गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) गढ़मुक्तेश्वर विकासखंड के गांव ठेरा बहावपुर में विकास के सरकारी दावों की धज्जियां उड़ चुकी हैं। ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की घोर लापरवाही और उदासीनता के कारण पूरा गांव इस समय नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। गांव के मुख्य रास्तों पर घुटनों तक भरा गंदा पानी और जगह-जगह लगे गंदगी के अंबार ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्राम प्रधान और सचिव की अकर्मण्यता का सबसे बड़ा खमियाजा मासूम स्कूली बच्चों और मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है। हर दिन बच्चे इसी बदबूदार और संक्रामक पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं,जिससे हमेशा किसी गंभीर बीमारी या हादसे का खतरा बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के विकास के लिए आने वाले फंड का सही इस्तेमाल करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि आंखें मूँदे बैठे हैं।

ग्रामीण प्रमोद, यशपाल और नितिन शर्मा ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि इस समस्या को लेकर छह महीने पहले तहसील प्रशासन से लेकर जिलाधिकारी तक को लिखित रूप से अवगत कराया गया था। हद तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर की गई शिकायतों को भी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।

छह महीने बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई सुधार नहीं हुआ,जिससे साफ झलकता है कि उच्चाधिकारियों के आदेशों को भी यहाँ ताक पर रख दिया जाता है।प्रशासनिक निष्क्रियता और ग्राम प्रधान की तानाशाही से तंग आकर ग्रामीणों ने नितिन शर्मा के नेतृत्व में ग्राम प्रधान और तहसील प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया है और जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया,तो गांव के महिला और पुरुष भारी संख्या में गढ़मुक्तेश्वर तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। ग्रामीणों का कहना है। कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी स्वयं स्थानीय प्रशासन और संबंधित ग्राम विकास विभाग की होगी।