बस्ती। जो लोग यह कहते हैं, कि इस सरकार में भ्रष्टाचारियों के खिलॉफ लिखा-पढ़ी करने से कोई फायदा नहीं होता, उन लोगों की धारणा को भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ निरंतर आवाज उठाने वाले भाकियू भानू गुट के उपाध्यक्ष उमेश गोस्वामी ने यह कहते हुए गलत साबित कर दिया, कि अगर लड़ने वाला ईमानदारी से लड़ेगा तो उसे सफलता अवष्य मिलेगी। कुदरहा पीएचसी के भ्रष्ट स्टाफ नर्स संविदा ननद-भौजाई सुनीता चौधरी और सुमन चौधरी का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों को हटाने के लिए वह पिछले छह-सात माह से डीएम और सीएमओ से लिखा-पढ़ी कर रहे थे। चूंकि सीएमओ और डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी ननद-भौजाई को बचाने के लिए हफता लेते थे, इस लिए कार्रवाई नहीं करते थे, कहा कि जब उसने देखा कि उसकी नहीं सुनी जा रही है, बल्कि उसके षपथ-पत्र और साक्ष्य को सीएमओ और डिप्टी सीएमओ ने बेच दिया तो उसने डीएम को आमरण-अनशन पर बैठने का नोटिस दिया, और कहा कि अगर 28 मार्च से पहले ननद-भौजाई को नहीं हटाया तो वह आमरण-अनशन पर तब तक बैठा रहेगा, जब तक उसकी जान न चली जाए। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि एक सप्ताह का समय दो, उसके बाद जो करना होगा करना। एक दिन पहले यानि 25 मार्च 26 को सीएमओ की ओर से उमेश गोस्वामी को ननद-भौजाई का तबादला कुदरहा से सीएचसी कलवारी करने का आदेश उपलब्ध करा दिया। इसके बाद डीएम को धन्यवाद देते हुए आमरण-अनशन स्थगित करने का पत्र 26 मार्च को दिया। यह सही है, कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करवाना आसान नहीं हैं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है। यह उमेश गोस्वामी ने कर दिखाया। यह जीत किसी उमेष गोस्वामी की नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में हिम्मत नहीं हारी। ननद-भौजाई के बारे में बताया जाता है, कि यह दोनों इंसानियत के नाम पर कलंक है। पैसे के लिए इन दोनों ने न जाने कितने गरीब मरीज महिलाओं का गहना तक बेचवा दिया। जो दवा सौ-दो सौ की लिखनी चाहिए, उसे दोनों अधिक कमीशन के लिए 12-13 सौ की दवा लिखती रही। जबकि दोनों को दवा लिखने का कोई अधिकार नहीं है। इन दोनों की डेली की आमदनी 10 से 15 हजार की होती रही। सवाल उठ रहा है, कि जिस ननद-भौजाई की फिदरत ही गलत तरीके से पैसा कमाने की है, अगर उसे दूसरे जनपद में भी भेज दिया जाए तो वह अपनी फिदरत को नहीं छोड़ सकता। ननद-भौजाई को भले ही 13 किमी. दूर भेज दिया गया, लेकिन क्या यह दोनों गरीब मरीजों का शोषण और उत्पीड़न बंद कर पाएगी? यह सवाल सीएमओ और डिप्टी सीएमओ दोनों के लिए है।
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