बस्ती। अगर मेडिकल कालेज की स्टाफ नर्स किसी डाक्टर पर बदनीयती का आरोप लगाती हैं, और बात न मानने पर गला दबाकर मारने की बात कहती है, तो इसे अति गंभीर माना जाता है। क्यों कि समाज और मरीज डाक्टर को भगवान मानता है, और अगर वही भगवान रुपी डाक्टर स्टार्फ नर्स या फिर महिला मरीज पर बुरी नजर रखता है, तो समाज उसे माफ नहीं करता। अगर किसी डाक्टर का स्तर इतना गिर जाए तो उसे डाक्टरी के पेशे से अलग हो जाना चाहिए। इसी तरह का आरोप माधव प्रसाद मेडिकल कालेज सिद्धार्थनगर की स्टाफ नर्स और मड़वानगर कोतवाली बस्ती की रहने वाली ‘मनीशा यादव पुत्री गया प्रसाद’ ने जूनियर रेजीडेंट ‘डाक्टर सौरभ गौतम’ पर लगाया। डीआईजी से डाक्टर और साथ देने वाले मेडिकल कालेज के ‘शिवकुमार’ एवं स्टाफ नर्स ‘स्नेहा सिंह’ के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज कराते हुए न्याय दिलाने की मांग की है। उधर डाक्टर का कहना है, कि वह पहले ही आरोप लगाने वाली स्टाफ नर्स के खिलाफ अपमानित करने के आरोप में एससीएसटी एक्ट के तहत नौगढ़ थाने में एक माह पहले मुकदमा दर्ज करा चुके है। कहते हैं, कि अगर स्टाफ नर्स ने इतना गंभीर आरोप लगाया है, तो साबित भी उसे ही करना होगा। आरोप को निराधार और असत्य बताया। कहा जाता है, कि अगर किसी मेडिकल कालेज में इस तरह की घटना होती है, तो उसे मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य की लचर व्यवस्था माना जाएगा। डाक्टर चाहे प्राइवेट हो या फिर चाहें सरकारी उसे कभी भी किसी महिला नर्स या फिर महिला डाक्टर के इज्जत के साथ खिलवाड़ नहीं कऱना चाहिए, सब कुछ चला जाता हैं, कुछ नहीं बचता। डाक्टरी ही एक ऐसा पेशा हैं, जहां पर महिलाओं से सबसे अधिक वास्ता पड़ता है। जिस स्थान पर महिलाओं को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करना चाहिए, अगर वहीं पर वह सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर महिलाएुं कहां सुरक्षित रहेंगी? षहर में एक बहुत ही प्रतिष्ठित कपड़े की दुकान है। यहां पर लगभग 80 महिलाएं काम करती है। एक दिन एक महिला कर्मी ने रोते हुए मालिक से कहा कि फला सेल्समैन छेड़ता है। मालिक ने सेल्समैन को बुलाया, और सबके सामने लाडी से खूब पीटा और अन्य स्टाफ से भी पिटवाया। मालिक ने कहा कि महिला स्टाफ की सुरक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है, और अगर हम ही महिलाओं की इज्जत को सुरक्षित नहीं कर पाएगें, तो मालिक होने का क्या मतलब? स्टाफ नर्स के द्वारा डीआईजी सहित अन्य अधिकारियों से की गई, लिखित षिकायत में जो  आरोप डा. सौरभ गौतम, शिवकुमार और स्टाफ नर्स स्नेहा पर लगाए गए हैं, अगर वह आरोप सही साबित होता है, इसे मेडिकल कालेज और आरोपियों के लिए कंलक माना जाएगा। स्टाफ नर्स का कहना है, कि प्रिंसिपल सर उन्हीं लोगों का साथ देते हैं, जो परमानेंट स्टाफ होता है। इस मामले में स्थानीय सांसद जगदंबिका पाल भी हस्तक्षेप कर चुके है। पत्र में कहा गया है, कि डाक्टर गौतम की नीयत उाके प्रति ठीक नहीं थी, वे मेरे साथ गलत नीयत अक्सर पेष आते थे, कई बार उन्होंने मेरे साथ गलत आचरण भी किया, लेकिन सम्मान के कारण इसे किसी से भी नहीं कहा। कहा कि उन्होंने अपने इस गंदे कृत्य में स्टाफ नर्स स्नेहा सिंह और षिवकुमार को भी षामिल कर लिया। दोनों कहते थे, कि डाक्टर की बात मान जाओ फासदे में रहोगी, यह दोनों डाक्टर के साथ गलत नीयत में साथ देने के लिए प्रेरित करते थे। कहा कि 17 मार्च 26 को दिन में लगभग साढ़े नौ बजे के करीब जब ड्यूटी पर थी, तभी षिवकुमार और स्नेहा आए और फिर डाक्टर की बात मान लेने के लिए दबाव बनाया, तब उस दिन कड़ा विरोध किया, तब तीनों भददी-भददी गाली देते हुए मारपीट करने लगे, तीनों ने कहा कि जिदंगी में अगर आगे बढ़ना है, तो कहीं-कहीं समझौता भी करना पड़ता है। तीनों ने हत्या की नीयत से दुपटटे से बुरी तरह मेरा लगा कस दिया, जिससे सांस रुकने लगी, ष्षोर मचाने पर जब लोग एकत्रित हुए और बीच बचाव किया तो तीनों छोड़कर भाग गए। लिखा कि इज्जत के नाते अभी तक कुछ करना नहीं चाहती थी, लेकिन बाद में पता चला कि डाक्टर मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई कर दिया। लिखा कि मारपीट में पर्स कहीं खो गया, जिसमें कुछ रुपया, पेन, आधार कार्ड एवं कुछ कागजात थे।