बस्ती। जो नेता और उनके समर्थक, पत्रकारों को दलाल और मां-बहन की गाली देते हैं, उन्हें सपा के बृजेश मिश्र के शब्दों को अपने जीवन में अवष्य उतारना चाहिए, यकीन मानिए जिसने भी मिश्राजी की नशीहत पर ध्यान दिया, वह कभी किसी को दलाल और मां-बहन की गाली नहीं देगा। नशीहत देते हुए कहा कि ‘‘कौआ किसी का धन नहीं चुराता और कोयल कभी किसी को धन नहीं देती, लेकिन कौआ अपनी कड़वी बोली के कारण दुत्कारा जाता हैं, और कोयल अपनी मीठी वाणी से पूरे संसार को अपना बना लेती है, इस लिए व्यर्थ के अहंकार और बड़बोलेपन से बचिए, नहीं बचेगें तो समाज में नंगा होना पड़ेगा और यह काम और कोई बल्कि पत्रकार और जनता करेगी। आज हम आप लोगों और पत्रकार साथियों को उन नेताओं के भ्रष्ट ठेकेदारों का सच बताने जा रहें हैं, जो खुद तो दलाली करते हैं, और पत्रकारों को दलाल कहते है। अगर यह नेताओं और अधिकारियों की दलाली न करे तो इनकी दुकान बंद हो जाएगी, यह अपनी दुकान चलाने और आकांओं को खुश करने और वफादारी दिखाने के लिए उन पत्रकारों को दलाल और मां-बहन की गाली देते हैं, जो इनके आकाओं के सच को उजागर करते है। ऐसा ही एक सच दो-तीन दिन पहले सामने आया, जब पत्रकार ने पत्रकार को दलाल करने वालों के सच के बारे में छानबीन किया तो दो दिन में उन लोगों का सच सामने आ गया।
स्थलीय छानबीन में दलाल कहने वाले ठेकेदार के द्वारा निर्माण कराए गए नाला निर्माण में ऐसा सच सामने आया, जिसमें इनकी सारी ईमानदारी धरी की धरी रह गई, शपथ-पत्र के साथ की गई शिकायत में चार बड़े घटिया नाला निर्माण की बात कही गई, देखने से ही शिकायत की पुष्टि स्थानीय नागरिकों ने किया, और कहा कि इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन राजनैतिक दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिन घटिया नाला निर्माण और फर्जी भुगतान करने की शिकायत की गई, उनमें जगदीशपुर उर्फ नौगढ़वा में नाला निर्माण निर्माण में भारी अनियमितता करने का दावा किया गया, तहसील से फायर स्टेशन मोड़ तक तक नाला निर्माण मेसर्स अभिमन्यू वैश्य की ओर से करने की बात कही गई, भानपुर एसबीआई के सामने तहसील तक घब्यिा नाला निर्माण को मेसर्स ओजस कांस्टक्षन की ओर से करने की शिकायत की गई, चौथे घटिया नाला निर्माण की शिकायत भानपुर काली मंदिर से नौगढ़वा मार्ग, बन मोहल्ला तक यह निर्माण मेससे बवंडली सिंह के द्वारा करने की बात कही गई है। इन सभी नालों का निर्माण 2025-26 में करने का दावा किया गया। एक भी निर्माण स्थल पर सिटीजन इंफारमेषन बोर्ड यानि सीआईबी नहीं लगा मिला, इस लिए नहीं लगाया गया, ताकि किसी को भी इसकी लागत और ठेकेदार के नाम का पता न चल जाए। शिकायत में मेससे टाईगर इलेक्टिकल एंड कांस्टक्षन सहित अन्य फर्मो की संलिप्ता की भी जानकारी दी गई। तमाम कार्य ऐसे कराए गए, जो हुआ ही नहीं और भुगतान कर दिया गया, इस घोंटाले में तत्कालीन ईओ, जेई, कनिष्ठ लिपिक एवं बाबू की प्रत्यक्ष रुप से संलिप्ता के होने का दावा किया गया, जितने भी निर्माण कार्य कराए गए, उनमें उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, पीडब्लूडी के नियमों एवं वित्तीय नियमावली और पारदर्शिता संबधी शासनादेशों का स्पष्ट उल्लघंन किया गया। कहा गया कि अगर सभी नाला निर्माण की जांच उच्चस्तरीय निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए तो घोटालेबाजों का चेहरा सामने आ सकता है, और वित्तीय अनियमितता के आरोप में जेल भी जा सकते है, कार्यो की स्वीकृति, एस्टीमेट, टेंडर विवरण, भुगतान अभिलेख एवं गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की गई है। ठेकेदार और उनकी फर्मो को ब्लैक लिस्टेड करने की भी मांग की गई, ताकि ऐसी फर्मे फिर कभी सरकारी धन का दुरुपयोग न कर सके। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मुकदमा चलाने की भी बात कही गई। कहा गया है, कि जनहित और सरकारी धन की सुरक्षा के लिए निर्माण कार्यो की पुनः तकनीकी जांच कराया जाना आवष्यक है। कहा गया कि यह पैसा न तो भ्रष्ट अधिकारियों का हैं, और न भ्रष्ट ठेकेदारों का हैं, बल्कि यह जनता के टैेक्स का पैसा हैं, जिसे किसी को लूटने की आजादी नहीं मिलनी चाहिए।
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