बस्ती। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यो की जांच करने के लिए आने वाले वाले विधानसभा पंचायती राज समिति के आवभगत और उपहार देने के नाम पर जिले के एक-एक सचिव से ब्लाकों के एनआरपी के जरिए तीन-तीन हजार के दर से लगभग छह लाख वसूले गए, यह पैसा पंचायती विभाग को दिया गया। समिति के 25 सदस्यों की टोली को 18 और 19 मार्च को विभिन्न ग्राम पंचायतों में जाकर निर्माण कार्यो का स्थलीय निरीक्षण करना था, ताकि जिले के विकास कार्यो का सच समिति के 25 सदस्यों को पता चल सके। समिति के आने से पहले उनके स्वागत और उन्हें कोई दिक्क्त न हो तो इस लिए उन लोगों के लिए बड़े और मंगिे होटल का इंजाम किया गया, सारी व्यवस्था हो गई, होटल और उपहार के लिए पैसा कहां से आएगा, इसके लिए सचिवों को निषाना बनाया गया, सचिवों ने प्रधानों को निशाना बनाया, इस तरह सचिवों और प्रधानों ने मिलकर छह लाख दिया, पैसा पंचायती विभाग को पहुंच भी गया, इंतजाम भी हो गया, लेकिन अचानक समिति के आने का कार्यक्रम स्थगित हो गया। होना तो यह चाहिए था, कि जो पैसा सचिवों से लिया गया, ईमानदारी से उसे वापस कर देना चाहिए, चूंकि पंचायत विभाग में वापसी की परम्परा नहीं है। जाहिर सी बात हैं, कि कार्यक्रम स्थगित होने का लाभ सबसे अधिक पंचायत विभाग के अधिकारियों को मिला होगा। अगर किसी विभाग के अधिकारी को बिना कुछ किए छह लाख मिल जाता है, तो यह तो उनके लिए लाटरी लगने जैसी होती है। हालांकि विभाग अगर चाहता तो समिति के सदस्यों का इंतजाम सरकारी गेस्ट हाउस में भी करवा सकता था, लेकिन ठहरे माननीय, इस लिए अधिकारियों ने सोचा होगा कि कोई कमी न रह जाए, इस लिए इनकी होटल में व्यवस्था की जाए, और फिर कौन अधिकारियों को वेतन से व्यवस्था करना था। अधिकारियों ने इन्हें एक अवसर माना। यह पहली बार नहीं हैं, जब समिति और जांच के नाम पर धन की उगाही की गई, चूंकि इसके लिए कोई सरकारी बजट होता नहीं हैं, इस लिए वसूली ही एक मात्र जरिया जा सकता है। यह भी कई बार देखा गया, कि खर्चा को कम था, लेकिन वसूला अधिक गया। जाहिर सी बात हैं, कि जिन सचिवों/प्रधानों ने छह लाख दिया होगा, वह भी कोई गेहूं बेचकर तो दिया नहीं होगा, उसमें भी उस विकास के नाम पर भ्रष्टाचार किया होगा, जिसकी जांच के लिए समिति आने वाली थी। जब इस मामले में कई प्रधानों और सचिवों से बात की गई, और उनसे पूछा गया कि आखिर क्यों आप लोग आवभगत और उपहार के नाम पर इतना पैसा देते हैं, और कहां से देते हैं? जानकार हैरानी होगी कि एक ने भी यह उगाही का विरोध नहीं किया, और न यह बयान दिया कि जबरिया वसूली की जा रही है। विधानसभा पंचायती राज समिति के माननीयों को भी यह सोचना और सवाल करना होगा, कि आखिर विभाग इतना शानदार आवभगत और उपहार कहां से दे रहा हैं? सदस्यों को होटल में ठहरने से सीधा इंकार कर देना चाहिए, और कहना चाहिए कि हम तो सर्किट हाउस में रहेगें। समिति के माननीय सदस्यों को भी आइडिएल बनने की आवष्यकता है।
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