, ठीक उसी तरह जिस तरह आदित्य श्रीवास्तव और उनकी प़त्नी पर गाड़ी चढ़ाने प्रयास करने का आरोप लगा था। पीड़िता पर तेजाब फंेकने तक की धमकी दी गई। हिम्मत तो देखिए कि तीनों ने ठीक उसी तरह पीड़िता के घर पर जाकर जान से मारने की धमकी दी, जिस तरह भांजी के घर जाकर नमन श्रीवास्तव को अनूप खरे की पत्नी ने धमकी दी थी, इसका भी मुकदमा दर्ज है। एसपी को लिखे पत्र में पीड़िता ने कहा कि परिवार की जीविका का एक मात्र साधन बेकरी कारोबार है। कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरा परिवार आत्मदाह करने पर विवश होगा। यह बात पीड़ि़ता ने चाचा और भतीजा से भी कहा, लेकिन कहा कि तुम लोग जिओ या मरो, पैसा वापस नहीं करुंगा। पीड़िता ने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की है।
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