बस्ती। जिधर भी देखों जहां भी देखों वहीं भ्रष्टाचार। लगता ही नहीं जिले में नेता और कोई सरकारी तंत्र काम कर रहा है। भ्रष्टाचार की कोख से जन्में ठेकेदार, ऐसे भवनों का निर्माण कर रहे हैं, जिनकी आयु एक साल भी नहीं होती, जिस करोड़ों के भवन की आयु 50 साल होनी चाहिए, वह एक साल में ही जर्जर हो जा रही हैं, भवन ही हालत ऐसी हो गई हैं, कि भवन में काम करने वाले सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रह रहें, इन्हें हमेषा डर लगा रहता है, कि कहीं छत न गिर जाए, इसी लिए कर्मचारी भवन में कम और बाहर इधर उधर अधिक टहलते रहते है।
दैनिक तेजयुग न्यूज़
जाहिर सी बात जिस भवन की दिवारों के प्लास्टर अगंुली रखते ही भरभरा जा रही हो, सभी खिड़कियों के शीशे टूट गए हो, फर्श टूट गई हो, सीढ़ी मानो अब गिरा तब गिरा लगा हो, छते टपक रही हो, उसमें कोई काम करे तो कैसे? यह उस कृषि विभाग का भवन हैं, जिसके मंत्री प्रदेश के सबसे भ्रष्ट माने जाते है। इस भवन की अगर जिा कृषि अधिकारी के द्वारा मानिटरिगं की गई होती तो आज भवन की हालत ऐसी न होती, सवाल उठ रहा है, कि गुणवत्तहीन भवन को डीओ ने कैसे कार्यदाई संस्था आरईडी से टेकओवर कर लिया, यह भवन विगास खंड सल्टौआ के परिसर में निर्मित्त है। इस भवन को ठेकेदार बलराम सिंह ने बनाया, किसी को हीन ही नहीं हो रहा है, कि करोड़ों की लागत से बना यह किसान कल्याण भवन मात्र दो-ढ़ाई साल में ही जर्जर हो जाएगा।
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रिपोर्टर को भी भवन की हालत देखकर हैरानी हुई। उससे अधिक भवन में काम करने वाले कृषि विभाग के कर्मचारियों को भयभीत होते देख हुई। कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें हमेषा यह डर लगा रहता है, कि अगर भवन गिर गया तो हम लोगों की जान बच पाएगी, कि नहीं, कहते हैं, कि एक भी खिड़की ऐसी नहीं जो बिना शीशा के न हो, खिड़कियों में शीशा न होने से कार्यालय में बंदर तक घुस आते हैं, और काटने के साथ सरकारी कागज भी नुकसान करते है। कहते हैं, कि बंदरों से बचने के लिए हम लोगों ने वेतन से खिड़कियों में तार लगा दिया है। जर्जर भवन को देख ऐसा लगता है, कि इसमें बजट का आधा लगाया गया होगा और आधा बंदरबांट हो गया होगा। इस भवन की कार्यदाई संस्था आरईडी के अधिकारियों और ठेकेदारों ने छवि इतना खराब हैं, कि कोई भवन और सड़क सुरक्षित ही है। इसी कार्यदाई संस्था ने हाल ही में क्रिटिकल गैप निधि से जिला अस्पताल में 50 मीटर सछ़क बनवाया, सड़क एक सप्ताह में ही टूट गई, जब जिले के प्रभारी मंत्री दौरा करने गए, तो रातों-रात सड़क बनाकर उसका पन्नी बिछा दिया, और मंत्रीजी से कह दिया कि आज ही मरम्मत हुआ है।
विभाग ‘दागी’ ठेकेदार ‘बलराम सिंह’ पर मेहरबान क्यों?
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बार-बार सवाल उठ रहा है, कि कार्यदाई संस्था आरईडी के अधिकारी दागी ठेकेदार बलराम सिंह पर इतना मेहरबान क्यों? क्यों नहीं विभाग ऐसे ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करता, जो गुणवत्ताविहीन भवन का निर्माण करते हैं, अब जरा अंदाजा लगाइए, कि इस ठेकेदार ने विकास खंड सल्टौआ के परिसर में करोड़ों की लागत से कृषि भवन का निर्माण किया, यह भवन 50 लाख कौन कहे, दो-ढ़ाई साल में ही जर्जर हो गया, और फिर उसी ठेकेदार को उसी ब्लाक के परिसर में और उसी जर्जर भवन के बगल में ब्लाक के अधिकारियों और कर्मचारियों के आवासीय भवन का 5.61 करोड़ का ठेका मिल गया। जिस ठेकेदार को 50 फीसद लाभ खाने की आदत पड़ गई हो, वह ठेकेदार कैसे गुणवत्तापरक भवन का निर्माण करेगा? आरईडी के जेई लालजी निषाद कहते हें, कि यह ठीक हैं, कि ठेकेदार बलराम सिंह घटिया कृषि भवन का निर्माण किया, लेकिन मेरे रहते जेई ब्लाक के भवन को गुणवत्ताविहीन बना ही पाएगें, अगर बनाएगें तो ब्लैक लिस्टेड की कार्रवाई की जाएगी। सवाल उठ रहा है, कि उस ठेकेदार पर कैसे भरोसा किया जाए, जिसने ठेका पाने के लिए 20 फीसद से अधिक कमीशन देना पड़ा हो। उस जेई पर भरोसा किया जाए, जो कमीशन लेकर ओके करता हैं, उस एक्सईएन और एई पर भरोसा कैसे किया जाए, तो अनुबंध करने से पहले कमीशन लेते है।
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