बस्ती। मीडिया में इधर कुछ दिनों से जिस तरह उप निदेशक कृषि ओर जिला कृषि अधिकारी के द्वारा ढ़ैचा, हरी खाद और धान बीज में हुए घोटाले की खबरे निकल रही है, और जिसके लिए कृषि मंत्री को सीधा जिम्मेदार माना जा रहा है, उसे देखते हुए मंत्रीजी ने अधिकारियों से वितरण की सूची मांगी है। इसे लेकर एक दिन पहले रात्रि में उप निदेशक कृषि कार्यालय में जिला कृषि अधिकारी एवं घोटाला करने वाले बीज गोदाम प्रभारियों की आपातकालीन बैठक हुई, और कैसे डैमेज कंटोल हो पर मंथन हुआ, पहले तो खबर लिखने वाले पत्रकार को मैनेज करने का प्रयास किया, जब उसमें सफल नहीं हुए तो इस बात पर निर्णय हुआ कि जो मिनी किट किसानों को वितरण करने के लिए आया है, उसे लेकर स्टोर प्रभारी गांव-गांव जाएगें और किसानों को मिनी किट देते हुए कहगें कि सरकार ने आप लोगों को यह किट निःशुल्क दिया ताकि पैदावार बढ़ सके। गांव-गांव जाकर मिनी किट देने के पीछे की मंशा को अगर आप जान जाएगें तो समझ जाएगें िकइस विभाग में एक से एक बढ़कर दिमागदार घोटालेबाज हैं। गांव-गांव जाकर किसानों को मिनी किट देने की मंशा इसी बहाने किसानों से बायोमेटिक पर अगूंठा लेने का है, ताकि इसी बहाने ढ़ैचां हरी खाद और धान बीज वितरण का होना दिखाया जा सके, चूंकि मशीन से अभी खारिज नहीं किया गया, और मशीन में स्टाक दिखा रहा है। जैसे ही मिनी किट देने के बहाने मशीन पर अगूंठा लगाएगें, वैसे इसी आड़ में उन ढ़ैचा, हरीखाद और धान की बीज को भी खारिज कर दिया जाएगा। अब किसानों को क्या मालूम कि मिनी किट के बहाने उन्हें ठगा जा रहा है। अब आप समझ गए होगें कि रात्रि आठ बजे क्यों आपातकालीन बैठक बुलाई गई। इसी लिए बार-बार कहा जाता कि मीडिया को अपना काम करते रहना चाहिए, वैसे भी आजकल मुख्यालय स्तर पर मीडिया की खबरों की गहन समीक्षा हो रही है। भाजपा कार्यालय में भी भाजपा के नेताओं के बारे में छपने वाली खबरों की मानिटरिगं हो रही है। भले ही स्थानीय नेताओं पर इसका कोई प्रभाव न पड़े, अगर प्रभाव पड़ता तो मीडिया को गाली और दलाल नहीं कहते है। कृषि विभाग के कुछ लोगों का यह भी कहना है, कि इसी बहाने मंत्रीजी अधिकारियों का दोहन करेगें। कहना गलत नहीं होगा डैमेज कंटोल के बहाने मंत्रीजी दिपावली का जमकर प्रसाद खाना चाहते हैं। बार-बार कहा जा रहा है, कि अगर 2027 में भाजपा की सरकार नहीं बनी तो इसके लिए सबसे अधिक कृषि मंत्री को ही जिम्मेदार माना जाएगा, क्यों कि उनके ही कार्यकाल में सबसे अधिक किसानों का उत्पीड़न और शोषण हुआ।
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