बस्ती। चौंकिए मत, वैसे तो भ्रष्टाचार के मामले में कुदरहा के बीडीओ बहुत नाम कमा चुके हैं, और अब इनका नाम वोटर लिस्ट को सही और गलत कराने वाले ठेकेदार के रुप में शामिल हो गया। इतना बड़ा एसआईआर का कार्य बीएलओ ने अधिकारियों के साथ मिलकर पूरा किया। उनकी शायद ही कहीं से कोई शिकायतें आयी हों। लेकिन जब यह त्रिस्तरीय पंचायत की वोटर लिस्ट सही करने लगते हैं तो वोट का खेल करने वालों में खलबली मच जाती है।  बीएलओ को डराने धमकाने से लेकर बदलवाने का खेल शुरू कर देते हैं। ग्राम पंचायत की सत्ता में बने रहने के लिए वह अपने अनुसार वोट की गोट बैठाना चाहते हैं। जो हर बीएलओ करने को तैयार नहीं होता है। अधिकारी भी इनके साथ नहीं खड़ा होना चाहते हैं। लिफाफे के वजन के तले निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता दबा दी जाती है। यह हर पंचायती चुनाव में होता है। यदि आप लिफाफा देने में सक्षम है तो समझो आपका काम होगा। कुदरहा के बीडीओ आलोक कुमार पंकज ने तो इस कार्य का ठेका ही ले रखा है। ग्राम पंचायत के वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के अनुरुप बस पैसा दीजिए। बीएलओ और सुरवाईजर को तो यह दो मिनट में ठंडा कर देते हैं । जो ज्यादा ईमनादरी का पाठ पड़ता है । उसका ऐसा ईलाज करते हैं कि स्वेच्छा से पद छोड़ने को तैयार हो जाता है। ब्लाक के अकेला कुबेरपुर का बीएलओ भी इसी का शिकार हुआ। रोजगार सेवक ने जब ईमनादरी दिखानी शुरु की तो वोट के खेल से सत्ता हासिल करने वालों में खलबली मच गई। प्रधान ने उसे राजनीति पकड़ और लिफाफे के बल पर हटवा दिया । बिना आरोप सिद्ध हुए आचानक हटाए जाने की जब बीएलओ धर्मराज ने उच्च अधिकारियों से शिकायत करना शुरू किया तो बीडीओ साहब आग बबूला हो गए। दोबारा किसी के सामने मुख खोलने पर नौकरी से बाहर निकालने की भी धमकी दी। इतना ही नहीं एक पत्र पर यह भी लिखा कि मै स्वेच्छा से बीएलओ पद से इस्तीफा दे रहा हूं। सोचने वाली बात है कि जो कर्मचारी अकारण पद से हटाए जाने की कल तक शिकायत मीडिया व अधिकारियों से कर रहा था वह अचानक कैसे बदल गया। यही हाल सुपवाईजर अजय कुमार के भी साथ हुआ। गांव के लोगों का कहना है कि सुपवाईजर अजय कुमार उनके सामने ही एसडीएम सदर से शिकायत करने पहुंचे थे कि बीडीओ कुदरहा 50 नाम छोड़ने के लिए दबाब बना रहे हैं। जबकि यह नाम दावा आपत्ति मे शामिल नहीं है। इसे जमा करने का समय 31 दिसंबर ही था। वहीं ब्लाक पर पहुंचने के बाद भला कैसे परिवर्धन सूची पर हस्ताक्षर कर देते है। यह जादू तो कुदरहा बीडीओ साहब ही बता सकते हैं कि वह कौन सा मंत्री देते हैं पल भर में बदलना पड़ता है। संतोष चौहन सहित अन्य ग्रामीण एडीएम से शिकायत कर कहा कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने के लिए प्रधान के करीबी बाबू राम और रामप्रीत ने बीएलओ को बदलवाया है। वह अपने अनुसार सूची बनने के लिए मोटी रकम भी बीडीओ को दिए है। ईजरगढ़ की रोजगार सेवक रंजना यादव को बीएलओ और एडीओ आईएसबी देवेंद्र यादव और ग्राम पंचायत सचिव महेन्द्र यादव को जांच अधिकारी नामित कर ब्लाक पर मनमर्जी सूची तैयार की गई है। यह सब काम बीडीओ के कहने पर किया गया है। शिकायतकर्ता ने कहा कि जिनकी उम्र निर्धारित तिथि को 18 वर्ष नहीं हो रही है उसका भी नाम परिवर्धन सूची मे डाला गया है। इनके आधार पर यहां का पता और राशन कार्ड है उनका भी नाम नई सूची में विलोपित कर दिया गया है। शिकायतकर्ता ने एडीएम से नई सूची न जमा कराने की मांग कराते हुएं मामले का जांच कराने का अनुरोध किया है। उसका कहना है कि सुपरवाई के नंबर का सीडीआर निकाल लिया जाए तो बीडीओ और प्रधान के करीबियों के फोन काल की भरमार मिलेगी ।