बस्ती। सदर ब्लॉक पांच अगस्त 26 की सुबह 10 बजे एक ऐसी घटना हुई, जिस पर कोई यकीन ही कर रहा है। लोकायुक्त के जांच के घेरे में रहने वाले बीडीओ शिवमणि ने बीडीओ का पदभार ग्रहण करने गई महिला आईएएस अधिकारी अपूर्वा सिंह को बीडीओ की कुर्सी देने से यहकर इंकार कर दिया, कि मैडम पहले मेरा आदेश लाइए, फिर मैं आप को बीडीओ की कुर्सी पर बैठने दूंगा। महिला आईएएस अधिकारी यह देखकर दंग रह गई, कि एक बीडीओ कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं, मैडम कुछ देर तक खड़ी रही, फिर बीडीओ ने एक कुर्सी मंगाया, और मैडम को अपने बगल में बैठाया। किसी भी महिला आईएएस अधिकारी के लिए ऐसा अनुभव होना और वह भी प्रशिक्षण के दौरान, जीवनभर याद रखने वाला होगा। अपूर्वा सिंह सदर के बीडीओ शिवमणि को तब तक याद रखेगी, जब तक नौकरी में रहेंगी। वैसे देखा जाए तो गलती बीडीओ की भी नहीं हैं, क्यों कि उन्हें बीडीओ की कुर्सी छोड़ने का कोई आदेश ही मिला, एक तरह से बीडीओ ने जो मैडम के साथ किया यही किया। बीडीओ साहब ने लेखाकार सहित अन्य कर्मियों को मैडम के सामने ही बुलाकर पूछा कि क्या बिना आदेश के कुर्सी छोड़नी चाहिए, इस पर सभी ने न में जबाव दिया। बीडीओ का ब्लॉक छोड़ने का आदेश न होना चर्चा का विषय बना हुआ है, और कहा भी जा रहा है, कि जब बीडीओ को तबादले का कोई आदेश ही नहीं मिला तो बीडीओ साहब कैसे कुर्सी खाली कर दें। जब बीडीओ ने कुर्सी छोड़ने से इंकार कर दिया तो उन्होंने सीडीओ को फोन किया, फिर सीडीओ ने डीडीओ को ब्लॉक भेजा, उसके बाद भी बीडीओ साहब से डीडीओ साहब से यह कहते हुए कुर्सी छोड़ने से इंकार कर दिया, कि साहब पहले हम्हें यह तो बताइए, कि जाना कहां हैं, और तबादले वाला आदेष कहां है। डीडीओ साहब को भी मैडम के साथ बैरगं जाना पड़ा। सवाल उठ रहा है, कि जब मैडम का सदर बीडीओ का चार्ज लेने का आदेश जारी हुआ होगा, तसे यह आदेश भी जारी हुआ होगा, कि बीडीओ साहब किस ब्लॉक में या फिर विकास भवन उन तीन बीडीओ की तरह अटैेच रहेगें, जो पहले से है। अगर मैडम का आर्डर डिस्पैच हुआ है, तो बीडीओ का आर्डर डिस्पैच हुआ होगा, अगर नहीं हुआ तो क्यों नहीं हुआ? क्या यह आर्डर सीडीओ ने खुद टाइप करके जारी किया? इसे कोई छोटी मोटी चूक नहीं मानी जा सकती है, क्यों कि इस चूक के चलते एक महिला आईएएस अधिकारी को पहली ही पोस्टिगं में अपमानित होना पड़ा। बल्कि किसी साजिश की ओर ईशारा कर रहा है। यहां पर बीडीओ साहब के हिम्मत की दाद देनी होगी, उन्होंने यह साबित कर दिया कि पद बड़ा नहीं होता, नियम कानून बड़ा होता है। नियम तो यह कहता है, कि अगर मैडम का आदेश जारी हुआ तो बीडीओ का भी आदेश जारी होना चाहिए था। बीडीओ को निवर्तमान प्रमुख को खास माना जाता है, क्यों कि बीडीओ साहब जब लखनऊ अटैच थे, तो प्रमुखजी ही इन्हें अपने ब्लॉक में बीडीओ बनाकर लाए थे, बीडीओ और डीडीओ में उस समय से तनतानी चल रही है, जब शिवमणि गोंडा में बीडीओ के पद पर थे, और डीडीओ भी गांेडा में थे, बीडीओ को निलंबित भी होना पड़ा था। सीडीओ साहब ने यह सोचकर मैडम को सदर ब्लॉक का बीडीओ बनाकर भेजा, कि जाते ही बीडीओ कुर्सी से सठ खड़े होगें, और मैडम का स्वागत करते हुए खुद कुर्सी तक ले जाएगें, लेकिन सीडीओ साहब का सोचना गलत साबित हुआ। मैडम को बीडीओ की कुर्सी भी नहीं मिली, अलबत्ता अपमानित अवष्य होना पड़ा। इस पल को न तो बीडीओ शिवमणि और न आईएएस मैडम अपूर्वा सिंह ही कभी भूल पाएगीं। यह पहला अवसर नहीं हैं, जब किसी बीडीओ ने आईएएस अधिकारी को अपमानित किया, इससे पहले आईएएस अधिकारी सीडीओ रंगाराव साहब जब हर्रैया ब्लॉक का निरीक्षण करने गए, तो तत्कालीन बीडीओ डीपी सिंह ने सीडीओ के लिए कुर्सी नहीं छोड़ी थी। उसके बाद उनका क्या हुआ, यह वही जानते है।