चादर की धुलाई के नाम पर हर साल हो रहा छह अरब का घोटाला, बस्ती के ठेकेदार ने इतने बड़े घोटाले की खोली पोल

-जो चादर बस्ती के ठेकेदार अविनाश पांडेय 245 में धुलकर दे रहे उसी चददर को स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, श्री इंटरप्राइजेज लखनऊसे 1245 रुपया में धुलवा रहें, बिना टेडर के सात अरब का आर्डर दे दिया

-बस्ती के ठेकेदार ने शासन को दिया 245 रुपया में एक चादर धोने का प्रस्ताव, लेकिन कमीशन के चलते प्रस्ताव को रददी की टोकरी में डाल दिया

बस्ती। आज हम आप लोगों को एक ऐसे बड़े घोटाले के बारे में बताने जा रहें हैं, जिसे आज तक आप लोगों ने कभी न तो सुना और न कभी देखा ही होगा, इस घोटाले ने सभी हो हैरान कर दिया। यह घोटाला स्वास्थ्य विभाग के जुड़ा हैं, और यह वही विभाग हैं, जिसकी बागडोर डिप्टी सीएम के हाथों में हैं, यह वही डिप्टी सीएम हैं, जिनका एक वीडियो खूब वायरल हुआ, जिसमें यह कहा गया कि जो डिप्टी सीएम अपने विभाग के चपरासी का तबादला तक नहीं करवा सकता, वह प्रदेश के डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बैठा हुआ है। भले ही चाहंे यह किसी चपरासी का तबदाला न करवा सके, लेकिन घोटाला करने में इनका कोई सानी नहीं है। अगर भाजपा 2027 में सत्ता से बाहर होती है, तो उसमें इनका बहुत बड़ा योगदान रहेगा। इनके ही विभाग में मनीष मल्होत्रा नामक बड़े ठेकेदार, तो मत्रंीजी के दाऐ बाएं घूमते रहते है। साल में यह मंत्रीजी की कृपा से प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में उपकरणों एवं फर्नीचर की आपूर्ति में सौ करोड़ का कारोबार करते हैं, सिर्फ चददर की धुलाई में ही इन्हें लगभग हनर साल सात अरब का भुगतान होता है। इनकी पहुचं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि अगर यह किसी सीएमएस या एसआईसी को आधा भी सामान उपलब्ध करा दे तो कोई आब्जेक्षन नहीं करता। महिला अस्पताल में आज भी मल्होत्राजी ने 30 फीसद सामानों की आपूर्ति नहीं की। कोई पूछने वाला नहीं। सामानों का टेंडर निकालने वाली सरकारी संस्था मेडिकल कारपोरेशन ने 2023 में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के 49400 बेड के चददर धुलाई का टेंडर निकाला, एक चादर  की धुलाई के लिए एक माह में 1245 रुपया दर निर्धारित किया गया। इस टेंडर के जरिए साल भर में लगभग सात अरब रुपये का भुगतान होना। इसमें कुल छह फर्मो ने भाग लिया, पांच फर्मे या तो क्वालीफाई नहीं कर पाई या तो उन्हें श्री इंटरप्रजाइजेज को लाभ पहुचाने के लिए, जानबूझकर डिसक्वालीफाई कर दिया गया। कारपोरेशन ने टेंडर को निरस्त कर दिया, अब यहीं से होता है खेल। स्वास्थ्य निदेशक ने बिना टेंडर प्रक्रिया को अपनाए श्री इंटरप्राइजेज 1245 रुपये के दर से चददर धोने का आर्डर दे दिया। इसके लिए प्रदेश के सारे अस्पतालों के सीएमएस और एसआईसी को दिशा निर्देश जारी हुआ। बताते हैं, कि बस्ती को छोड़कर अन्य जनपदों के सीएमएस और एसआईसी को प्रति चददर पर पांच सौ कमीशन मिलने लगा। इस तरह लगभग छह अरब रुपया कमीशन में हर साल चला जाता हैं, और यह कमीशन नीचे से लेकर उपर तक जाता है। इसका खुलासा कभी न होता अगर बस्ती के ठेकेदार अविनाश पांडेय यह न लिखकर देते कि अगर उसे आर्डर मिल गया तो वह पूरे प्रदेश में 245 रुपये में चददर धुलकर देने को तैयार है। अगर इनका प्रस्ताव मान लिया जाता तो सरकार का हर साल लगभग छह अरब बच जाता। चूंकि अविनाश पांडेय बस्ती में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, हर्रैया महिला अस्पताल और टीबी अस्पताल में 245 रुपये के दर से एक चादर धोकर दे रहे है। इसके लिए इन्होंने जिला अस्पताल में लगभग 35 लाख की लागत से वासिंग मशीन लगा रखा हैं, जो एक बार में एक हजार चददर धोता है। 245 रुपये में भी लगभग 25 रुपया कमीशन में चला जाता है। लगभग 20 रुपया का लाभांश ठेकेदार को होता है। इस तरह 200 रुपये में एक चादर  एक माह में पांडेयजी धुलकर दे रहे है। रही बात खर्चे की तो सर्फ और लेबर में जितना लगता होगा, उतना लग जाता है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि जो चादर  बस्ती के पांडेयजी 245 रुपये में धुल कर दे रहे हैं, उसी चददर को श्री इंटरप्राइजेज वाले 1245 रुपया में धुलकर दे रहे है। अगर किसी ठेकेदार को एक चादर  पर एक हजार मुनाफा होता है, तो वह व्यक्ति कुछ भी करने को तैयार रहेगा।

श्री इंटरप्राइजेज के लोग बस्ती में भी पैर जमाने का प्रयास किया, एसआईसी और सीएमएस को एक चददर पर पांच रुपया का कमीषन देने का आफर भी किया, और इसके लिए सभी सीएमएस और एसआईसी ने मिलकर कारपोरेशन को पत्र भी लिखा, और उनसे अनुबंध की प्रति भी मांगी, लेकिन नहीं मिला। कापी इस लिए नहीं मिली, क्यों कि अनुबंध ही नहीं हुआ। जिले के तीन सीएमएस और एक एसआईसी बस्ती के ठेकेदार से काम छीन कर श्री इंटरप्राइजेज को इस लिए देना चाहते हैं, ताकि उन्हें एक चादर पर पांच सौ रुपया कमीशन मिल सके, कहां 20 रुपया और कहां पांच सौ कमीशन। बस्ती में हर साल चादर धुलाई पर लगभग 94 लाख का भुगतान होता है। अगर यही काम श्री इंटरप्राइजेज के यादवजी को मिल जाए तो हर साल उन्हें लगभग छह करोड़ का भुगतान करना पड़ेगा, इस तरह अगर देखा जाए तो बस्ती के पांडेयजी सरकार का हर साल लगभग पांच करोड़ का बचत कर रहे है। यही बचत जिले के अधिकारियों को इस लिए चुभ रहा है, क्यों कि उनका लाखों के कमीशन का नुकसान हो रहा है। बस्ती में लगभग 625 चादर की धुलाई रोज होती है।