बस्ती। जब भी नगर पंचायत भानपुर का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें यह अवष्य लिखा जाएगा, कि जिस नगर पंचायत का गठन ही नहीं हुआ, वह नगर पंचायत आदर्श नगर पंचायत बन गया, इस आदर्श के नाम पर आए करोड़ों रुपये का जिस तरह बंदरबांट किया गया, उसे भी इतिहास में लिखा जाएगा। जिस तरह वर्तमान और पूर्व के विधायकों और उनके ठेकेदारों ने नगर पंचायत को लूटा उन लोगों का भी नाम प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रुप से लिखा जाना चाहिए। जिन नेताओं और जिनके ठेंकेदारों ने लूटपाट किया, उन्हें क्षेत्र की जनता पहचान चुकी है, और अब उन्हें वह सम्मान कभी नहीं मिलेगा जो पहले मिलता था, अब तो लो यही कहेगें कि देखों चोर जा रहा हैं। इस नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का आलम यह है, कि पीडब्लूडी की सड़क पर धन का दुरुपयोग करने के लिए इंटरलाकिगं बिठछा दिया, अब जरा अंदाजा लगाइए जिस सड़क की मालिक पीडब्लूडी हैं, उससे पूछा ही नहीं गया और डेढ़ किमी. तक इंटरलाकिगं बिछा दिया, इससे बड़ा भ्रष्टाचार का सबूत और क्या मिलेगा। जिस सड़क के मरम्मत पर पीडब्लूडी ने हालही में खर्चा किया, उस पर इंटरलाकिगं बिछा दिया, क्या इतना बड़ा भ्रष्टाचार, ईओ, जेई और प्रशासक सीआरओ को नहीं दिखाई दिया, अगर नहीं दिया तो क्यों नहीं दिखाई दिया? जनता यूंही नहीं कहती  िकइस नगर पंचायत में 20 करोड़ खर्च हो गया, और जनता को टूटी -फूटी सड़कें और टूटा-फूटा नाला मिला। इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि पगर पंचायत भानपुर में कैसे बिना एनओसी लिए पीडब्लूडी की सड़क पर लाखों रुपये का इंटरलाकिगं का भुगतान कर दिया गया? और किसी के मामले में जांच और कार्रवाई हो न हो, लेकिन सिसवाबुजुर्ग के सत्यनरायन चौधरी के घर से हरिजन टोला होते हुए इंद्रसेन मिश्र के घर तक बिछाई गई इंटरलाकिगं की जांच अवष्य हो, अगर ईओ के भीतर जरा सी ईमानदारी होगी तो इसकी जांच अवष्य कराएगें, क्यों इना खुला भ्रष्टाचार जनता कभी बर्दास्त नहीं करेगी, गांव वाले बताते हैं, कि इसके लिए सपा के वर्तमान विधायक जिम्मेदार है। जांच इस बात की भी होनी चाहिए, कि क्या पीडब्लूडी के बिना एनओसी लिए इंटरलसकिगं बिछा दी गई? सवाल उठ रहा है, कि क्यों पीडब्लूडी अपनी ही सड़क पर दूसरे की सड़क बनाने का एनओसी देगी? अगर नहीं दिया तो क्यों और कैसे पीडब्लूडी की सड़क पर इंटरलाकिगं बिछा दिया गया? इस मामले में नगर पंचायत भानपुर और डूडा सवालों के घेरें में है, और वह लोग भी सवालों के घेरे में जिन लोगों ने इंटरलाकिगं के नाम पर लाखों रुपये का बंदरबांट किया। नगर पंचायत वाले देख लीजिए उन लोगों को जों आप की गाढ़ी कमाई को नीजि संपत्ति समझकर इस्तेमाल कर रहे है।