बस्ती। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय के बस्ती आने से किसको क्या मिला और क्या नहीं मिला? और भविष्य में क्या मिलेगा? यह अलग बात हैं, लेकिन इनके बस्ती आने से बेरोजगार सैकड़ों महिलाओं और गांव-गढ़ी के लोगों को एक दिन का रोजगार अवष्य मिला, किसी को पांच सौ मिला तो किसी को हजार मिला, लेकिन मिला सभी को, यह बात कई महिलाओं और पुरुषों ने स्वीकारा भी। भीड़ जुटाने का यह नया फैशन बन गया है, अब कोई व्यक्ति मायावती के समर्थक को छोड़कर किसी नेता का भाषण सुनने या फिर उन्हें देखने नहीं आता, वह जब भी आता है, हजार पांच सौ लेने के बाद ही आता है। यह एक ऐसा सच हैं, जिसे हर नेता स्वीकार करने को तैयार है। पहले पार्टी के कार्यकर्त्ताओं की ही इतनी भीड़ हो जाती थी, कि किसी को किराए पर लाने की जरुरत ही नहीं पड़ती थी, और पहले खुद लोग घर से बाहर निकलकर नेताओं की सभाओं में जाते थे, अब तो पांच-दस कार्यकर्त्ता एकत्रित हो जाए तो बड़ी बात हैं, अब तो बुलाने पर भी कोई कार्यकर्त्ता घर से निकलने को तैयार नहीं हैं, अगर किराए के लोग न मिले मैदान और कुर्सी खाली देख नेता अपना माथा पकड़कर बैठ जाए, हाल ही में योगीजी की बनारस की सभा में खाली-खाली कुर्सी देखने को लोगों को मिला। अब तो भीड़ जुटाने के लिए किसी नेता को गांव-गावं नहीं घूमना पड़ता, और न महिला समूहों के पास कोई जाता, अब तो जगह-जगह इसके ठेकेदार हो गए, कितनी भीड़ चाहिए, वह व्यवस्था कर देते हैं, अगर ठेकेदार एक पर पांच सौ या हजार लिया तो वह सभा, रैली और स्वागत में जाने वालों को चार सौ या आठ सौ ही देता है, बाकी अपना कमीषन रख लेता है। बहरहाल, चुनाव आते ही ठेकेदारों की चांदी हो जाती है, साथ में उन बेरोजगार महिलाओं और नौजवानों एक दिन का रोजगार भी मिल जाता है। क्या कभी किसी नेता ने यह सोचा भी था, कि एक दिन उसे भीड़ जुटाने के लिए किराए पर लाना पड़ेगा। इसके लिए नेताओं की कम लोकप्रियता और उनके गिरते चरित्र को जिम्मेदार माना जा रहा है। सब कुछ जानते हुए भी बड़ा नेता स्थानीय नेता की यहकर पीठ थपथपाता हैं, कि तुमने भीड़ अच्छी जुटाई, अब बड़े नेताओं को कौन समझाने जाए, कि इस भीड़ को जुटाने के लिए स्थानीय नेताओं को लाखों खर्चा करना पड़ा। जाहिर सी बात हैं, जब नेता भीड़ पर लाखों खर्च करेगा, तो उसकी भरपाई भ्रष्टाचार करके ही करेगा। जो लोग स्वागत करने वालों की भीड़ देख एतिहासिक कह और मान रहे हैं, उन्हें भी अच्छी तरह मालूम हैं, कि अगर पंचायत चुनाव और विधानसभा का चुनाव करीब न होता तो इतनी भीड़ कभी न जुटती। यह तो पांचों विधानसभाओं के लगभग 40 भाजपा के संभावित उम्मीदवारों का कमाल है, जो इतनी भीड़ और एतिहासिक स्वागत हो गया, वरना किसी को यह बयान जारी करने का मौका नहीं मिलता, कि स्वागत एतिहासिक रहा। अगर चेहरा दिखाने वाले नेता अपने अधिकांष किराए के समर्थकों के जरिए जिंदाबाद-जिंदाबाद का नारा न लगवाते तो विनोदजी को यह पता ही चलता कि कौन संभावित उम्मीदवार उनके स्वागत में अपने समर्थकों के साथ आएं है। अब जरा अंदाजा लगाइए, कि विनोदजी कितने लोगों को याद रखेगें। जिस तरह स्वागत में बैनर और पोस्टर के साथ किराए पर भीड़ जुटाई गई, और जिसके लिए रात दिन मेहनत और लाखों खर्च किया गया, उसके बाद भी अगर विनोदजी को नाम पूछना पड़े, तो समझ लेना चाहिए, उनकी सारी मेहनत और पैसा पानी में डूब गया। जिस तरह हर कोई माला पहनाकर स्वागत कर रहे थे, अगर उनमें में से एक दो की मंषा पूरी हो जाए तो बहुत बड़ी बात है। सभी को मालूम हैं, टिकट पर उस व्यक्ति का अंतिम मोहर प्रदेश अध्यक्ष और क्षेत्रीय अध्यक्ष के चाहने और नाम भेजने से नहीं लगता, जब तक दिल्ली वाले नहीं चाहेंगें। जिसका नाम कोर कमेटी भेजती है, वह देखती ही रह जाती है, और चयन किसी और का हो जाता है।

 ‘हरीश द्विवेदी’ ने ‘राजकिशोर सिंह’ को किया ‘प्रोजेक्ट’

क्षेत्रीय अध्यक्ष के स्वागत समारोह से अगर किसी को सबसे अधिक लाभ हुआ, तो वह राजकिशोर सिंह को हुआ, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी जिस तरह पूरे स्वागत समारोह और होटल में अपने साथ लिए रहे, वह चर्चा का विषय बना रहा, जिस राजकिशोर सिंह को हर्रैया में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मंच पर स्थान नहीं मिला, उसे हरीश द्विवेदी ने मंच पर बैठाया। रही बात जिले के एक मात्र भाजपा विधायक अजय सिंह की तो उन्हें लोगों ने टांडा पुल के पास थोड़ी देर के लिए देखा, उसके बाद वह कहीं दिखे नहीं कैमरामैन और यूटूबर वालें भी इन्हें तलाशते रहे। अब सवाल उठ रहा है, कि क्या हर्रैया की जनता स्वागत समारोह के बाद यह माने की राजकिशोर सिंह का पलड़ा विधायक से भारी पड़ रहा है। हरीश द्विवेदी का राजकिषोर सिंह का इस तरह खुलेआम सपोर्ट करना अजय सिंह के समर्थकों को बैचैन करने जैसा माना जा रहा है। इस स्वागत समारोह में भी गुटबाजी देखने को मिली। अध्यक्ष का हरीष द्विवेदी का पैर छूना और उसके बाद गमछा पहनना, यह बताता है, कि इनके मन में हरीश द्विवेदी के प्रति कितना प्रेम और सम्मान है। इस घटना के बाद इनके आवास पर अब और भीड़ बढ़ने लगेगी।