बस्ती। जब पैसा देकर लोग सभासद मनोनीत होगें, तो उसमें गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर भी होगें। भाजपा के लोग अगर गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर को सभासद मनोनीत करते रहेगें तो समाज में पार्टी की छवि कैसी बनेगी, इसे आसानी से समझा जा सकता है। भाजपा जिलाध्यक्ष एक गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर को माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं, और उसका फोटो भी वायरल कर रहंे है। सवाल उठ रहा है, कि क्या भाजपा जिलाध्यक्ष को यह नहीं मालूम कि जिसे वह माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं, वह गांजा तस्कर और बस्ती सहित पास पड़ोस के जिलों में गांजा तस्करी के कई मुकदमे दर्ज भारतीय जनता पार्टी जिस तरह नगर पंचायतों और नगर पालिका में भाजपा के सभासद मनोनीत किए गए, उससे अनेक सवाल खड़े हो रहे है। जिन लोगों ने गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर का नाम मनोनीत किया, क्या उन्हें यह मालूम हैं, कि उनकी टीम में गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर भी शामिल है। जाहिर सी बात हैं, कि गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर का चयन उनकी योग्यता को देखकर तो किया नहीं गया होगा, अवष्य इसके पीछे पैसे का खेल चला होगा। वरना, गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर का नाम चयन नहीं होता। जिस गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर को नगर पंचायत हर्रैया के लिए सभासद मनोनीत किया गया, उसका नाम दीपक चौहान है, और इसके खिलाफ बस्ती सहित पास पड़ोस के जिलों में गांजा तस्करी के कई मुकदमे दर्ज है। इसे नेताओं की मेहरबानी कहें या पैसे का खेल, दीपक चौहान, गांजा तस्कर से अचानक माननीय बन गए। पुलिस की निगाह में गांजा तस्कर से सभासद हो गए। अब जरा अंदाजा लगाइए कि बोर्ड की बैठक में अगर महिला सभासदों के बगल में गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर बैठेगा तो बोर्ड की क्या गरिमा रह जाएगी।
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