बस्ती। लगता है, कि अब ब्राहृमण महासभा से जीजा और साले की बिदाई की घढ़ी आ गई है। जिस तरह महासभा के राष्टीय उपाध्यक्ष ई. राधेष्याम पांडेय ने दोनों को बर्खास्त करने का और एफआईआर दर्ज करवाने का अल्टीमेटम अध्यक्ष को देते हुए कहा कि अगर दोनों महासभा से नहीं निकाले गए तो वह महासभा के प्रांगण में बर्खास्त होने तक धरने पर बैठेगें। इनका समर्थन अनेक लोगों ने किया। इसे देखते हुए महासभा के राष्टीय महामंत्री शंभूनाथ मिश्र और कोषाध्यक्ष सत्ते शुक्ल के सामने महासभा से बाहर होने का संकट खड़ा हो गया, वैसे ही दोनों से कह दिया गया है, कि दोनों में से कोई एक पद पर ही रहेगा, क्यों कि महासभा में परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। जिन जीजा और साले का 25 साल तक महासभा में स्रामाज्य रहा, वह स्रामाज्य का किला ढ़हने वाला है। अगर यह दोनों खुद से इस्तीफा दे देते हैं, तो थोड़ी बहुत इज्जत बच जाएगी, और अगर कहीं निकाले गए, तो 25 साल की इज्जत मिटटी में मिल जाएगी। महांमत्री की हालत राम मंदिर के चंपत राय जैसी हो गई है।
ई. राधेष्याम पांडेय की ओर से अध्यक्ष को लिखा गया कि महासभा के निष्ठावान सदस्यों का स्पष्ट और दृढ़ आग्रह है, कि शंभूनाथ मिश्र और शंभूनाथ शुक्ल को तत्काल प्रभाव से उनके सभी पदों से बर्खास्त किया जाए, दोनों की आजीवन सदस्यता तत्काल निरस्त और भंग की जाए, दोनों को संगठन के सभी दायित्वों और अधिकारों से हमेषा के लिए मुक्त किया जाए। चेतावनी के लहजे में कहा कि ऐसा न होने पर सभी पदाधिकारी प्रांगण में धरने पर बैठने को मजबूर होगें। दोनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो। यह दोनों संगठन के नाम पर कलंक है। कहा कि संगठन की गरिमा के लिए दोनों का ब्राहृमण महासभा में रहना ठीक नहीं है। डा. आशीष नरायन त्रिपाठी ने अध्यक्ष को लिखते हुए कहा कि जिस तरह 25 साल बाद हिसाब दिया गया, अगर उस पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले भविष्य में इस कलंकित इतिहास के चलते आपके भी उत्तरदायित्व पर सवाल खड़ा करेगा। 25 साल तक ऐसे लोग चंदा लेते रहें, और खर्च करते रहे, जिन्हें हिसाब देने की समझ ही नहीं, चंदें का हिसाब न देना पड़े इस लिए बेहयाई के साथ जीजा और साले ब्राहृमण महासभा से चिपके रहे। इसमें इनके चाटुकारों की भी मिली भगत है। कहा कि आज भगवान परशुराम का अधूरा मंदिर चीख-चीख कर चंदा लूटने के कारनामों को एक-एक करके सबके सामने ला रहा है, इन दोनों ने पूरे समाज में ब्राहृमण महासभा को मजाक बनाकर रख दिया है। प्रषांत पांडेय लिखते हैं, कि अध्यक्षजी से बात करके आज ही मुकदमा दर्ज कराया जाए, क्यों कि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है। अगर किसी को जीजा और साले से लगाव है, तो वह घोटाले की भरपाई कर दें। हर मंगलवार को जो आरती होती है, उसका भी पैसा चोरी हुआ है, इसकी जानकारी भी महामंत्री को है। सब मिलकर लूट रहें है। गुपचुप चंदा वसूला गया, जो धन कभी महासभा में आया ही नहीं, जो आया उसे तीन चार मिलकर डकार गए, इन 25 सालों में ब्राहृमण महासभा में मीटिगं, मीटिगं, मीटिगं और मीटिगं ही करते रहें। कहा कि तत्काल प्रभाव से जीजा और साले के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए।
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