‘सीएम’ तक तो ‘फरियादी’ जा ‘चुका’, अब कहां ‘जाएं’?

बनकटी/बस्ती। जनपद बस्ती के विकासखंड बनकटी अंतर्गत ग्राम बखरिया निवासी राजकुमार मिश्र अपनी जमीन बचाने के लिए महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल सका है। अवैध कब्जे, धमकी और उत्पीड़न से त्रस्त पीड़ित ने आखिरकार सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि उनकी निजी भूमि गाटा संख्या 13 पर गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा खुलेआम अवैध कब्जा किया जा रहा है। जमीन पर टीनशेड रखकर निर्माण कार्य कराया गया, जबरन रास्ता बनाया गया, मिट्टी गिराकर सड़क पाट दी गई और अवैध रूप से नाली भी खोद दी गई। विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी जाती है। राजकुमार मिश्र का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले लालगंज थाने में शिकायत की थी। शिकायत के बाद थाना प्रभारी स्वयं मौके पर पहुंचे और निरीक्षण भी किया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि निरीक्षण के बाद भी कब्जा हटाने अथवा दोशियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जिससे दबंगों के हौसले और बढ़ गए। जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। हालांकि वह शिकायत अभी भी प्रक्रिया में है और समस्या जस की तस बनी हुई है। न्याय की आस में भटक रहे पीड़ित ने अंततः सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि भूमि की सुरक्षा के लिए लगाए गए तार को भी उखाड़ दिया गया, जिससे लगभग 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ। इतना ही नहीं, गांव की बंजर भूमि पर भी कथित रूप से अवैध निर्माण कर कब्जा किए जाने की शिकायत की गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतकर्ता थाने से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक अपनी फरियाद पहुंचा चुका है, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि शिकायत में सत्यता है तो जिम्मेदार विभाग अब तक मौन क्यों हैं? और यदि शिकायत निराधार है तो इसकी स्पष्ट जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? अब सम्पूर्ण समाधान दिवस में मामला पहुंचने के बाद लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह है कि पीड़ित को आखिरकार न्याय मिलता है या फिर उसकी फरियाद सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती है।