बस्ती। कुदरहा के सीएचसी के एमओआईसी डा. फैज वारिश तो अब जनरेटर के तेल का पैसा भी खाने लगें, इन्हें कुदरहा सीएचसी ने इतना प्यार हैं, कि इसे यह छोड़ना नहीं चाहते, चले जाते फिर पैसा देकर आ जाते हैं, ऐसा लगता है, कि मानो इनका और कुदरहा सीएचसी के लोगों से पुराना रिष्ता है। क्षेत्र की जनता इन्हें पसंद करे या न करे, लेकिन अवैध तरीके से संचालित होने वाले मेडिकल स्टोर के संचालक, नर्सिगं होम के संचालक, अल्टासाउंड और पैथालाजी के संचालक अवष्य प्यार करते है। जनरेटर के तेल का पैसा खाने की बात इस लिए कही जा रही है, क्यों कि जब भाकियू भदौरिया गुट के मंडल अध्यक्ष उमेश गोस्वामी अस्पताल में दवा लेने गए तो उन्होंने देखा कि समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा में सर्प दंश के तीन मरीज भर्ती हुए। बिजली नहीं थी, जिसके चलते मरीज और भी परेषान हो रहे थे, उमेश ने जब उपस्थित मेडिकल स्टाफ से जनरेटर चलाए जाने की मांग किया तो बताया गया, जनरेटर तभी चलेगा, जब प्रभारी आदेश देगें। जब इसकी जानकारी उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती को दिया और बताया कि पूरे अस्पताल परिसर में काफी अंधेरा है, जनरेटर चलाए जाने के लिए प्रभारी डॉ फैज वारिस को निर्देशित करें। इस बात को लेकर डॉ फैज वारिस इतना भड़क गए कि उन्होंने कहा कि जिस मरीज को वीआईपी ट्रीटमेंट चाहिए उसको हायर सेंटर रेफर कर दो जनरेटर नहीं चलाया जाएगा। कहा कि मरीज मरे या जिए, लेकिन जनरेटर नहीं चलेगा। इसी जनरेटर के तेल के पैसे से बड़े साहब यानि सीएमओ साहब को महंगी वाइन प्रभारी द्वारा गिफ्ट किया जाता है। हर वर्ष रंगाई पुताई के लिए लाखों रुपए का बजट आता है, वह बजट भी प्रभारी और सीएमओ चट कर जाते हैं। दवाओं में भारी कमीशन प्रभारी को जाता है, जब प्रभारी को विवाद में हटाया गया था, और बाबूजी के दबाव में इन्हें सीएमओ ने फिर से कुदरहा भेज दिया। 2013 से डॉक्टर फैज वारिस कुदरहा में जमें हुए है स्थानांतरण नीति की सीधे ध्वजियां उड़ाई जा रही है। डीएम को लिखे पत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा में आए हुए रंगा पुताई के बजट का जो धन सीएमओ और प्रभारी ने बिना कार्य कराए गटक गये हैं, इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और डॉक्टर फैज बारिश को महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने के लिए शिफ्ट किया जाए। title in english