बस्ती। अगर डिप्टी सीएमओ स्तर के अधिकारियों का स्तर 55 वाला बंटी और बबली का रहेगा तो सीएचसी, पीएचसी के एमओआईसी और फार्मासिस्टों का क्या स्तर होगा? इसका अंदाजी आसानी से लगाया जा सकता है। यह आरोप डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी और डा. एसबी सिंह पर लगाते हुए तहसील दिवस में शिकायतकर्त्ता उमेश गोस्वामी ने डीएम से कहा कि मैडम जब डिप्टी सीएमओ बंटी बबली लेगें तो यह जांच क्या करेगें, और इनके जांच रिपोर्ट पर भरोसा कोई कैसे करेगा? यह आरोप कुदरहा के ग्राम पंचायत उजियानपुर में बेसमेंट में संचालित हो रहें प्रकाश नर्सिगं होम की जांच में बंटी बबली लेकर बिना जांच किए कूटरचित तरीके से रिपोर्ट लगाने के मामले में दोनों डिप्टी सीएमओ पर लगाया गया।
मानो सीएमओ, डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी, डा. एसबी सिंह और डा. बृजेश शुक्ल ने तय कर लिया कि चाहें कोई जो भी आरोप लगाए, वे सुधरने वाले नहीं है। सुधरने का मतलब आर्थिक नुकसान करना। यह लोग गाली खा लेगें, गंभीर से गंभीर आरोप झेल लेगें, लेकिन सुधरेगें नहीं। कोई इन्हें लिखित में 55 रुपया वाला बंटी और बबली लेने का आरोप लगाता है, और यह फिर भी चुप रहतें हैं, हंसकर टाल देते है। गोस्वामी ने लिखा कि मैडम में हम राजस्व निरीक्षक दिलीप कुमार और जेई विनोद कुमार की रिपोर्ट से पूरी तरह संस्तुष्ट हैं, लेकिन दोनों डिप्टी सीएमओ के कूटरचित रिपोट्र से संतुष्ट नहीं हैं, क्यों कि दोनों ने नर्सिगं होम वाले से 55 वाला बंटी और बबली लिया है। इस नर्सिगं होम का मामला उस समय सामने आया जब पहली मार्च 23 को ओमप्रकाश ने पिपरपाती में पटेल हास्पिटल में पंडोहिया चकिया की रहने वाली गुड़िया यादव की गलत आपरेशन कर दिया गया। मामला तूल पकड़ा तो ओमप्रकाश चौधरी ने हास्पिटल को बंद कर दिया, और कुदरहा में आकर भवन मालिक शुभम सिंह एवं कुदरहा सीएचसी में तैनात एएनएम इंचार्ज विनोदा सिंह से उनके खाली आवास को किराए पर ले कर प्रकाश नर्सिगं होम नाम से हास्पिटल खोल दिया, यह हाहस्पटल बेसमेंट में नियम विरुद्व संचालित हो रहा है। कोई आपातकालीन खिड़की नहीं फायर बिग्रेड का इंतजाम नहीं, एक अखबार को दिए बयान में डा. एसबी सिंह और तत्कालीन सीएमओ दूबेजी के बयान विरोधाभाशी है। कहा कि अगर महिला का गलत आपरेषन करने वाला नाम बदल कर दूसरा हास्पिटल खोल लेता है, तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन डा. एसबी सिंह कार्रवाई करने के बजाए कूटरचित तरीके से रिपोर्ट लगा रहे हैं। लाइसेंस को निलंबित करने की मांग की गई, यह भी कहा गया कि पीएचसी कुदरहा में जो भी डिलीवरी का केस आता है, उस केस को उषा नाम की आशा कमीशन के चक्कर में केस को प्रकाश नर्सिगं होम को भेज देती है, जहां पर महिला और उसके परिजन का दोहन किया जाता है। कहा कि जब तक बस्ती में डा. एके चौधरी और डा. एसबी सिंह जैसे डिप्टी सीएमओ रहेगें, तब तक प्रकाश नर्सिगं होम जैसा हास्पिटल चलता रहेगा, और मरीज मरते रहेगें। मामले की जांच मेडिकल कालेज, महिला अस्पताल और पुलिस की जांच टीम बनाकर जांच करने की मांग की गई।
0 Comment