बस्ती। सीजेएम न्यायालय से अनूप खरे बनाम केके सिंह मामले में अनूप खरे और दिप्ती खरे के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ। यह एनबीडब्लू अदालत में गैर हाजिर होने के कारण जारी हुआ, हालांकि उस दिन दोनों की ओर से हाजीरी माफी की दरखास्त दी गई, थी, चूंकि उस दिन न्यायालय के द्वारा आरोप पत्र बनना था, इस लिए सीजेएम ने हाजरी माफी के दरखास्त को रिजेक्ट करते हुए एनबीडब्लूडी जारी कर दिया। इसी मामले में दिव्याषुं खरे भी मुजरिम हैं, चूंकि यह हाजिर हो गए, और इनका आरोप पत्र तय हो गया, इस लिए इनके खिलाफ एनबीडब्लूडी जारी नहीं हुआ। सवाल उठ रहा है, कि जब एक ही तारीख को तीनों को उपस्थित होना था, और उस दिन तीनों के खिलाफ आरोप पत्र बनना था, तो क्यों सिर्फ दिव्याशु खरे तारीख पर आए, और क्यों नहीं अनूप खरे और दिप्ती खरे आए। ‘कृष्ण कुमार सिंह’ ने चाचा-भतीजा पर नौकरी के नाम पर 38 लाख की ठगी करने का आरोप लगाकर न्यायालय से न्याय की गुहार लगाई है। सीजेएम के यहां से दोनों को समन भी जारी हुआ, जिस पर दोनों को जमानत भी करानी पड़ी। इसी मामले में नौ अप्रैल 26 को तारीख थी, और इसी दिन तीनों के खिलाफ आरोप-पत्र बनना था, चूंकि आरोप-पत्र बनने के दौरान मुल्जिम को न्यायालय में उपस्थित रहना आवष्यक होता है। लेकिन अनूप खरे और दिप्ती खरे हाजिर नहीं हुई, और दिव्याशु खरे हाजिर हो गए। चेक बाउंस के मामले में अनूप खरे के साथ में उनकी भाभी दिप्ती खरे को पार्टी बनाया गया है। सीजेएम न्यायालय में दो मुकदमें कायम किए गए, एक में केके सिंह पुत्र शमसेर सिंह बनाम अनूप खरे और उनकी भाभी दीप्ति खरे और दूसरे में केके सिंह बनाम दिव्यांशु खरे पुत्र आशीष खरे का है। दिव्याशु खरे के मामले में 23 लाख और अनूप खरे के मामले में 15 लाख का मामला है।

दाखिल मुकदमें में कहा गया है, कि दिव्यांशु खरे और इनके सगे चाचा अनूप खरे जो कई विधालयों के प्रबंधक हैं, एवं भाजपा के कदावर नेता भी है। अनूप खरे की पत्नी सीमा खरे नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ चुकी है। कहा कि विपक्षी के चाचा का सीबीएससी इंटर मीडिएट तक का विधालय जो द सीएमएस के नाम से है। चूंकि हमारा ठेका-पटटी का भी काम होता है, जिसके चलते अनूप खरे से काफी अच्छा संबध रहा। चुनाव में हम और हमारा लड़का खूब प्रचार किया। लिखा कि चाचा ने हमारे लड़के की नौकरी लगाने के नाम पर 38 लाख की मांग कीं, चुनाव बाद नौकरी लगवाने की बात कही, भरोसा करके 29 अक्टूबर 24 को दिव्यांशु खरे के खाते में आरटीजीएस के जरिए दस लाख भेज दिया। कहा कि जो हमने दस लाख दिया, वह अपने दोस्तों और शुभचिंतकों से उधार लेकर दिया। लिखा कि जब इनकी पत्नी चुनाव हार गई, तो पार्टी में इनकी पकड़ कमजोर हो गई, इसी लिए यह न तो लड़के को नौकरी दिला सके और न पैसा ही वापस किया। कहा कि जब काफी दबाव बनाया तो 18 अगस्त 25 को 23 लाख का चेक दिया, अवशेष 15 लाख का चेक अनूप खरे ने दिया। लिखा कि जब हम 18 और 19 सितंबर 25 को बैंक में चेक डाला तो पता चला पर्याप्त धन न होने के कारण चेक बाउंस हो गया, जब इसकी जानकारी विपक्षी को दी गई, तो उन्होंने 24 सितंबर 25 को पुनः चेक लगाने को कहा, लेकिन 25 सितंबर को फिर पता चला कि खाते में पैसा न होने के कारण चेक दूसरी बार बाउंस हो गया। जिसकी जानकारी फिर विप़क्षी को देना चाहा, तो फोन नहीं उठाया, पुनः 25 को चेक डाला, लेकिन तीसरी बार 30 सितंबर 25 को भी चेक डिस्आनर हो गया। लिखा कि मजबूर होकर विप़क्षी को तीन अक्टूबर 25 को लीगल नोटिस भेजा, नोटिस तो ले लिया, लेकिन समय अवधि बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया, और न ही नोटिस का कोई जबाव दिया। तब इसे सीजेएम के यहां परिवाद दाखिल हुआ। जिसमें दिव्यांशु खरे से 23 लाख मय ब्याज सहित वापस दिलाने की मांग न्यायालय से की गई। इस पर न्यायालय की ओर से पहले सम्मन जारी हुआ, जिसमें दोनों को जमानत करवानी पड़ी। इसी तरह का एक अन्य मुकदमा अनूप खरे और उनकी भाभी दीप्ति खरे बनाम केके सिंह के नाम से दाखिल हुआ। इसमें भी वही बाते कही गई, न्यायालय से इस मामले में अनूप खरे से 15 लाख मय ब्याज के वापस दिलाने की मांग की गई, इसमें भी सम्मन जारी हुआ और जमानत करानी पड़ी। अब इसी मामले में अनूप खरे और दिप्ती खरे के खिलाफ सीजेएम ने गैर जमानती वारंट जारी किया। अब अगली सुनवाई 20 अप्रैल 26 को है।