हापुड़
15 फ़रवरी रविवार को श्रवण नक्षत्र तथा सर्वार्थसिद्धि योग में मनाया जाएगा तथा कावड़ जलाभिषेक सायं 5.05 बजे से किया जाएगा भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि चतुर्दशी तिथि 15 फ़रवरी को दोपहर बाद 5 बजकर 05 मिनट से प्रारम्भ होकर 16 फ़रवरी को दोपहर बाद 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगा निर्णयसिंधु वचन अनुसार प्रदोषव्यापिनी ग्राह्या शिवरात्रिश्चतुर्दशी। अर्थात शिवरात्रि में चतुर्दशी प्रदोषव्यापिनी ग्रहण करे और आदित्यास्तमये काले अस्ति चेद्या चतुर्दशी। तद्रात्रिः शिवरात्रिः स्यात्सा भवेदुत्तमोत्तमा ।। अर्थात सूर्यास्त समय में यदि चतुर्दशी हो तो उस रात्रि को 'शिवरात्रि' कहते हैं तथा एक अन्य शास्त्र प्रमाण के अनुसार अर्धरात्रादधश्चोर्ध्वं युक्ता यत्र चतुर्दशी। तत्तिथावेव कुर्वीत शिवरात्रिव्रतं व्रती ।। अर्थात आधीरात के पहले और आधी रात के बाद जहाँ चतुर्दशी युक्त हो उसी तिथि में ही व्रती शिवरात्रि व्रत को करे 15 फ़रवरी को पूरी रात चतुर्दशी प्राप्त होने होने से उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा 15 फ़रवरी को सायंकाल 6.09 बजे से प्रारम्भ होकर सूर्योदय पूर्व तक 4 प्रहर पूजा करना अत्यंत शुभ फलदायक होगा, लिंगपुराण के अनुसार फाल्गुन मास में शिवालय के अतिरिक्त स्फटिक शिवलिंग का अभिषेक करने से मनोकामना पूर्ण होती है भगवान भोलेनाथ का अभिषेक गंगाजल से, गाय के दूध से, गन्ने के रस से करना उत्तम रहेगा मनोकामना पूर्ति के लिए पूजन में बेलपत्र,भाँग, धतूरा व फूल, आंक, शमी पुष्प व पत्र, कनेर कलावा व फल, मिष्ठान आदि अवश्य चढ़ाये साथ में अक्षत, तिल के साथ नीले, सफ़ेद व पीले पुष्प दूर्वा भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है जिस भी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु की नकारात्मक स्थति है उन्हें शिवरात्रि को चांदी अथवा ताँबे के नाग-नागिन का जोड़ा भी चढ़ाना चाहिए यदि संभव हो तो इस दिन दूध, दही, घी, गन्ने का रस, शहद, तेल आदि से मनोकामना अनुसार रुद्राभिषेक योग्य ब्राह्मण से कराना चाहिए महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को कमल पुष्प और विल्वपत्र अवश्य चढ़ाना चाहिए यथा सामर्थ्य दान भी देना चाहिए इस दिन शिवालय में दीपक अवश्य जलाएं शिवपुराण के अनुसार इस दिन पूजन समय पंचाक्षर मंत्र "नमः शिवाय" के साथ देवी मंत्र 'नमः शिवायै " का जप करते हुए रात्रि जागरण करने से व्यक्ति पाप व कष्ट से दूर होकर मनोकामना पूर्ण के साथ शिवधाम को प्राप्त होता है. भगवान भोलेनाथ को तुलसी, हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए।
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