बस्ती। निचली न्यायालयों की मनमानी और उनकी गलतियों को रोकने के लिए ही अपर न्यायालयों का गठन हुआ। कहा भी जाता है, कि अगर अपर न्यायालय न हो तो न जाने कितने पीड़ितों को न्याय से वंचित होना पड़ेगा। वैसे भी निचली न्यायालयों पर मनमानी और प़क्षपात करने का आरोप लगता रहता है। यह भी कहा जाता है, सबसे अधिक मनमानी और पक्षपात राजस्व न्यायालयों में ही होता है। यहां पर तो फैसले की बोली लगाने तक खबरे आती रही है। अगर ऐसा न होता तो जमीन किसी और की और निर्णय किसी और के पक्ष में हो रहा है। वैसे न्याय बिकने के मामले में चकबंदी न्यायालयों का कोई जबाव नहीं। बात हम यहां ग्राम भेलखा, तप्पा हवेली, परगना बस्ती पूरब व तहसील जिला बस्ती के आराजी संख्या 200/8.09200 हे. यानि लगभग सौ बीघा के तालाब की कर रहे थे, मत्स्य पालन के लिए तत्कालीन डीएम ने लालजी साहनी पुत्र घिसियावन मुख्य प्रवर्तक मत्स्य जीवी सहकारी समिति जिमिटेड विसौवा, क्षेत्र पंचायत मेहदांवल जनपद संतकबीरनगर के नाम किया। इसे लेकर जिलाधिकारी न्यायालय बस्ती में रामसागर आदि बनाम लालजी साहनी आदि के नाम से वाद संख्या/ 2582/2024 दायर हुआ। तत्कालीन डीएम ने दसे तकनीकी आधार पर चूक मानते हुए पटटे को खारिज कर दिया। इस आदेष के खिलाफ आयुक्त न्यायालय में लालजी साहनी बनाम राम सागर आदि के नाम से निगरानी दाखिल हुआ। निगरानी को पोषणीय मानते हुए कमिष्नर ने डीएम के पहली जनवरी 25 के आदेष पर स्थगन दे दिया। असली विवाद उस शुरु हुआ, जब रिंग रोड बनने लगा। इसके लिए भेलखा के तालाब से मिटटी निकाली जाने लगी। षिकायत हुई कि तालाब से आठ से दस फिट गहराई में मिटटी निकाली जा रही है, दसकोलवा में लगभग नौ फिट गहरी मिटटी निकाली जा रही है। गांव वालों का कहना है, कि तालाब से जो इतनी गहराई से मिटटी निकालील जा रही है, अगर भविष्य में कोई हादसा हो गया तो लोग डूब जाएगें। जबकि नियम दो से तीन फिट गहरा खोदने का है। खनन पाले भी कुछ नहीं बोल रहे हैं, इतना ही नहीं तालाब के किनारे लोडर से मेढ़बंदी भी की जा रही है। जब कि यह कार्य मनरेगा से होना चाहिए, गांव वालों ने बताया कि इसी बहाने मनरेगा के धन का दुरुपयोग हो सकता है। एडीएम ने कानूनगो को इस मामले में भेजा भी था, लेकिन कानूनगो मौके पर गए ही नहीं, यानि कानूनगो ने एडीएम के आदेष को मानने से इंकार किया। लेकिन एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह ने इस मामले को उचित फोरम में उठाने की बात कही है।