बस्ती। प्रधान के रुप में पांच साल तक और प्रशासक के रुप में एक माह तक गांव के विकास के नाम पर लूटने वाले प्रधानजी बहुत हो गया, हाईकोर्ट ने आप के आगे के लूट पर रोक लगा दी है। जिले के 1185 ग्राम पंचायतों में इन पांच सालों में मनरेगा और ग्राम निधि मिलाकर कुल लगभग दस अरब खर्च हुआ, इतना धन खर्च होने के बाद भी एक भी प्रधान ने अपने गांव को माडल नहीं बना पाए। इन पांच सालों में प्रधानों ने सचिवों और बीडीओ के साथ इतना लूट मचाया कि लूटने का बस्ती में रिकार्ड बन गया। हाईकोर्ट के रोक के बाद चुनाव के होने के रास्ते साफ हो गए, सरकार को कम से चुनाव कराने के लिए 45 दिन चाहिए, जो र्प्याप्त है। वोटर लिस्ट फाइनल हो चुका, बैलैट बाक्स की तैयारी पूरी हो चुकी। बस ओबीसी कमिषन की रिपोर्ट आनी बाकी। अब 45 दिन गांव प्रशासक के रुप में एडीओ के पास रहेगा। चुनाव आयोग की भी पूरी तैयारी है, अगर सरकार की ओर से हरी झंडी मिल जाती तो चुनाव समय से हो जाते। सरकार जानबूझकर समय से चुनाव कराना नहीं चाहती थी, ताकि प्रशासक के रुप में प्रधानों को एक साल तक और लूट करने का मौका मिले। देश की यह पहला ऐसा राज्य होगा, जो समय से पंचायत का चुनाव कराना नहीं चाहता। इसके लिए बड़बोले मंत्री ओमप्रकाष राजभर को जिम्मेदार माना जा रहा है। कहा भी जाता है, जो विभागीय मंत्री समय से चुनाव न करा सके, उसे त्वरित इस्तीफा दे देना चाहिए। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा भी था, कि जब आपको मालूम हैं, कि प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 26 को समाप्त हो रहा है, तो क्यों नहीं तैयारी की, क्यों नहीं ओबीसी कमिशन का गठन किया, क्यों कार्यकाल समाप्त होने के बाद गठन किया। हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा था, कि जब आप को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार नहीं तो कैसे कर दिया? बहहाल, हाईकोर्ट के रोक के बाद चुनाव के आसार बढ़ गए हैं, बस अब चुनाव आयोग तारीख तय करनी है। बताते हैं, कि प्रशासक बनने के बाद भी प्रधानों ने सचिवों के साथ मिलकर करोड़ों रुपया का फर्जी भुगतान लिया। प्रधानों की मंशा जाते-जाते गांव को खोखला करने का था। ओमप्रकाश राजभर के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का नया रिकार्ड बना। उसके बाद भी मंत्रीजी को न तो कोई शर्म और न कोई अफसोस है। इनका बस चलता तो आगे भी प्रधानों को लूटने का मौका देते। बहरहाल, हाईकोर्ट के निर्णय के बाद लूटपाट करने वाले प्रधानों में मायूसी छाई हुई है। यह पहली ऐसी सरकार हैं, जिसने प्रेधानों को लूटने का पूरा मौका दिया। योगीजी की मंशा थी, कि जिना प्रधान लूटेगें उन्हें 27 के चुनाव में मदद करेगें, सरकार की मंशा तो विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत का चुनाव कराने की थी, लेकिन कोर्ट ने प्रधानों की तरह सरकार की मंशा पर भी पानी फेर दिया। हालांकि सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है। देखना है, कि सरकार अपने अधिकारों का इस्तेमाल करती है, कि नहीं?