बस्ती। सीएचसी कुदरहा (बनहरा) में संविदा स्टाफ नर्स कुसुम व अन्य के द्वारा वादी के पुत्रवधू प्रेमा देवी पत्नी नीरज कुमार का लापरवाही पूर्वक जबरन प्रसव कराने से नवजात का सिर धड़ से अलग हो जान तथा सिर पेट मे ही रह जाने के मामले में स्टाफ नर्स और अस्पताल के तीन अन्य कर्मचारी के विरुद्व मुकदमा दर्ज हुआ है। यह घटना नीरज चौधरी के मैक्स हास्पिटल में घटी। इस व्यक्ति पर दंबगई से गलत काम कराने का आरोप है। कुदरहा के एमओईसी और डाक्टर को गाली दे देता है, और जब चाहता कुदरहा सीएचसी से मरीज को उठाकर अपने अस्पताल ले जाता है। फार्मासिस्ट को तो यह कुछ समझता ही नहीं। यह भी सवाल उठ रहा है, कि क्या दबदबा बनाने के लिए ही इसने अपने हास्पिटल का उदघाटन बाबूजी से करवाया। तभी तो यह बाबूजी को अपना आका मानता है। बाबूजी के चलते सीएमओ की हिम्मत नहीं पड़ती कि वह इसके अस्पताल पर हाथ डाल सके, इसे डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी और डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह का दुलारा भी कहा जाता है। अगर दुलारा न होता तो बिना सुविधा के अस्पताल न चलाता और न डंके की चोट पर सीएचसी के सामने बिना लाइसेंस के मैक्स पैथालाजी ही चलता, खुले आम बिना लाइसेंस के मेडिकल की दवा की दुकान चला रहा, डीआई तक इससे महीना लेकर जाते है। बाबूजी के चलते इसने सीएचसी के सारे लोगों को अपना गुलाम बना लिया, कोई इसके खिलाफ कार्रवाई करने को कौन कहे, बात भी नहीं करते। इसका नाम तब चर्चा में आया जब एक महिला के बच्चे का घड़ बाहर आ गया और सिर अंदर ही रह गया। दुनिया का यह पहला ऐसा केस होगा, जिसमें स्टाफ नर्स कुसुम की वजह से बच्चा न सिर्फ मर गया, बल्कि प्रसूता को इतना दर्द झेलना पड़ा, कि वह रह-रहकर बेहोश हो जाती। मैक्स हास्पिटल में जब स्टाफ नर्स ले गई तो उस समय बच्चे का धड़ बाहर था, और सिर महिला के पेट में था। ऐसा दर्दनाक वाक्या न तो किसी ने सुना और न किसी ने देखा ही होगा। इसके लिए उन लोगों के खिलाफ जितनी भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जो लोग इस दर्दनाक हादसे के जिम्मेदार है। अस्पताल को तो सील कर दिया, लेकिन न तो मालिक और न स्टाफ नर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया गया।
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