बस्ती। अभी तक शिक्षा विभाग में ही सुना व देखा जाता था कि कुछ अध्यापक बिना विद्यालय आए ही नौकरी कर रहे हैं और हर महीने सरकार से वेतन उठा रहे हैं। लेकिन अब कृषि विभाग में भी ऐसे कारनामें हो रहे हैं। मंडलायुक्त की नाक के नीचे ही फल फूल रहे इस भ्रष्टाचार को कृषि विभाग के अधिकारी संरक्षण दे रहे हैं। इसके एवज में वह हर महीने मोटा कमीशन भी प्राप्त कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं कृषि विभाग के सहायक लेखाधिकारी बद्रीनाथ की। यह परिवार के साथ लखनऊ में निवास करते हैं। करें भी क्यों न, जब उप कृषि निदेशक खुद ही इन्हें हर महीने इन्हें वेतन पहुंचाने का काम कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, करीब दो साल पहले बद्रीनाथ का बस्ती स्थानांतरण हुआ। यह कृषि विभाग पहुंचे और अपना कार्यभार संभाला। लेकिन वह परिवार से दूर रहना बर्दाश्त नहीं कर पाए और अधिकारियों से हर महीने कमीशन देने के एवज में घर पर रहने का सौदा कर लिया। तय हुआ कि योजनाओं के बिल में यह कमीशन नहीं लेंगे, उल्टा अपने वेतन से ही कुछ धनराशि साहब को बतौर चढ़ावा चढ़ाएंगे। सौदा पक्का हो गया और तब से आज तक बद्रीनाथ कृषि विभाग नहीं लौटे। उप कृषि निदेशक कार्यालय के ज्यादातर कर्मी उन्हें देखे तक नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि खुद नए वाले डीडी साहब से भी मिलने कभी बद्रीनाथ नहीं आए। चूंकि सारी व्यवस्था पूर्व में किए गए करार के तहत चल रही है ऐसे में न ए वाले डीडी साहब भी चुप्पी साधे हुए हैं।
बद्रीनाथ के न आने से कृषि विभाग में वित्तीय अनियमितता भी हो रही है। वित्तीय बिलों का भुगतान बिना सहायक लेखाधिकारी के हस्ताक्षर के हो रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि बिलों पर लेखाकार हस्ताक्षर करके मोटा कमीशन चांप रहे हैं। बिना 10 प्रतिशत कमीशन लिए वह किसी बिल का भुगतान नहीं करते हैं। ऐसे में लेखाकार खुद भी नहीं चाहते हैं कि बद्रीनाथ वापस आएं वरना उनका कमीशन कम हो जाएगा। कृषि विभाग सरकार के जीरो टोलरेंस नीति का मखौल उड़ा रहा है। प्रशासन बैठकर तमाशा देख रहा है। मामला तब और भी गंभीर हो जाता है जब वह मंडलायुक्त कार्यालय परिसर का हो। इसी परिसर में कृषि भवन स्थित है। लेकिन, मंडलायुक्त की नाक के नीचे फल फूल रहे भ्रष्टाचार का वह भी संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
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