बस्ती। सुनकर हैरानी होगी, लेकिन यह सच है, कि बनरहा पीएचसी के एमओआईसी डा. अष्वनी यादव पर रमेश चौधरी मेडिकल स्टोर से हर माह एक लाख कमीशन के रुप में लेने का आरोप क्षेत्र की जनता लगा रही हैं, इसकी जानकारी सीएमओ को भी है। इसके एवज में यादवजी मेडिकल स्टोर वाले को डेली 20 हजार कमवाते है। यादवजी, जिले के ही नहीं प्रदेश के पहले ऐसे एमओआईसी होगें, जो खुद कमीशन वाली दवा लिखते, यह सबसे अधिक 50 फीसद कमीशन वाली जेनरिक दवाओं को मरीजों को लिखते है। जिस दवा की एमआरपी 110-120 रहती है, और मेडिकल स्टोर को 25-30 रुपये में मिलती है, वही दवा सबसे अधिक लिखी जाती है, अगर सरकारी के बड़े पर्चे पर दो दवा लिखी जाती है, तो प्राइवेट के छोटे पर्चे पर पांच-छह दवा लिखी जाती है, ताकि अधिक से अधिक कमीशन एमओआईसी और मेडिकल स्टोर के रमेश चौधरी को मिल सकें। यह मेडिकल स्टोर इस लिए बिना लाइसेंस के चल रहा है, क्यों कि डीआई भी हर माह पांच हजार ले जातें हैं। अपने चहेते मेडिकल स्टोर के रमेश चौधरी को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए एमओआईसी ने ‘उमेश पासवान’ और ‘नीरज चौधरी’ के मेडिकल स्टोर को डीआई से कहकर बंद करवा दिया। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी, कि रमेश चौधरी का मेडिकल स्टोर पीएचसी के दीवाल से बिलकुल सटा हुआ हैं, अब आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि जब बनरहा जैसी पीएचसी के एमओआईसी एक मेडिकल स्टोर से एक लाख महीना कमीशन लेते हैं, तो सीएमओ और डीआई पूरे जिले से कितना लेते होगें। बताया जाता है, कि यादवजी की जब बानपुर पोस्टिगं थी तो तब भी यह बनरहा पीएचसी आते थे, और अधिकांश समय बीताते थे, ताकि खुद और रमेष चौधरी को अधिक से अधिक माल कमवा सके। सीएमओ, डीआई, डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह और डा. एके चौधरी ने पूरे कुदरहा क्षेत्र को दवा माफियों के हवाले कर दिया। इसी लिए इस क्षेत्र में सबसे अधिक अवैध नर्सिगं होम, पैथालाजी, अल्टासाउंड और मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे है। मौतें और भू्रण हत्याएं भी सबसे अधिक इसी क्षेत्र में होती है। रही बात स्थानीय विधायक की तो इन्हें कमीशन के आलावा और कुछ नहीं दिखाई देता, इन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सबसे अधिक मौतें इन्हीं के जाति वाले और वोटर्स की होती है। आज तक इन्होंने एक भी पीएचसी और सीएचसी का निरीक्षण नहीं किया। कभी भी इन्होंने क्षेत्र के उन नर्सिगं होम और अवैध रुप से संचालित हो रहे पैथालाजी, अल्टासाउंड और मेडिकल स्टोर की जांच करने को नहीं लिखा। जो विधायक सड़क, पुलिया और गेट में फंसा हो, वह कैसे क्षेत्र के गरीब मरीजों की परेशानियों को समझेगा? ऐसा लगता है, कि मानो एमओआईसी की तरह इन्हें भी कमीशन मिलता हो। इस पिछड़े क्षेत्र में सबसे अधिक स्वास्थ्य चिकित्सा की आवष्यकता है। अगर विधायकजी इन्हें मरीजों को मारने वाले नर्सिगं होम के भरोसे छोड़ देगें, तो फिर इनके विधायक होने से गरीब जनता को क्या लाभ? इस क्षेत्र में एक तरह से स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गया है। इसके लिए जनता सबसे अधिक विधायक और सांसदजी को जिम्मेदार मान रही हैं।
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