मेरठ: कॉलेज ऑफ नर्सिंग, LLRM Medical College के द्वितीय सेमेस्टर के छात्र ने
विभाग: ENT वार्ड
में: Mr. अज़ीम के मार्गदर्शन में
छात्र/ छात्राओं
अम्बरीश कुमार प्रजापति,
अनश अंसारी,
अनिकेत प्रताप सिंह,
अनामिका सिंह, ने प्रस्तुति की।
क्या है हाइपरथर्मिया?
गर्मियों के बढ़ते तापमान के साथ हाइपरथर्मिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आता है। यह वह स्थिति है जब शरीर का तापमान सामान्य स्तर (लगभग 37°C) से अधिक हो जाता है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला तंत्र असफल हो जाता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह हीट स्ट्रोक का रूप लेकर जानलेवा भी बन सकता है।
हाइपरथर्मिया के प्रमुख कारण
अत्यधिक गर्म मौसम और लू (हीट वेव)
लंबे समय तक धूप में रहना
शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
भारी या तंग कपड़े पहनना
अत्यधिक शारीरिक श्रम या व्यायाम
बंद और बिना हवा वाले स्थान में रहना
कुछ दवाइयों का दुष्प्रभाव

पहचानें इसके लक्षण
हाइपरथर्मिया के लक्षण धीरे-धीरे या अचानक दिखाई दे सकते हैं:
शरीर का तापमान बढ़ना
अत्यधिक पसीना आना या पसीना बंद होना
चक्कर आना और सिरदर्द
कमजोरी, थकान और बेचैनी
मितली या उल्टी
तेज़ दिल की धड़कन
त्वचा का लाल और गर्म होना
भ्रम, चिड़चिड़ापन या बेहोशी
चेतावनी:
गंभीर स्थिति में यह हीट स्ट्रोक बन सकता है, जो आपातकालीन स्थिति है।
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
गर्मी के मौसम में थोड़ी सावधानी बड़े खतरे से बचा सकती है:
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक धूप में निकलने से बचें
हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें
सिर को ढककर रखें (टोपी/छाता)
ठंडी और हवादार जगह पर रहें
ज्यादा मेहनत वाले काम से बचें
ORS और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें
बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें
कब लें चिकित्सकीय सहायता?
यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम या लगातार उल्टी हो रही हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाएं। देरी करना खतरनाक हो सकता है।
निष्कर्ष
हाइपरथर्मिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली समस्या है। सही जानकारी, सतर्कता और समय पर उपचार से हम खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
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