बस्ती। सीएमओ डा. राजीव निगम, डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह एवं डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनका एमओआईसी मारा जा रहा या फिर एमओआईसी का बच्चा पीएमसी के डाक्टरों की लापरवाही से मर जाता है। इन लोगों को इस बात का भी फर्क नहीं पड़ता कि इनके ही लोग पीठ पीछे इनके बारे अपशब्दों का इस्तेमाल करते है, भ्रष्टाचारी और मरीजों की मौत का सौदा करने वाला तक कहते है। इन्हें न तो अपनी इज्जत की चिंता और न विभाग की छवि खराब होने का अफसोस। अब जरा अंदाजा लगाइए कि पूर्व डिप्टी सीएमओ डा. सीएल कन्नौजिया का बेटा एवं सल्टौआ के एमओआईसी डा. अमित कन्नौजिया, डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह के कारण अमित हास्पिटल अल्टासाउंड एवं सेंटर के पिता और पुत्र सहित अन्य लोग मारते पीटते हैं, और जब कार्रवाई की बारी आता है, तो एमओआईसी कप्तानगंज के मामले की तरह चुप हो जाते है। घटना हुए लगभग एक सप्ताह हो जा रहे हैं, लेकिन अभी तक अस्पताल को सील तक नहीं किया, जबकि यह अस्पताल बिना किसी प्रमाण-पत्र और पंजीयन के सालों से चल रहा है। एक सीएमओ का एमओआईसी मारा-पिटा जाता है, और सीएमओ का खून नहीं खौलता और न गुस्सा ही आता है। क्या यही एक सीएमओ का अपने अधीनस्थ के प्रति प्रेम है। पीएमएस के लोगों का भी इस बात का गुस्सा नहीं आया कि उनका साथी मारा गया, और सीएमओ ने कोई कार्रवाई नहीं किया। गुस्सा भले ही चाहें सीएमओ और डा. एसबी सिंह को नहीं आया, लेकिन पूर्व डिप्टी सीएमओ डा. सीएल कन्नौजिया को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने सीएमओ से स्पष्ट कह दिया कि अगर आप लोग अवैध रुप से संचालित हो रहे अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते तो मेरे बेटे का तबादला कर दीजिए। एमओआईसी ने घटना की पूरी जानकारी दिया और यह भी लिखा कि उनके साथ किसके कारण दुर्व्यवहार किया गया, उन्होंने स्पष्ट रुप से डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह का नाम लिया। इस पर भी सीएमओ का दिल नहीं पिघला और कहा कि ऐसे माहौल में अगर तबादला कर देते हैं, तो संदेष गलत जाएगा। सीएमओ को इस बात की परवाह नहीं कि उनके द्वारा कार्रवाई न करने से क्या संदेष जा रहा है, उन्हें तो इस बात की परवाह है, कि अगर तबादला कर दिया तो इससे गलत संदेष जाएगा, अब सीएमओ को कौन समझाने जाए कि एक डिप्टी सीएमओ के कारण एमओआईसी को मारा पिटा गया, इससे बड़ा गलत संदेष और क्या जाएगा? खुदा न खास्ता अगर यही घटना डिप्टी सीएमओ के साथ घटती तो क्या सीएमओ चुप रहते? पीएमएस के लोग भले ही चुप रहते, लेकिन सीएमओ चुप नहीं रहते। डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह इस लिए बच गए, क्यों कि उनकी ससुराल सल्टौआ के संसारपुर पिपरा में पूर्व ब्लॉक प्रमुख के घर में है। यह रहने वाले तो बस्ती जनपद के हर्रैया के हैं, लेकिन इन्होंने अपना पता अयोध्या का दिया, एक साजिष के तहत इन्होंने स्थाई पता अयोध्या का दिया, ताकि बस्ती में रहकर मलाई काटा जा सके। ससुराल होने का लाभ यह खूब उठा रहे हैं, सल्टौआ और भानपुर में जितने भी अवैध रुप अस्पताल संचालित हो रहे हैं, उसका कारण डा. एसबी सिंह को माना जा रहा है। जिले में जितने भी बाबू साहब नेता है, उन्हें यह अपना रिष्तेदार बताते है, और इन्हीं बाबू साहब नेताओं के चलते यह जिले भ्रष्टाचार फैला रहें है। इसी तरह रुधौली क्षेत्र में जितने भी अल्टासाउंड, पैथालाजी एवं एक्सरे अवैध रुप से संचालित हो रहे हैं, उसके लिए डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी को जिम्मेदार माना जा रहा है। क्यों कि इनका अस्पताल इसी क्षेत्र में हैं, और रहने वाले भी यहीं के है। अनेक एमओआईसी और डाक्टर कहते हैं, कि कौन नहीं जानता कि सीएमओ, डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी और डा. बृजेष षुक्ल जिले को लूट रहे हैं, लेकिन इन लोगों के भीतर इतना तो संवेदषीलता होना चाहिए, कि अपनों के जख्मों पर मरहम रख सके। पूर्व डिप्टी सीएमओ डा. कन्नौजिया कहते हैं, कि इससे पहले कभी भी सीएमओ पर इतना गंभीर आरोप नहीं लगा, कहते हैं, कि कम से कम सीएमओ और डा. एसबी सिंह को अपने एमओआईसी के मान-सम्मान की तो चिंता करनी ही चाहिए। इन्होंने पीएमएस को मुर्दा करार दिया।