बस्ती। कथित गांजा तस्कर दीपक चौहान को नगर पंचायत हर्रैया के लिए सभासद मनोनीत करने का मामला अभी चल ही रहा था कि इसी नगर पंचायत में एक और कथित स्मैक तस्कर रवि गुप्त को सभासद मनोनीत करने का सनसनीखेज मामला सामने आ गया।  एक गांजा तस्कर तो दूसरा स्मैक तस्कर, दोनों समाज और सरकार के दुष्मन, और भाजपा वालों ने ऐसे लोगों को सभासद मनोनीत करवा दिया, जिनका न तो कोई राजनैतिक बैक ग्राउंड और न समाज में कोई इज्जत। ऐसे लोगों ने कभी भी भाजपा की मदद भी नहीं की होगी, नेताओं को भले ही आर्थिक मदद कर दी हो, लेकिन वोट से नहीं किया होगा, क्यों कि ऐसे लोगों के पास वोट नहीं होता, बल्कि पैसा होता है, और वह पैसा नवयुवकों को नषे की लत लगाकर बनाया गया। इस तरह के लोगों से जहां समाज का सभ्य वर्ग दूर रहना पसंद करता वहीं भाजपा वाले ऐसे लोगों को गले लगाते हैं, उन्हें फूलों की माला पहनाते। इन दोनों के सभासद मनोनीत करने से यह तो साबित हो चला कि इन दोनों को मनोनीत करने पर मोहर लगाने से पहले किसी ने भी इन दोनों की पृष्टि भूमि को नहीं देखा, यह तक नहीं देखा कि अगर गांजा तस्कर भाजपा के सभासद के रुप में बोर्ड की बैठक में भाग लेगा, तो उस बोर्ड की गरिमा का क्या होगा? समाज और पार्टी के कार्यकर्त्ता क्या कहेंगे? अब आप लोगों को दूसरे मनोनीत सभासद रवि गुप्त के बारे में बताने जा रहे हैं, इनका ‘महाकाल टी सेंटर’ के नाम से हर्रैया में दुकान चलता है। यह वही दुकान है, जिसे गांजा और स्मैक का हेड आफिस कहा जाता है। माल पहले इसी दुकान पर आता है, उसके बाद कहीं और जाता है। कहा तो यहां तक जाता है, कि अयोध्या एअर पोर्ट से जितनी भी इंटरनेशनल हवाई जहाज आती हैं, और जिसके अधिकतर गांजा और स्मैक के तस्कर होते हैं, और जो बिहार तक जाते हैं, उनके टैक्सी का पहला पड़ाव ‘महाकाल टी सेंटर’ पर ही होता है। इसकी जानकारी पुलिस को भी है। इस ‘महाकाल टी सेंटर’ पर इतनी बड़ी मात्रा में गांजा और स्मैक का कारोबार होता है, कि इससे जुड़े लोग कुछ ही दिनों में करोड़ों के मालिक हो जाते हैं, इसी में दीपक चौहान, रवि गुप्त और हुड़वा कुंवर के बाबू साहब जैसे लोगों का नाम षामिल है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि भाजपा में जब गांजा और स्मैक तस्कर सभासद रहेगें तो कौन भाजपा को वोट देगा? खासबात यह है, कि दीपक चौहान को भी यहीं का प्रोडक्ट कहा जाता है। भले ही दीपक आज लक्जरी वाहनों का काफिला और आलीषान बगंले का मालिक बना हैं, लेकिन रवि गुप्त भी दीपक चौहान से कम हैसियत नहीं रखते। दोनों का परिवार मुफलिसी में रहा, लेकिन आज दोनों गलत रास्ते पर चलकर बड़े आदमी कहलाते है।

बताते हैं, कि इन दोनों के गुरु ‘हुड़रा कुंवर के एक बाबू साहब’ है। कहते हैं, कि इन्होंने ही इन्हीं दोनों सभासदों को मनोनीत करवाया। बाबू साहब, बड़े माननीय के खास माने जाते हैं, और यह कभी अपने कार पर ‘सांसद’ प्रतिनिधि नहीं बल्कि सांसद लिखवाकर चलते थे, इससे पहले यह छोटे माननीय के साथ रहे हैं, और यह तब भी ‘विधायक’ लिखवाकर गाड़ी से चलते है। इन्हें नकली प्रतिनिधि कहलाना या वाहनों पर लिखवाना पसंद नहीं है। इन्हें अगला ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को भी कहा गया है। छोटे माननीय को जब यह पता चला कि यह गांजा तस्करों के सरगना है, तो इन्हें अपनी गोल से अलग कर दिया। एक खास बात और है, पहले दीपक चौहान, बाबू साहब के लिए कैरियर का काम करता था, लेकिन जब इसने देखा कि इस धंधें में माल बहुत हैं, तो खुद ‘बास’ बन गया। यह दोनों गांजा तस्कर कब भाजपा में षामिल हो गए, क्षेत्र के बड़े-बड़े भाजपा नेताओं को भी पता नहीं चला, यह दोनों भाजपा के सदस्य हैं भी कि नहीं इस पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्यों कि भाजपा ऐसे गांजा और स्मैक तस्करों को पार्टी का हिस्सा नहीं बनाती। अगर दोनों गांजा तस्कर नगर पंचायत हर्रैया के लिए सभासद मनोनीत किए गए हैं, तो कोर कमेटी के सदस्य के रुप में स्थानीय विधायक पर भी सवाल उठ रहे है। कहा जाता हैं, कि स्थानीय विधायक से इस मामले में कोई भी राय नहीं ली गई, अगर ली गई होती तो असहमति होती। अगर कोर कमेटी ने बायोडाटा का ही सत्यापन करा लिया होता तो दोनों गांजा तस्करों की सच्चाई का पता चल जाता। हर्रैया का बच्चा-बच्चा जानता है, कि दोनों का असली कारोबार गांजा और स्मैक है। यह भी लोग अच्छी तरह जानते हैं, कि इसका सरगना कौन बाबू साहब है। यह पहली बार देखा गया है, कि भाजपा ने ऐसे दो सभासदों को मनोनीत किया, और जिनका संबध गांजा और स्मैक के कारोबार से है। गांजा और स्मैक के तस्करों को भाजपा के जिम्मेदारों ने सभासद मनोनीत करवाकर एक बार फिर साबित कर दिया, कि पार्टी के खाटी कार्यकर्त्ताओं की कोई आवष्यकता नहीं, चाहंे तो वह पाला बदल सकते है। कोर कमेटी के लोगों ने जिस तरह गांजा और स्मैक का कारोबार करने वाले बड़े लोगों को सम्मान दिया, और कार्यकर्त्ताओं को हर बार की तरह इस बार भी दरकिनार किया, उससे 2027 में पार्टी को ढूढ़े कार्यकर्त्ता नहीं मिलेगें। आखिर कार्यकर्त्ता कब तक उपेक्षा बर्दास्त करता रहेगा।