बस्ती। नगर पंचायत रुधौली स्थित मगरेराम पूर्व माध्यमिक विद्यालय की सुरक्षित भूमि को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। विद्यालय प्रबंधन की ओर से जिलाधिकारी बस्ती को प्रार्थना पत्र सौंपकर विद्यालय की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने, निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग की गई है। प्रार्थना पत्र के अनुसार विद्यालय वर्षों से आराजी संख्या 714 की भूमि पर संचालित है, जहां छात्र-छात्राओं को शिक्षा दी जा रही है। शिकायतकर्ता रामसागर चौधरी पुत्र बलिकरन का आरोप है कि कुछ लोग विद्यालय की सुरक्षित भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायत में चांदनी चौधरी पत्नी मनोज चौधरी तथा अन्य खातेदार बाबूलाल एवं छबिलाल पुत्र सुखदेव का भी उल्लेख करते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की गई है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि 30 जुलाई 2026 को भूमि विवाद को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। वहीं 4 अगस्त 2026 को विद्यालय की चारदीवारी तोड़कर भूमि पर निर्माण कर कब्जा किए जाने की आशंका व्यक्त की गई। शिकायत के अनुसार विरोध करने पर संबंधित पक्ष ने स्वयं को भूमि का स्वामी बताया, जबकि ग्रामीणों ने इसे विद्यालय की सुरक्षित भूमि बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर विद्यालय प्रबंधन को धमकियां दी गईं। प्रबंधन ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो विद्यालय की भूमि पर अवैध निर्माण होने से विद्यार्थियों के शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भूमि विवाद के बीच कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गाटा संख्या 714 में पहले से मिनजुमला .101 हेक्टेयर तथा 0.314 हेक्टेयर का विवरण दर्ज है, तो तीसरा मिनजुमला किस आधार पर दर्ज किया गया और उसका राजस्व अभिलेखों में क्या आधार है?इसी प्रकार यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि सिविल न्यायालय में हुए सुलह-समझौते में विद्यालय की भूमि को सुरक्षित बताया गया था, तो बाद में उसी भूमि के किसी हिस्से का विक्रय किस आधार पर हुआ। यदि ऐसा हुआ है, तो क्या संबंधित विभागों की आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी तथा पूरी प्रक्रिया प्रचलित कानूनों के अनुरूप थी?
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यालय की भूमि का हिस्से की खरीद मनोज चौधरी एवं उनकी पत्नी चांदनी चौधरी द्वारा किए जाने का दावा किया गया है। इन दावों की सत्यता तथा भूमि के स्वामित्व और विक्रय से जुड़े अभिलेखों की जांच प्रशासनिक स्तर पर होना आवश्यक बताया गया है।विद्यालय प्रबंधन ने जिलाधिकारी से आराजी संख्या 714 का सीमांकन कराकर भूमि को सुरक्षित कराने, किसी भी प्रकार के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
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