बस्ती। अगर पूर्व विधायक के करीबी और ठेकेदार मनोज सिंह नगर पंचायत भानपुर के चेयरमैन बन जाएगें, तो भानपुर का क्या होगा? यह सवाल उस समय से उठ रहा है, जब से 27 लोग चेयरमैन लड़ने की तैयारी कर रहे थे, जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार का अनेक आरोप लगा हो, अगर वह चेयरमैन हो जाएगा, तो क्या नगर पंचायत भानपुर भ्रष्टाचारमुक्त हो पाएगा। सवाल तो भाजपा के नितेश शर्मा, एसपी के मृगेंद्र सिंह, निर्दल राजाराम तिवारी, भाजपा बृजेंद्र सिंह, व्यापार मंडल के सुरेश गुप्त, एसपी के और विधायकजी के करीबी राम तीरथ यादव, एसपी के राजकुमार सोनी एवं एसपी के ही अंकित पांडेय जैसे उन 27 प्रत्याशियों पर भी उठ रहा है, जिन्होंने चेयरमैन के लिए खूब प्रचार प्रसार किया, अगर चुनाव हो जाता है, तो इसमें से कोई एक चेयरमैन का मजा ले रहा होता। ठेकेदार मनोज सिंह को लेकर लोगों की दिलचस्पी कुछ खास है। कहा जा रहा है, कि वैसे तो आधा दर्जन से अधिक नगर पंचायतों के असली और नकली चेयरमैन खुद ठेकेदारी का कर रहे हैं, और जिन नगर पंचायतों में चेयरमैन ठेकेदार की भूमिका निभा रहे हैं, वहां पर सबसे अधिक कमीशन का खेल हो रहा है, महादेवा विधानसभा क्षेत्र के एक चर्चित नगर पंचायत के नकली चेयरमैन ने तो अब तक के कमीशन के सारे रिकार्ड तोड दिए, यह आकड़ा 45 फीसद तक पहुंच गया। अब जरा अंदाजा लगाइए कि जिस भाजपा शासित नगर पंचायत में 45 फीसद का कमीशन चलेगा उस नगर पंचायत के निर्माण कार्यो की गुणवत्ता कैसी होगी? इसका अंदाजा आप लोग अच्छी तरह लगा सकते है। जिस तरह भाजपा के असली और नकली प्रमुखों ने भ्रष्टाचार का रिकार्ड बनाया, उसी रास्ते पर नगर पंचायत के असली और नकली चेयरमैन चल पड़े है। कहना गलत नहीं होगा, कि इन्हीं लोगों के भ्रष्टाचार का खामियाजा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को हार के रुप में भुगतना पड़ा, चुनाव से पहले मीडिया बार-बार इस बात की ओर ईषारा कर रही थीे कि प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्ष के भ्रष्टाचार का खामियाजा कहीं भाजपा प्रत्याशी को न भुगतना पड़े, और वही हुआ, जिसकी संभावना जताई जा रही थी। यह भी कहा जा रहा है, कि अगर पूर्व विधायक की पत्नी दो बार नगर पंचायत रुधौली चेयरमैन से हारी है, तो उसमें सबसे बड़ा हाथ मनोज सिंह की खराब छवि को बताया जा रहा है। कहना गलत नहीं होगा, कि मनोज सिंह की खराब छवि का खामियाजा विधायकजी की पत्नी को एक बार नहीं बल्कि दो बार भुगतना पड़ा, अब पता नहीं तीसरी बार मौका मिले या न मिले, अगर मिल गया तो तीसरी बार भी वही परिणाम होने की संभावना जताई जा रही है, जो पिछले दो चुनाव में हो चुका, अगर भाजपा के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़े तो हार का कारण स्पष्ट नजर आ रहा है। विधायकजी की पत्नी तो नगर पंचायत रुधौली से नहीं जीत पाई, क्या विधायकजी के करीबी और विधायकजी का नाम खराब करने वाले मनोज सिंह नगर पंचायत भानपुर का चेयरमैन बन पाएगें? अगर यह नगर पंचायत भानपुर के चेयरमैन हो भी गए तो इनका भी नाम उन असली/नकली चेयरमैन में शामिल हो जाएगा, जो स्वंय ठेकेदारी करते है। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि आज अधिकांश ठेकेदार क्यों नगर पंचायत भानपुर की ओर भाग रहा है, इस लिए भाग रहा है, क्यों कि वहां पर कोई चेयरमैन नहीं है, अगर कोई चेयरमैन होता तो बाहर के ठेकेदारों की दाल नहीं गलती। खराब छवि वालों का चेयरमैन बनने का सपना अधूरा ही रह जाएगा, क्यों कि क्षेत्र के लोग जिस तरह पिछले छह साल से उन लोगों को देख रही है, जिन लोगों ने नगर पंचायत भानपुर को बर्बाद कर दिया, क्षेत्र की जनता को अगर चेयरमैन चुनने का मौका मिला तो नगर पंचायत भानपुर को लूटने वालों की जमानत जप्त हो जाएगी।
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- Last Update 03 Nov, 11:16 PM
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