बस्ती। हर्रैया महाकाल टी सेंटर के मालिक और भाजपा के मनोनीत सभासद रवि गुप्त/शनि गुप्त इस बार अपने ही नौकर की बीबी के साथ अवैध संबध में फंस गएं है। इसी के चलते नौकर शिवभोला उम्र 32 साल पुत्र राम शंकर गिरी की जान चली गई। बिसरा रिपोर्ट में मरने का कारण जहर बताया गया। पीएम में चोट के निशान भी सामने आया। मृतक शिवभोला के भाई पप्पू ने हर्रैया थाने में रवि गुप्त के खिलाफ तहरीर दी है। ध्यान देने वाली यह है, कि पंचनामा में गवाह के रुप में रवि गुप्त ने अपने आपको शनि गुप्त पुत्र आशाराम बताकर हस्ताक्षर किया, और जो मोबाईल 8604601600 लिखाया गया, वह रवि गुप्त के नाम है। इसी रवि और शनि के नाम के चक्कर में इन्हें सभासदी से भी हाथ धोना पड़ सकता है, वैसे इनका शपथ-ग्रहण नहीं हुआ, जब कि अन्य का हो चुका हैं, जिसमें दीपक चौहान गांजा तस्कर शामिल है। पीएम हाउस में रवि गुप्त और मृतक की भाभी जो ‘तेजप्रताप सिंह उर्फ सुडडु सिंह’ के यहां काम करती है, ने सबके सामने रवि गुप्त पर आरोप लगाया कि तुम्हारे चलते मेरे देवर की जान गई, तुमने मेरे देवर की हत्या की है। तुम हत्यारे हो। तुमने और रुचि ने मिलकर मेरे देवर को जहर दिया। जैसे ही मृतक की पत्नी रुचि को यह पता चला कि उसका पति मर गया, वह घर छोड़कर कहीं चली गई, कहां गई, इसकी जानकारी ससुराल वालों को नहीं है। इसकी एक चार साल की बेटी भी है। चूंकि रुचि देखते में बहुत ही खूबसूरत है। इस लिए गुप्ताजी का मन ढ़ोल गया होगा। वैसे भी कहा गया है, कि किसी को भी पराई पत्नी पर बुरी नजर नहीं डालनी चाहिए, क्यों कि इसका अंजाम बुरा ही बुरा होता है, अच्छा तो हो ही नहीं सकता।। रवि गुप्त और रुचि के मामले में एक बार फिर अवैध संबधों के नतीजे के बारे में दुनिया को पता चल गया।
हर्रैया थाने में दी गई तहरीर में मृतक के भाई पप्पू पुत्र राम शंकर गिरी निवासी बसंत थाना दुबौलिया तहसील हर्रैया ने लिखा कि उासका भाई शिवभोला उम्र 32 साल जो मजदूरी करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करता था। वह महाकाल टी सेंटर के मालिक रवि गुप्त पुत्र अज्ञात काम करता था, जब मालिक ने मजदूरी का पैसा नहीं दिया तो भाई घर वापस आ गया। उसके बाद मालिक भाई के घर आए, और वापस होटल ले गए। इसके बाद होटल के मालिक बराबर घर आते जाते रहें, इसी बीच उसके भाई की पत्नी रुचि से रवि गुप्त का अवैध संबंध यानि प्यार हो गया। रवि रोज घर आता और भाई की पत्नी के साथ रत गुजारता। इसकी जानकारी जब उसके भाई को हुई, तो भाई ने काफी विरोध किया, फिर भी प्यार/अवैध संबध जारी रहा। रवि मेरे भाई को प्रताड़ित करने लगे। धमकी दिया कि अगर हम दोनों के बीच बधा बने रास्ते से हमेशा के लिए हटा दिए जाआगें। लिखा कि दो अर्पेल 26 को रवि और भाई की पत्नी रुचि ने मिलकर मेरे भाई को जहर दे दिया। भाई के साथ मारपीट भी की गई। शरीर पर चोंट के काफी निशान भी रहे। लिखा कि इसे लेकर परिवार की जान का खतरा हो गया, और किसी भी समय परिवार के साथ अप्रिय घटना घट सकती है। आज जो रवि गुप्त/शनि गुप्त की इतनी हिम्मत बढ़ गई, वह अवैध कमाई के चलते ही बढ़ी, इसी अवैध कमाई ने इन्हें उस भाजपा का सभासद मनोनीत करा दिया, जिसने भाजपा प्रत्याशी को हराया। इसी अवैध कमाई के चलते इन्हें भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं का साथ मिलता। अवैध कमाई करने वाले लोग ही भाजपा नेताओं के चहेते, दुलारा और प्यारा बने हुएं है। लेकिन इस बार गुप्तजी बहुत बुरे फंस गए है, भले ही यह अपने आकाओं और पैसे के बल पर एफआईआर से बच जा रहे हैं, चूंकि मामला जहर देने से किसी के मौत से हैं, इस लिए पुलिस भी अधिक दिन तक अपने आपको नहीं रोक पाएगी।
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